कॉमनवेल्थ गेम्स में वह पल यादगार बन गया जब गुलवीर सिंह ने 10,000 मीटर की रेस में सिल्वर मेडल जीता। गुलवीर रेस में कुछ ही सेकेंड के लिए पीछे रह गए और गोल्ड मेडल नहीं जीत पाए। इस रेस के जरिए गुलवीर ने भारत को पहली बार 10,000 मीटर की रेस में मेडल दिलाया। रेस के आखिरी पलों में उन्होंने अपनी रफ्तार तेज कर दी, जिसे देखकर सभी हैरान रह गए। आखिरी समय में रफ्तार बढ़ाने की उनकी रणनीति सफल रही, जिसकी बदौलत गुलवीर सिंह ने इतिहास रच दिया।

 

गुलवीर सिंह भारत के पहले पुरुष खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 10,000 मीटर की रेस में मेडल जीता है। उन्होंने यह रेस 27:49.78 सेकेंड में पूरी की। इस रेस में ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि आइल ऑफ मैन के डेविड मुलार्की ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। जानकारी के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन ने 27:48.93 सेकेंड में रेस पूरी की थी। इसके अलावा डेविड मुलार्की ने 27:50.28 सेकेंड में रेस पूरी की थी।

 

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कुछ ही सेकेंड से चूक गए

 

गुलवीर इस रेस में कुछ ही सेकेंड से पीछे रह गए। जहां गोल्ड मेडल जीतने वाले काई रॉबिन्सन ने 27:48.93 सेकेंड में रेस पूरी की, वहीं गुलवीर ने 27:49.78 सेकेंड में रेस पूरी की। यानी वह सिर्फ 0.85 सेकेंड से गोल्ड मेडल से चूक गए। हालांकि सिल्वर मेडल जीतकर गुलवीर सिंह ने पूरी दुनिया के सामने देश का नाम रोशन किया।

 

उन्होंने इस रेस की शुरुआत भी बेहद शानदार तरीके से की थी। शुरुआती 1,000 मीटर के बाद गुलवीर सिंह तीसरे स्थान पर बने हुए थे। इसके बाद उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। जब रेस में 4,000 मीटर की दूरी बाकी थी, तब वह पांचवें स्थान पर पहुंच गए थे। इस स्थान पर रहने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। रेस के आखिरी पड़ाव में उन्होंने अपनी रफ्तार बढ़ाई और दूसरे स्थान पर पहुंचकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

 

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इससे पहले गुलवीर ने 2022 के एशियन गेम्स की 10,000 मीटर रेस में हिस्सा लिया था, जहां उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था। कॉमनवेल्थ गेम्स में मिला सिल्वर मेडल उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। इस रेस में 1986 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है। जब पुरुषों की 10,000 मीटर रेस में युगांडा और केन्या एक भी मेडल नहीं जीत पाए। इतने सालों के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार यह देखने को मिला।