बिहार के मखाना किसानों को एक बड़ी उपलब्धि मिली है। पहली बार पूर्णिया से GI टैग प्राप्त मिथिला मखाना की खेप ग्रीस (यूरोप) रवाना किया गया। बिहार का मिथिला मखाना अब यूरोप के बाजारों तक पहुंच गया है। मिथिला मखाना की यह पहली व्यावसायिक खेप बिहार के मखाना किसानों, फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO), निर्यातकों और राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे बिहार के कृषि निर्यात को नई उड़ान मिली है।
यह पहली खेप कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के तहत काम करने वाले कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से भेजी गई। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ऑनलाइन माध्यम से इस खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस खास मौके पर कृषि मंत्री ने बिहार किसानोंं, निर्यातकों और टीम को बधाई दी।
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मखाना बिहार की सांस्कृतिक धरोहर
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि आज का दिन बिहार के लिए ऐतिहासिक है। यह बिहार के किसानों की मेहनत का परिणाम है। मखाना बिहार की सांस्कृतिक धरोहर है और अब यह दुनिया के बाजार में अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने सबको बधाई देते हुए कहा कि मिथिला मखाना को जीआई टैग मिलने के बाद से इसकी मांग विदेशों में तेजी से बढ़ी है।
GI टैग से मिथिला मखाना की गुणवत्ता और उसकी पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। अब लोग मिथिला मखाना को उसके असली नाम से जान रहे हैं और उसकी गुणवत्ता पर भरोसा कर रहे हैं। ग्रीस भेजी गई यह खेप पूर्णिया के किसानों और एफपीओ ने तैयार की है। इसे आधुनिक पैकेजिंग के साथ भेजा गया है, ताकि यूरोप के मानकों पर खरा उतरे।
कार्यक्रम में बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह भी मौजूद थे. जिन्हें कृषि मंत्री ने निर्देश दिया कि मखाना की खेती को आधुनिक, आसान और अधिक लाभकारी बनाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विशेष रूप से शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाए। मखाना की खेती में किसानों की मेहनत और लागत को कम करने, उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने और आधुनिक तकनीकों और यंत्रीकरण को अपनाने की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।
अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया के बाद ग्रीस तक पहुंचा
कृषि मंत्री ने बताया कि देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी लगभग 80 से 85 प्रतिशत है। बिहार में मधुबनी, दरभंगा, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, सुपौल, अररिया, किशनगंज और मुजफ्फरपुर में सबसे ज्यादा मखाना का उत्पादन होता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने 7,200 मीट्रिक टन से अधिक मखाना एवं उसके मूल्यवर्धित उत्पादों का 20 से अधिक देशों को निर्यात किया, जिससे लगभग 22 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आय हुई।
अमेरिका, मध्य-पूर्व और अफ्रीका सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मखाना की मांग लगातार बढ़ रही है। मखाना को सुपरफूड के रूप में दुनिया में पहचान मिल रही है। इस साल जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की खेप अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अब ग्रीस तक पहुंची है। पहली बार बिहटा के बियाडा औद्योगिक क्षेत्र से 18 मीट्रिक टन जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना की समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी गई।
यह इस बात का संकेत है कि गुणवत्ता, जीआई पहचान और बेहतर बाजार संपर्क से किसानों की आय के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। अब मिथिला मखाना दुनिया के हर कोने में पहुंच रहा है और बिहार के किसानों को इसका सीधा फायदा मिल रहा है। पहले किसान कम दाम पर मखाना बेचने को मजबूर थे, लेकिन अब निर्यात से उन्हें बेहतर मूल्य मिल रहा है।
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कृषि निर्यात नीति बना रही है बिहार सरकार
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन किया गया है। यह मखाना किसानों को बेहतर तकनीक, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राष्ट्रीय मखाना बोर्ड बनने से मखाना किसानों को बहुत फायदा होगा। बोर्ड मखाना के लिए नई तकनीक लाएगा, किसानों को प्रशिक्षण देगा और मखाना को प्रोसेस करके उसका मूल्य बढ़ाएगा। इससे किसानों की आय दोगुनी होगी।
बिहार में मखाना का उत्पादन और खेती का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसके मूल्यवर्धन और निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। अब लक्ष्य केवल मखाना का उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और बिहार के मखाना को दुनिया के बाजार में मजबूत पहचान दिलाना है। ग्रीस के लिए रवाना हुई यह पहली व्यावसायिक खेप इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार चाहती है कि मखाना किसान आत्मनिर्भर बनें और उनकी आय बढ़े। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार द्वारा कृषि निर्यात नीति का निर्माण किया जा रहा है। इसका मकसद कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों, एफपीओ और उद्यमियों को स्पष्ट दिशा, आवश्यक सुविधाएं और प्रोत्साहन उपलब्ध कराना है। कृषि निर्यात नीति बनने से बिहार के कृषि उत्पादों का निर्यात और आसान होगा। किसानों को निर्यात के लिए लाइसेंस, पैकजिंग और बाजार की जानकारी एक ही जगह मिलेगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि निर्यात के लिए मजबूत आधारभूत संरचना आवश्यक है। इसी दिशा में बिहार में एक्सपोर्ट पैक हाउस का निर्माण किया गया है। इससे कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन और अधिक सुगम होगा तथा निर्यात के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एक्सपोर्ट पैक हाउस में मखाना की ग्रेडिंग, पैकेजिंग और लेबलिंग अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार की जाएगी, जिससे विदेशों में बिहार के मखाना की मांग और बढ़ेगी।
