दो बार से उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव हार रही समाजवादी पार्टी इस बार आक्रामक मोड में है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को पटखनी देने के बाद से सपा प्रमुख अखिलेश यादव के हौसले बुलंद हैं। वह हर दिन नए-नए फार्मूला दे रहे हैं। अब उन्होंने एलान किया है कि हर सीट पर सपा अपने 27 हजार वोट जोड़ेगी और बीजेपी के 27 हजार वोट कम करने का काम करेगी। अखिलेश यादव ने यह एलान सपा की प्रदेश कार्यकारिणी की मीटिंग के बाद दिया। इसकी असली वजह साल 2022 के चुनाव नतीजों में छिपी हुई है।

 

2022 में वोट प्रतिशत और सीटों में इजाफा होने के बावजूद समाजवादी पार्टी का गठबंधन सत्ता से काफी  दूर रह गया था। अब इसी को ध्यान में रखते हुए अखिलेश यादव ने अलग तरीके की रणनीति बनाई है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी वह PDA का फार्मूला लेकर आए थे और अलग-अलग जातियों को जोड़ने की उनकी रणनीति काफी हद तक सफल रही थी। अब इस फार्मूले के साथ-साथ वह 27 हजार वोट काटने और जोड़ने की बात भी कर रहे हैं। आइए इसको पिछले चुनाव के नतीजों से समझते हैं। 

2022 में क्या हुआ था?

2022 में बहुमत से 92 सीट दूर रह गई समाजवादी पार्टी को वोट अच्छे मिले थे। 32.76 प्रतिशत वोट पाने वाली सपा को सीटें 111 ही मिली थीं जबकि 42.20 प्रतिशत वोट के साथ बीजेपी ने 255 सीटें जीत ली थीं। बसपा को 13.17 प्रतिशत वोट मिला था और वह सिर्फ एक सीट जीत पाई थी जबकि सिर्फ 1.66 प्रतिशत वोट पाने वाले अपना दल (सोनेलाल) को 12 सीटों पर जीत मिली थी।   

2022 के चुनाव नतीजे

BJP-255
SP-111
अपना दल (S)-12
RLD-8
SBSP-6
निषाद पार्टी-6
जनसत्ता दल-2
कांग्रेस-2
BSP-1

कहां चूक गई थी सपा?

अगर 2022 के चुनाव नतीजों को विस्तार से देखें तो पता चलता है कि बहुत सीटें ऐसी थीं जिन पर रोमांचक मुकाबला हुआ और बहुत कम अंतर से ही नतीजे इधर से उधर हो गए। कुल 53 सीटें ऐसी थीं जिन पर हार और जीत का अंतर 5 हजार वोट से भी कम था। इसमें से एनडीए ने 33 और सपा ने 19 सीट पर जीत हासिल की थी। 

 

अब अगर अखिलेश यादव के 27 हजार वोट वाले आंकड़े के हिसाब से देखें तो पता चलता है कि 403 में से 259 सीटें ऐसी थीं जिन पर हार और जीत का अंतर 27 हजार से कम वोटों का था। इन 259 में 143 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी। वहीं, अब बीजेपी के साथ मौजूद दलों में अपना दल 8, RLD को 5 और SBSP को 3 सीटों पर जीत मिली थीं। यानी 259 में से 159 सीटें एनडीए के खाते में गईं।

 

वहीं, सपा को इनमें से 92 सीटों पर ही जीत मिली थी। यानी कम अंतर वाली जीतों में ज्यादा जीत बीजेपी की थी और सपा इस मामले में काफी पीछे थी। अब अगर किसी भी तरह से सपा इन कमजोर वोटों के अंतर वाली 100 सीटें भी अपने पाले में कर पाती है तो उसका काम बन जाएगी और वह आसानी से सरकार बनाने की स्थिति में आ जाएगी।

 

अखिलेश यादव ने 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य रखा है और बीजेपी के 27 हजार वोट कम करने की बात कही है। इस तरह कुल 54 हजार वोटों का अंतर होता है। अगर इसमें से हर सीट पर 20-30 हजार वोटों का अंतर हो गया तो यूपी में सरकार जरूर बदल सकेगी। हालांकि, ये सब इतना आसान नहीं होने वाला है क्योंकि 10 साल सरकार चलाने के बावजूद बीजेपी की स्थिति बहुत खराब नहीं मानी जा रही है। ऐसे में सपा के लिए बीजेपी को हराना इतना भी आसान नहीं होने वाला है।