हमने बचपन में कई बार परियों की कहानियां सुनी हैं लेकिन हकीकत में इन कहानियों पर कभी विश्वास नहीं किया। कुछ ऐसी ही परियों की कहानियां उत्तराखंड के खैट पर्वत से जुड़ी हुई हैं। कई लोग आज भी मानते हैं कि खैट पर्वत पर परियां रहती हैं, जहां इंसानों का जाना सही नहीं है। मान्यता है कि जो इस पर्वत पर जाएगा, वह गायब हो जाएगा। माना जाता है कि एमबीए की छात्रा बबिता पांडेय इसी पर्वत पर गई थीं, जो इस समय गुमशुदा हैं। पिछले कई दिनों से पुलिस अधिकारी उनकी तलाश कर रहे हैं। इसी घटना के बाद यह पर्वत चर्चा का केंद्र बन गया है।

 

उत्तराखंड में ऋषिकेश के पास स्थित यह पर्वत देखने में बेहद खूबसूरत और मनमोहक लगता है। इसकी सुंदरता को देखकर उत्तराखंड सरकार ने इसे 'परियों का देश' माना है। लोक मान्यताओं के मुताबिक, इस पहाड़ पर जाने के कुछ खास नियम हैं, जिनका उल्लंघन करने पर व्यक्ति गायब हो सकता है। अब सवाल उठता है कि इस पर्वत को लेकर लोककथाएं क्या कहती हैं?

 

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क्या है खैट पर्वत की कहानी?

लोक मान्यता के मुताबिक, सदियों पहले आशा रावत नाम के एक व्यक्ति ने एक महिला से शादी की थी। शादी के कुछ साल बाद उनके यहां 9 बेटियों का जन्म हुआ, जो बेहद खूबसूरत थीं। माना जाता है कि जब वे 12 साल की हुईं, तो एक दिन उन्हें चारों तरफ अंधेरा और एक रहस्यमयी रोशनी दिखाई दी। उस रोशनी को देखकर नौों कन्याएं मोहित हो गईं और पर्वत की ओर चली गईं। हालांकि, वे पर्वत से कभी लौटकर नहीं आईं। तभी से खैट पर्वत को 9 परियों का गांव माना जाता है।

 

दूसरी लोक कहानी के मुताबिक, एक जीतू नामक किसान अपनी पत्नी के साथ उसी जगह रहते थे जो अक्सर पर्वत पर बैठकर बांसुरी बजाते थे। उनकी बांसुरी की मधुर आवाज सुन परियां उनके पास आईं और किसान को अपने साथ ले गईं। जिसके बाद वह किसान कभी किसी को नहीं दिखा। इसलिए माना जाता है कि इस पर्वत पर इंसानों को नहीं जाना चाहिए वरना परियां उन्हें अपने साथ ले जाएंगी।

 

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कहां है खैट पर्वत

खैट पर्वत उत्तराखंड के गढ़वाल जिले में स्थित है जो समुद्र तल से लगभग 10000 फीट ऊंचा है। यह पर्वत इतना खूबसूरत है कि कई लोग इसे जन्नत मानते हैं। इस पर्वत पर जाने के लिए आपको सबसे पहले उत्तराखंड के ऋषिकेश पहुंचना होगा उसके बाद बस या कार में बैठकर गढ़वाल जिले के फेगुलीपट्टी के थात गांव तक जाना होगा। इसी थात गांव में खैट पर्वत है जहां आप जा सकते हैं।

 

नोट- इस खबर में दी गई जानकारी लोक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।