उत्तर प्रदेश के अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। करोड़ों रुपये के कथित गबन के आरोपों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पार्टी प्रवक्ता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। जिसमें राम मंदिर चंदा मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसलिए चंदे से जुड़े किसी भी विवाद की पारदर्शी जांच जरूरी है।
डॉ. सिंह ने अपने पत्र में मांग की है कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) या किसी अन्य स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए। साथ ही जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है। ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो सके।
यह भी पढ़ें: 'इंजीनियर बताते थे, 12वीं पास निकला', निशांत कुमार की पढ़ाई-लिखाई पर RJD का तंज
BJP नेता ने क्यों उठाई जांच की मांग?
डॉ. रजनीश सिंह का कहना है कि देश और विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु राम मंदिर में श्रद्धा के साथ दान करते हैं। ऐसे में यदि चंदे में किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं होगा, बल्कि करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचेगी। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
कैसे शुरू हुआ राम मंदिर चंदा विवाद?
राम मंदिर के चंदे को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मंदिर में मिले करोड़ों रुपये के दान का हिसाब स्पष्ट नहीं है। उन्होंने दावा किया कि चंदे की राशि में गड़बड़ी की आशंका है और मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत है। अखिलेश यादव ने सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग की।
यह भी पढ़ें: जयपुर में पटाखा गोदाम में भीषण धमाका, आग में जिंदा जले 7 लोग
ट्रस्ट ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
विवाद बढ़ने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आरोपों को खारिज किया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि नियमित अंतराल पर ऑडिट कराया जाता है और अब तक किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया कि ऑडिट प्रक्रिया में ट्रस्ट के प्रतिनिधियों के साथ भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी भी शामिल रहते हैं। इसी बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा अयोध्या पहुंचे और ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ लंबी बैठक की। हालांकि, पूरे विवाद पर ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
