प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन के दोस्त असगर अली वोहरा का कई साल पुराना मीरा-भायंदर में स्थित जमीन विवाद खत्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक नरेंद्र मेहता ने भायंदर ईस्ट की विवादित जमीन से अपना कब्जा छोड़ने का फैसला लिया है। साथ ही वहां चल रहे कंस्ट्रक्शन की मंजूरी भी वापस ले ली गई है।
असगरअली 8 सितंबर को दिल्ली जाकर पीएम मोदी से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई थी। मुलाकात के बाद ही प्रशासन की ओर से तेजी लाई गई और कार्रवाई हुई। उन्होंने आरोप लगाया था कि जमीन विवाद के मामले में कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। इस सिलसिले में वह सरकारी दफ्तर के 15 सालों से चक्कर काट रहे थे।
यह भी पढ़ें: रोहतांग दर्रे पर सीजन की पहली बर्फबारी, किसानों का क्या होगा?
15 साल पुराना विवाद
असगरअली वोहरा ने 1989 में भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में करीब 2810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। उनका आरोप था कि साल 2011 में इस प्लॉट पर स्वयं बिल्डर्स और विधायक नरेंद्र मेहता की 'सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स' ने कब्जा कर लिया। लगातार सरकारी ऑफिसों के चक्कर काटने के बाद भी जब बात नहीं बनी, तो 8 सितंबर को उन्होंने पीएम मोदी से मिलकर इस मामले में दखल देने की गुजारिश की।
पीएम से मिलने का असर
13 सितंबर को जैसे ही असगरअली और पीएम की मुलाकात और जमीन के कब्जे की खबर मीडिया में आई, प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। 15 सितंबर को महाराष्ट्र मंत्रालय में सीएम के चीफ सेक्रेटरी श्रीकर परदेशी ने एक अहम बैठक बुलाई। इस बैठक में पीड़ित असगरअली, बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर म्युनिसिपल कमिश्नर राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे शामिल हुए।
यह भी पढ़ें: मंत्री ही बने पंजाब में AAP की मुसीबत, 4.5 साल में कितनों को हटाना पड़ा?
विधायक ने छोड़ा कब्जा
बैठक के दौरान बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को चिट्ठी सौंपकर विवादित जमीन से अपना कब्जा छोड़ने और कंस्ट्रक्शन की मंजूरी सरेंडर करने का ऐलान किया।
बीजेपी विधायक ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने यह जमीन 2019 में मर्विन फर्नांडीस नाम के व्यक्ति से खरीदी थी। इसके साथ ही, उन्होंने पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर असगरअली के खिलाफ की गई अपनी पुरानी शिकायत भी वापस ले ली। साथ ही कहा कि अब दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया है।
