हिंदू धर्म में माना जाता है कि हर व्यक्ति को उसके कर्मों का फल जरूर मिलता है। अगर इंसान ने बुरे कर्म किए हैं, तो उसे उनका खामियाजा भुगतना ही पड़ता है। जहां कई लोगों को धरती लोक में ही अपने पापों का दंड मिल जाता है, वहीं कई लोगों को मृत्यु के बाद बुरे कर्मों की सजा नरक में भोगना पड़ता है। लोगों को अच्छे और बुरे कर्मों का फल केवल जीवनकाल में ही नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी मिलता है। इन्हीं कर्मों के आधार पर लोगों को स्वर्ग या नरक की प्राप्ति होती है। गरुड़ पुराण के अनुसार, हर व्यक्ति के कर्मों का लेखा-जोखा रखा जाता है। उसी के आधार पर उसे स्वर्ग या नरक मिलता है। पाप करने वाले व्यक्ति को नरक में सजा दी जाती है।

 

गरुड़ पुराण में उन बातों का बताया गया है, जिन्हें भगवान विष्णु ने अपने प्रिय वाहन गरुड़ को मृत्यु और मृत्यु के बाद होने वाली घटनाओं के बारे में बताए थे। गरुड़ पुराण के मुताबिक, व्यक्ति को उसके पापों के अनुसार अलग-अलग प्रकार की सजाएं मिलती हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार नरक के कई प्रकार होते हैं, जहां बुरे कर्म करने वाले इंसान की आत्मा को सजा दी जाती है। अब सवाल उठता है कि व्यक्ति को किस पाप के लिए किस प्रकार की सजा दी जाती है। आइए इस सवाल का जवाब जानते हैं।

 

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कर्मों का रखा जाता है लेखा-जोखा

गरुड़ पुराण के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति के कर्मों का लेखा-जोखा चित्रगुप्त रखते हैं। चित्रगुप्त जी व्यक्ति के पाप और पुण्य कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। इसी आधार पर व्यक्ति को उसके हर पाप और बुरे कर्म के लिए अलग-अलग प्रकार का दंड दिया जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार 16 प्रकार के घोर पाप बताए गए हैं। इन बुरे कर्मों को करने वाले लोगों को नरक में दंड मिलता है। अब सवाल उठता है कि किन पाप कर्मों के लिए क्या सजा मिलती है?


5 कर्मों के लिए क्या मिलती है सजा?

 

रौरव नरक -इस नरक में उन लोगों क् आत्मा को भेजा जाता है जिन्होंने अपने जीवन में झूठ बोला हो या दूसरों के खिलाफ झूठी गवाही दी हो। इस नरक में रुरु नामक एक भयानक प्राणी उन्हें दंड देता है।


तामिश्र नरक -यहां उन लोगों की आत्मा आती हैं जिन्होंने अपने जीवन में दूसरों की धन-दौलत हड़प ली हो। ऐसे लोगों की आत्मा को तब तक पीटा जाता है, जब तक वे बेहोश नहीं हो जाते।


कुंभीपाक नरक - इस स्थान पर वे लोग पहुंचते हैं जिन्होंने अपने लालच के लिए किसी पशु की हत्या की हो। ऐसे लोगों की आत्मा को गर्म तेल में डालकर सजा दी जाती है।

 

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अवीचि नरक - जो व्यक्ति अपने पूरे जीवन धर्म के विरुद्ध रहता है, नास्तिकता फैलाता है और वेद-शास्त्रों की बुराई करता है, उसे अवीचि नरक में भेजा जाता है। इस नरक में आत्मा को इंसानों के खून और मांस से भरे कुंड में बार-बार गिराया जाता है।


पूयोद नरक - जो लोग अपने माता-पिता का सम्मान और सेवा नहीं करते हैं, साथ ही अपने बच्चों का भी ख्याल नहीं रखते हैं, उन्हें मृत्यु के बाद पूयोद नरक में जाना पड़ता है। इस नरक में व्यक्ति को मल-मूत्र से भरे कुंड में डुबाया जाता है।


गरुड़ पुराण के अनुसार, व्यक्ति को नरक की सजा भुगतने के बाद आत्मा को फिर पृथ्वी पर विभिन्न योनियों में जन्म लेना पड़ता है, जिससे वह अपने कर्मों का फल भोगता है।

 

नोट: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ग्रंथों पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।