पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान चुनाव से पहले बुरी तरह फंसते दिख रहे हैं। पहले तो अकाल तख्त की ओर से उन्हें 'गुरु दोखी' घोषित किया गया था और अब उन पर आरोप हैं कि उन्होंने फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट बनवाने की कोशिश की। हरियाणा पुलिस ने मंगलवार को एक एफआईआर दर्ज करके दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि पंजाब पुलिस के दो अफसरों ने एक फॉरेंसिक लैब चलाने वाले शख्स से संपर्क किया और उससे फर्जी रिपोर्ट बनाने को कहा है।
आरोप है कि इस रिपोर्ट में यह दिखाना था कि उस वीडियो में दिखने वाले शख्स भगवंत मान नहीं हैं। अब कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आम आदमी पार्टी (AAP) और भगवंत मान पर आरोप लगाए हैं कि वह अकाल तख्त को गलत साबित करने के लिए फर्जी रिपोर्ट बनवा रहे हैं। वहीं, AAP का कहना है कि हरियाणा की पुलिस तो बीजेपी के कंट्रोल में है और वे जो चाहें वैसे आरोप लगा सकते हैं।
हरियाणा पुलिस ने एक व्यक्ति की शिकायत पर दो लोगों को गिरफ्तार किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पंजाब के मुख्यमंत्री से संबंधित विवाद से जुड़े वायरल वीडियो की फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजाम करने के लिए उससे संपर्क किया गया था। यह घटनाक्रम एक कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर पैदा हुए राजनीतिक विवाद के बीच सामने आया है। इस मामले में सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने 15 जून को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ एक आदेश जारी किया था। आदेश अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज के इस दावे के बाद जारी किया गया था कि दो फॉरेंसिक लैब्स ने उस वीडियो को सही पाया है। वीडियो में कथित तौर पर भगवंत मान जैसा दिखने वाला एक व्यक्ति नजर आ रहा है।
क्या है नया विवाद?
गुरुग्राम में दर्ज FIR के अनुसार, हरियाणा के सिरसा निवासी शिकायतकर्ता जसप्रीत ने आरोप लगाया है कि उस पर दबाव डाला गया, धमकाया गया और मजबूर किया गया कि वह वीडियो से संबंधित ऐसी फोरेंसिक रिपोर्ट की व्यवस्था करे, जिसका नतीजा पहले से तय हो और वह यह हो कि वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाया और छेड़छाड़ किया गया है और उसमें दिखाई देने वाला व्यक्ति पंजाब का मुख्यमंत्री नहीं है। शिकायत के आधार पर गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरियाणा के सिरसा में स्थित अग्रसेन कॉलोनी निवासी अरुण महेंद्रू (25) और हरियाणा के जींद जिले के खरक गागर निवासी अंकित (25) के रूप में हुई है।
शिकायत के मुताबिक, कुछ लोगों ने खुद को पंजाब सरकार का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए उससे संपर्क किया था। हरियाणा पुलिस ने एक बयान में कहा, 'शिकायतकर्ता से कथित तौर पर कहा गया कि वह वायरल वीडियो के संबंध में ऐसी फॉरेंसिक रिपोर्ट की व्यवस्था करे, जो पहले से तय निष्कर्ष का समर्थन करे। इसमें वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति की पहचान से इनकार किया जाए और वीडियो से जुड़े सभी आरोपों को झूठा बताया जाए।'
आरोप है कि जसप्रीत को यह काम करने के बदले 10 लाख रुपये दिए गए। इसमें से 2.5 लाख रुपये अपने बैंक अकाउंट में जमा करा दिए और बाकी के 7.5 लाख रुपये एक लोन चुकान में खर्च कर दिए।
क्या बोली आम आदमी पार्टी?
इस मामले पर पंजाब AAP के अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने हरियाणा पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि पुलिस बीजेपी के नियंत्रण में है और वे जो चाहें कर सकते हैं, कोई भी जांच शुरू कर सकते हैं और कोई भी आरोप लगा सकते हैं। बता दें कि भगवंत मान पहले ही इस वीडियो को खारिज कर चुके हैं और इसे उनकी छवि को खराब करने के उद्देश्य से किया गया दुष्प्रचार बता चुके हैं। AAP की पंजाब इकाई ने भी दावा किया था कि दो लैब की फॉरेंसिक जांच में यह पता चला कि कथित आपत्तिजनक वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति भगवंत मान नहीं है।
चौतरफा घिर गए भगवंत मान
इस मामले में अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा है, 'यह बहुत संवेदनशील और गंभीर बात है कि एक मुख्यमंत्री अपनी वीडियो का सच छुपाने के लिए श्रीअकाल तख्त साहब को चैलेंज करे, जत्थेदार साहब को बोले कि वह झूठ बोल रहे हैं और गृहमंत्री और मुख्यमंत्री रहते हुए अपनी पुलिस, डीजीपी गौरव यादव, कमिश्नर, एसपी साइबर क्राइम का इस्तेमाल करके एक फेक रिपोर्ट तैयार कराए। इसमें हरपाल चीमा का ऐक्टिव रोल है। आज मैंने बताया है कि उस पते पर ये लेबोरेटरी हैं ही नहीं। मैं चाहता हूं कि भगवंत मान इस्तीफा दें और इसमें शामिल पुलिस अफसरों के खिलाफ एफआईआर हो।'
इसी मामले में दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा समेत तमाम बीजेपी नेताओं ने वीडियो और कथित चैट के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं। इन नेताओं ने आरोप लगाए हैं कि लुधियाना के कमिश्नर स्वपन शर्मा और एसपी जसनदीप ने ही 16 जून को गुरुग्राम के क्राउन प्लाजा होटल में एक फॉरेंसिक लैब के मालिकों से मुलाकात की।


