केरल के एर्नाकुलम से बैंक से संबंधित एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, यहां एक मां ने बेटे को सेविंग अकाउंट के लिए नॉमिनी के तौर पर जोड़ा, लेकिन कुछ समय बाद मां और बेटे दोनों की मौत हो गई। इसके बाद बैंक वालों ने अकेले बचे किसान पिता को पैसे देने में आनाकानी की। बाद में यह मामला कोर्ट में गया। कोर्ट ने पिता की शिकायत के आधार पर बैंक को 15,000 रुपये की राहत देने का आदेश दे दिया।
यह मामला एर्नाकुलम का है। यहां एक महिला के सेविंग्स अकाउंट में 62,541 रुपये थे। महिला ने अपने बेटे को नॉमिनी के तौर पर बैंक में रजिस्टर्ड करवाया था। मगर, दुर्भाग्यवश कुछ समय बाद मां और बेटे दोनों की मौत हो गई। मां और बेटे की मौत के बाद परिवार में उसके 83 साल के पिता ही अकेले जीवित सदस्य रह गए। वह आदमी पेशे से किसान था। पिता को अंग्रेजी नहीं आती थी, बैंक के कानून उसे समझ में नहीं आए, जिससे उसकी मुश्किलें बढ़ गईं।
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बैंक के चक्कर लगाने लगा किसान
शख्स अपनी गुजर चुकी पत्नी के सेविंग्स अकाउंट से पैसे निकालने के लिए बैंक के चक्कर लगाने लगा। बैंक ने शखिस से पैसे निकालने के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट्स के बारे पूछा। कुछ समय बाद उसने रिलेशनशिप सर्टिफिकेट और डेथ सर्टिफिकेट बैंक में जमा कर दिए।
बैंक को लीगल वारिस सर्टिफिकेट सौंपा
परेशान शख्स ने 5 अगस्त 2023 को लीगल वारिस सर्टिफिकेट भी सौंप दिया, जो बैंक ने खास तौर पर मांगा था। लेकिन इसके बाद भी बैंक ने बुजुर्ग शख्स को पैसे नहीं दिए। बैंक ने किसान से कहा कि वह पहले इस मामले में कानूनी राय लेगा। जब कई दिनों के बाद भी इसमें कोई कार्रवाई नहीं हुई तो शख्स ने 18 अगस्त, 2023 को बैंक को पत्र लिखा। बाद में बैंक ने उसे बताया कि और इसमें और भी डॉक्यूमेंट्स की लगेंगे है।
शख्स ने जरूरी डॉक्यूमेंट्स भी बैंक में जमा कर दिए। आखिरकार 4 सितंबर, 2023 को उसके बैंक अकाउंट में पैसे आ गए। शख्स को पैसे मिल गए, लेकिन उसने बैंक के खिलाफ कंज्यूमर कमीशन में शिकायत की। उसने आरोप लगाया कि देरी की वजह से उसे बार-बार बैंक ब्रांच जाना पड़ा और उसे पैसे की तंगी और मानसिक परेशानी हुई।
कंज्यूमर कमीशन ने बैंक को दी नसीहत
कंज्यूमर कमीशन ने पीड़ित की शिकायत पर सुनवाई करते हुए कहा कि बैंकों से उम्मीद की जाती है कि वे अपने कस्टमर्स के साथ ऐसे तरीके से पेश आएं जो आसान और कस्टमर-फ्रेंडली हों। अगर कोई कस्टमर अंग्रेजी नहीं समझता है, तो बैंक को उस व्यक्ति से क्षेत्रीय भाषा में बात करनी चाहिए ताकि जरूरी प्रक्रिया साफ तौर पर समझ में आ सके।
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इस मामले में, कमीशन ने बैंक के बहुत ज्यादा टेक्निकल अप्रोच की आलोचना की। कमीशन ने RBI के 2005 के चार्टर का जिक्र करते हुए बताया कि बैंकों और उनके कस्टमर्स के बीच बातचीत अंग्रेजी, हिंदी या संबंधित क्षेत्रीय भाषा में होनी चाहिए। RBI ने इस बात पर भी जोर दिया है कि जरूरी फॉर्म और मटीरियल अंग्रेजी, हिंदी और संबंधित क्षत्रीय भाषा में उपलब्ध होने चाहिए।
कमीशन ने किसान के हक में 31 अगस्त, 2026 को फैसला सुनाया। एर्नाकुलम कंज्यूमर कमीशन ने बैंक को किसान को 10,000 रुपये हर्जाने के तौर पर और 5,000 रुपये केस के खर्च के तौर पर देने का आदेश दिया।
