भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन ने रविवार (1 नवंबर) को हाइलो ओपन का खिताब जीतकर देश का मान बढ़ाया था। जर्मनी में आयोजित इस टूर्नामेंट में सिंधु ने महिला सिंगल्स का खिताब जीता, जबकि लक्ष्य पुरुष सिंगल्स में चैंपियन बने। सिंधु और लक्ष्य ने आर्थिक परेशानी से लड़ते हुए ये खिताब जीते। दरअसल, यूरोप दौरा शुरू होने से पहले ही भारतीय खिलाड़ियों को बताया गया कि इस दौरे के लिए सरकारी मदद नहीं मिलेगी। इसके बाद खिलाड़ियों ने खुद के खर्चे पर 4-4 टूर्नामेंट खेले।
यूरोप दौरे की शुरुआत 6 अक्टूबर से फिनलैंड में आर्कटिक ओपन से हुई। इस टूर्नामेंट के शुरू होने से कुछ दिन पहले ही BAI ने खिलाड़ियों को व्हॉट्सऐप बताया कि फंडिंग रोक दी गई है। उन्हें जानकारी दी गई कि ठहरने का इंतजाम हो जाएगा लेकिन बाकी खर्च खुद उठाने होंगे।
आर्कटिक ओपन के बाद डेनमार्क ओपन, फ्रेंच ओपन और हाइलो ओपन के लिए होटल में रुकने का भी बंदोबस्त नहीं किया गया। खिलाड़ियों ने यात्रा, खाने और होटल में रुकने के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च किए। आर्थिक तंगी के कारण कुछ खिलाड़ियों ने आर्कटिक ओपन के अलावा बाकी टूर्नामेंट्स से अपना नाम वापस ले लिया। वहीं कुछ खिलाड़ी अपने पर्सनल कोच को साथ नहीं ले जा सके।
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सिंधु को OGQ से लेनी पड़ी मदद
डबल ओलंपिक मेडलिस्ट सिंधु ने फंडिंग रोके जाने पर हैरानी जताई। उन्होंने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 'जब मुझे इस बारे में पता चला तो मैं थोड़ी हैरान थी। मैंने सोचा कि आखिर फंडिंग क्यों नहीं मिल पाई। इससे पहले मुझे कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा था।'
सिंधु ने आगे कहा, 'उस समय मैं यह फैसला नहीं कर सकती थी कि अगर फंडिंग नहीं मिलेगी तो टूर्नामेंट में हिस्सा ही नहीं लूंगी। मेरी प्राथमिकता टूर्नामेंट में हिस्सा लेना था। मैं खेल और मैचों पर ध्यान देना चाहती थी। लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार करना चाहती थी। वजह कुछ भी रही हो लेकिन फंडिंग नहीं मिलना हैरान करने वाला था। मैंने कुछ खर्च का इंतजाम खुद किया। मेरे सहयोगी संगठन ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट (OGQ) ने भी मदद की।'
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क्यों रोकी गई खिलाड़ियों की फंडिंग?
आशंका जताई जा रही है कि एशियन गेम्स में बैडमिंटन टीम के खराब प्रदर्शन के बाद फंडिंग रोकी गई है। हालांकि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के एक अधिकारी ने इससे इनकार किया है। SAI के अधिकारी ने अखबार से बताया कि जरूरी कागजी प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हुई थी।
