कर्नाटक में ही SIR प्रक्रिया के दौरान वैज्ञानिक सी.एन.आर. राव के नाम को लेकर  विवाद हो गया है। भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक सी.एन.आर. राव को अब अपनी पहचान साबित करने के लिए चुनाव आयोग के अधिकारियों के सामने पेश होना पड़ेगा। चुनाव आयोग की ओर से अपनी वेबसाइट पर उन्हें नोटिस दिया गया है, जिसके अनुसार, उनके नाम की स्पेलिंग में मिसमैच के कारण उन्हें अधिकारियों के सामने हाजिर होने के लिए कहा गया है।

 

इस नोटिस के बारे में  सी.एन.आर. राव ने कहा कि अभी उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला है। हालांकि, चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ये नोटिस दिख रहा है। उन्होंने कहा कि हमें इस बारे में अभी स्पष्टता नहीं है और हमने इसे नहीं देखा है।

 

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कौन हैं सी.एन.आर. राव?

सी.एन.आर. राव देश के जाने-माने वैज्ञानिक और रसायनशास्त्री हैं। उनका जन्म 1934 में बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने ठोस पदार्थों, नैनो सामग्री और पदार्थों की संरचना जैसे क्षेत्रों में काफी रिसर्च किया है। उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) में सॉलिड स्टेट एंड स्ट्रक्चरल केमिस्ट्री यूनिट की स्थापना की और 1984 से 1994 तक IISc के निदेशक रहे। उन्होंने 1,600 से ज्यादा शोध पत्र लिखे हैं। विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें भारत रत्नन भी दिया गया है।  प्रोफेसर राव को आज भी देश के सम्मानित वैज्ञानिकों में गिना जाता है.

क्यों हुआ विवाद?

पुरानी वोटर लिस्ट में उनका नाम ‘Prof CNR Rao’ लिखा है, जबकि नई सूची में ‘Proff CNR Rao’ लिखा गया है। यानी ‘Prof’ में एक एक्स्ट्रा ‘f’ जुड़ गया है। इसी को लेकर चुनाव आयोग की वेबसाइट पर नोटिस दिखाई दे रहा है। हालांकि, प्रोफेसर राव के ऑफिस के एक व्यक्ति ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि शायद नोटिस चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन डाला गया है, लेकिन ऑफिस को न तो इसकी जानकारी मिली है और न ही कोई लेटर मिला है।

क्या सुनवाई के लिए जाएंगे?

चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिखाई दे रहे नोटिस में राव को बेंगलुरु के मल्लेश्वरम इलाके में सुनवाई के लिए बुलाया गया है। यह जगह भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के पास है। सुनवाई में नाम से जुड़ी इस गलती को ठीक किया जाना है। अभी तक उनके ऑफिस में चुनाव आयोग की ओर से नोटिस नहीं पहुंचा है। नोटिस पहुंचने के बाद ही उनके चुनाव आयोग के सामने पेश होने को लेकर कोई जानकारी सामने आएगी। 

 

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पहले भी जारी हुए नोटिस 

यह पहली बार नहीं है जब चुनाव आयोग की ओर से किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को नोटिस जारी किया गया हो। ऐसे ही नोटिस कई राज्यों में दूसरे प्रसिद्ध लोगों को भी दिए गए हैं। कर्नाटक की ही बात करें तो यहां राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने हाल ही में बताया था कि पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता हरेकला हजब्बा के नाम में भी मतदाता रिकॉर्ड में गलती थी। हालांकि, उनका मामला बाद में सुलझा लिया गया। इसी तरह अन्य राज्यों में भी कई लोगों के नाम को लेकर विवाद हो रहा है।