हिन्दू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। एकादशी का पर्व साल में 24 बार आता है, जिनमें परमा एकादशी का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने से भक्तों को न सिर्फ भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि गरीबी दूर होती है और जीवन में धन-संपत्ति की प्राप्ति भी होती है। इस साल परमा एकादशी 11 जून को है। इस दिन व्रत रखना सभी भक्तों के लिए बेहद लाभकारी माना गया है, जिससे सुख, संपत्ति और वैभव की प्राप्ति होती है। धार्मिक जानकारों के मुताबिक इस दिन सभी भक्तों को व्रत कथा पढ़नी चाहिए, ताकि व्रत का महत्व समझ में आए।

 

11 जून को रात 12 बजकर 57 मिनट पर परमा एकादशी व्रत शुरू हो रहा है। इस दिन व्रत रखने के साथ भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। उसके बाद व्रत कथा पढ़नी चाहिए और फिर मंत्रों का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत का दोगुना लाभ मिल सकता है।

 

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परमा एकादशी व्रत कथा

एक समय की बात है कि काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नाम का एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। वह बेहद दयालु था लेकिन उसे आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था। पति-पत्नी दोनों अत्यंत गरीबी में अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। ब्राह्मण दूसरों से भिक्षा मांगकर अपने लिए भोजन जुटाता था। वहीं ब्राह्मण की पत्नी पति और घर आए मेहमानों का बहुत आदर-सम्मान करती थी। जब घर में कोई अतिथि आता, तो वह स्वयं भूखी रहकर भी अतिथि को भोजन कराती थी।

 

एक दिन ब्राह्मण भिक्षा मांगने गया लेकिन लोगों ने उसे भिक्षा देने से मना कर दिया। इसके बाद उसने सोचा कि भिक्षा मांगने की बजाय परदेस जाना चाहिए, ताकि कोई काम करके धन कमा सके। उसने अपनी पत्नी से कहा, 'हे प्रिय, गृहस्थी धन के बिना नहीं चलती। यदि तुम्हारी सहमति हो तो मैं परदेस जाकर कोई काम करूं, जिससे कुछ धन कमा सकूं। कई विद्वानों ने भी कर्म और मेहनत की सराहना की है।'

 

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इस पर ब्राह्मण की पत्नी ने कहा, 'मनुष्य को उसके पिछले जन्म के कर्मों का फल मिलता है। सुमेरु पर्वत पर रहने पर भी बिना पुण्य कर्मों के स्वर्ण नहीं मिलता। जो व्यक्ति पिछले जन्म में विद्या और भूमि का दान करता है, उसे अगले जन्म में विद्या और भूमि की प्राप्ति होती है। कुल मिलाकर भगवान ने भाग्य में जो कुछ लिखा है, उसे टाला नहीं जा सकता। इस कारण हम जो कर्म करते हैं, उसी का फल हमें मिलता है।'

 

इसके बाद ब्राह्मण की पत्नी ने कहा कि उसे अकेला छोड़कर परदेस जाना उचित नहीं है। यह बातचीत एक ऋषि ने सुन ली, जिन्होंने सुमेधा ब्राह्मण की प्रशंसा की। पति-पत्नी ने ऋषि का आदर-सत्कार किया और उन्हें भोजन कराया। तब ऋषि ने दंपत्ति को बताया कि मलमास के कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी का व्रत रखने से दुख और गरीबी दूर हो जाती है। ऋषि की बात मानकर दोनों ने परमा एकादशी का व्रत रखा। इसके प्रभाव से उनकी सारी परेशानियां दूर हो गईं और वे धनवान बन गए।

 

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परमा एकादशी में इन बातों का रखें ध्यान

 

1.परमा एकादशी के एक दिन पहले ही भक्तों को लहसुन, प्याज और मांस-मछली का सेवन नहीं करना चाहिए।
2.परमा एकादशी के दिन सुबह स्नान करें और स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं।
 3. इस साल परमा एकादशी के दिन पीले रंग के कपड़े पहनें। साथ ही काले रंग के कपड़े न पहनें।
4. सुबह की पूजा के बाद व्रत कथा पढ़ें। जो लोग व्रत कथा नहीं पढ़ सकते, उन्हें व्रत कथा सुननी चाहिए।
5. परमा एकादशी के दिन जरूरतमंद लोगों को धन, अन्न और वस्त्र का दान करना चाहिए।

 

नोट- इस खबर में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी सत्यता या प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करते हैं।