हिन्दू धर्म में भक्त मोतियों की माला के जरिए मंत्रों का जाप करते हैं। इसके ठीक उलट बौद्ध धर्म के कुछ मठों में चक्र घुमाकर मंत्रों का जाप किया जाता है। बौद्ध धर्म के मठों में कई भक्त प्रार्थना चक्र घुमाकर भगवान गौतम बुद्ध की उपासना करते हैं। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, भक्त जितनी बार चक्र घुमाते हैं, उतनी बार चक्र पर लिखे मंत्रों का पाठ माना जाता है, जिससे मंत्रों का जप हो जाता है। यह प्रार्थना चक्र एक ड्रम के आकार का होता है। यह चक्र तांबे, लकड़ी, चांदी और सोने का भी हो सकता है। यह प्रार्थना चक्र की परंपरा मुख्य तौर पर तिब्बत के बौद्ध मठों में अपनाई जाती है।
इस प्रार्थना चक्र को तिब्बती भाषा में मणि चक्र भी कहा जाता है। तिब्बत, नेपाल, भूटान और लद्दाख के कई मठों में यह प्रार्थना देखने को मिलती है। जहां भक्त प्रार्थना चक्र के जरिए मन की शांति पाते हैं। साथ ही अपने मन की नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर पाते हैं। अब सवाल उठता है कि इस चक्र की खासियत क्या है?
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प्रार्थना चक्र का रहस्य
प्रार्थना चक्र को घुमाने की प्रक्रिया में बेहद गहरा अर्थ छिपा है। माना जाता है कि प्रार्थना चक्र जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म का प्रतीक है। इसे घुमाकर मंत्र जाप करना बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, चक्र घुमाकर मंत्र जाप करने से न सिर्फ मन की शांति मिलती है, बल्कि व्यक्ति की आध्यात्मिक ऊर्जा भी बढ़ती है।
तिब्बत की खास परंपरा
तिब्बत के लोगों के जीवन में प्रार्थना चक्र बेहद अहम हिस्सा है। इसके जरिए भक्त हर दिन मंत्रों का जाप करते हैं। किसी त्योहार या खास पर्व के दिन लोग एकजुट होते हैं और अपने इलाके में मौजूद मठों में जाते हैं। वहां सामूहिक रूप से प्रार्थना चक्र घुमाकर मंत्रों का जाप करते हैं। यह परंपरा तिब्बत के गांवों में ही नहीं, बल्कि शहरों में भी अपनाई जाती है। जिससे भक्तों का आध्यात्मिक विकास होता है।
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एक चक्र के जरिए हजारों प्रार्थनाएं स्वीकार
धार्मिक मान्यता के मुताबिक, प्रार्थना चक्र को दाईं दिशा में घुमाना चाहिए। इस चक्र को घुमाते ही एक मधुर आवाज आती है, जो भक्तों के मन को शांत करती है। हर मठ में अलग-अलग प्रकार के प्रार्थना चक्र बनाए जाते हैं, जिनके आकार भी अलग हो सकते हैं। कई जगह ये चक्र बेहद ऊंचे बने होते हैं, वहीं दूसरी तरफ कई मठों में छोटे आकार के प्रार्थना चक्र भी बने होते हैं।
प्रार्थना चक्र से जुड़ी अहम बातें
भक्तों को प्रार्थना चक्र दाईं दिशा में घुमाना चाहिए। चक्र घुमाने से व्यक्ति को मन की शांति मिलती है, साथ ही भक्तों के दुख और नकारात्मक भावनाएं भी दूर होती हैं। प्रार्थना चक्र को भक्त कभी भी घुमा सकते हैं। यानी इस प्रार्थना प्रक्रिया का कोई निर्धारित समय नहीं होता है। तिब्बत के कई मठों के प्रार्थना चक्र में हैंडल लगे होते हैं। ये हैंडल बड़े आकार के प्रार्थना चक्रों में भी पाए जाते हैं, साथ ही छोटे आकार के चक्रों में भी लगे होते हैं। इन्हें घुमाकर भक्त मंत्रों का जाप करते हैं।
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बौद्ध धर्म के कई भक्त छोटे आकार के प्रार्थना चक्र अपने घरों में भी रखते हैं, ताकि वे घर पर भी गौतम बुद्ध की प्रार्थना कर सकें। हालांकि, छोटे आकार के प्रार्थना चक्रों में छोटे अक्षरों में मंत्र और उपदेश लिखे होते हैं, जिन्हें पढ़ने में कई भक्तों को दिक्कत हो सकती है। ऐसी स्थिति में भक्त मठों में मौजूद प्रार्थना चक्रों के मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
