सावन का महीना भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। इसी महीने शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो शिवभक्त इस महीने भगवान शिव की आराधना करता है, साथ ही जो लोग पुण्य काम करते हैं, उन लोगों पर भगवान शिव की कृपा बरसती है। शिवरात्रि महापर्व पर सभी भक्त शिव मंदिर में जाकर जलाभिषेक करते हैं। इसके साथ ही कांवड़िए पवित्र नदियों के जल से जलाभिषेक करते हैं। जिसके प्रभाव से सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होती है।
इस साल अगस्त महीने में शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। कई धार्मिक जानकारों का मानना है कि शिवरात्रि पर्व के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से लोगों को जीवन में सुख-शांति और मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। साथ ही पर्व में शिव भक्तों को व्रत भी रखना चाहिए, जिससे उनके जीवन में भगवान शिव का आशीर्वाद मिले। आइए जानते हैं शिवरात्रि की सही तारीख क्या है।
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कब है सावन शिवरात्रि?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। यह शुभ तिथि 11 अगस्त को होगी। यह तिथि 11 अगस्त की सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी, जो कि 12 अगस्त की रात 1 बजकर 52 मिनट पर खत्म होगी। इसी तिथि के अनुसार शिव भक्तों को 11 अगस्त के दिन शिवरात्रि का त्योहार मनाना चाहिए, साथ ही संकल्प लेकर व्रत रखना चाहिए।
सही मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन महीने में शिवरात्रि 11 अगस्त को होगी। हालांकि, इसी दौरान सुबह से ही भद्राकाल शुरू हो जाएगा, जो दोपहर 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इसी वजह से कई शिवभक्तों के मन में सवाल उठता है कि शिवरात्रि के दिन शुभ समय क्या होगा?
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धार्मिक जानकारों के मुताबिक, सावन महीने की शिवरात्रि पर 4 मुहूर्त सबसे शुभ माने जाते हैं, जो कि ब्रह्म मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त, गोधूलि मुहूर्त और निशिता काल हैं। आइए जानते हैं चारों मुहूर्त का समय क्या है।
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 5 बजकर 23 मिनट से शुरू होकर 6 बजे तक है।
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:06 बजे से शुरू होकर 12:58 बजे खत्म होगा।
गोधूलि मुहूर्त - रात 9:13 बजे से शुरू होकर 9:32 मिनट तक रहेगा।
निशिता काल - रात 12:05 बजे से शुरू होकर 12:48 तक रहेगा।
क्या करें?
सावन शिवरात्रि पर भक्तों को सुबह उठकर स्नान करना चाहिए, जिसके बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा-पाठ करना चाहिए। पूजा के दौरान भक्तों को सबसे पहले व्रत का संकल्प लेना चाहिए। उसके बाद पूजा के दौरान भक्तों को धतूरा, बेलपत्र और फूल चढ़ाना चाहिए। फल और मिठाई का प्रसाद चढ़ाकर आरती करें।
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शिवरात्रि में क्या न करें?
इस दिन लोगों को पूजा-पाठ करते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, भक्तों को शिवलिंग पर तुलसी का पत्ता, हल्दी और सिंदूर अर्पित नहीं करना चाहिए। साथ ही बेलपत्र के पत्ते टूटे हुए हैं, तो उन्हें भी नहीं चढ़ाना चाहिए।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।
