गुजरात के अहमदाबाद जिले में ब्लड प्रेशर की नकली दवा का मामला सामने आया है। यहां क्राइम ब्रांच और फूड एंड ड्रग्स विभाग ने कार्रवाई करते हुए नकली दवा की करीब 1200 स्ट्रिप बरामद की हैं। जांच में पता चला कि पिछले करीब चार महीनों में इसी दवा की 1500 स्ट्रिप मरीजों को बेची जा चुकी थी। एक स्ट्रिप में 10 गोलियां थीं यानी करीब 15 हजार नकली गोलियां मरीजों तक पहुंच चुकी थी। मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और कोर्ट ने उन्हें 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है।
यह मामला अहमदाबाद के सैटेलाइट इलाके की लीलावती फार्मेसी एंड वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड से सामने आया। यहां मिलने वाली ब्लड प्रेशर की दवा को लेकर शक हुआ जिसके बाद इसकी जानकारी फूड एंड ड्रग्स विभाग को दी गई। जांच में दवा के पैकेट पर भरूच की एक कंपनी का नाम और बैच नंबर मिला लेकिन जांच में दवा नकली पाई गई। इसके बाद क्राइम ब्रांच और फूड एंड ड्रग्स विभाग ने मिलकर कार्रवाई की और अहमदाबाद में अलग-अलग जगहों से करीब 1200 स्ट्रिप जब्त की। जांच में यह भी सामने आया कि करीब 1500 स्ट्रिप पहले ही मेडिकल स्टोर के जरिए मरीजों तक पहुंच चुकी थी। हर स्ट्रिप में 10 गोलियां थी और इसे 112.90 रुपये में बेचा जा रहा था।
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लखनऊ से गुजरात तक पहुंची दवा
जांच के दौरान इस नकली दवा का कनेक्शन उत्तर प्रदेश के लखनऊ से जुड़ा मिला। पुलिस के अनुसार, देवेंद्र यादव और उमंग रस्तोगी गुजरात में नकली दवा का स्टॉक पहुंचा रहे थे। यह स्टॉक पहले उत्तराखंड से लखनऊ आया था और फिर वहां से अलग-अलग जगहों पर भेजा गया। पुलिस को करीब 3600 स्ट्रिप की एक खेप के बारे में जानकारी मिली है। इसमें से 2700 स्ट्रिप अहमदाबाद और 900 स्ट्रिप मैसूर भेजी गई थी। अहमदाबाद पहुंची 2700 स्ट्रिप में से 1200 पुलिस ने बरामद कर ली हैं जबकि 1500 स्ट्रिप पहले ही बिक चुकी थी।
जांच में अहमदाबाद के एक मेडिकल स्टोर से जुड़े दर्शिल संघवी का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि उसे दवा नकली होने की जानकारी थी फिर भी उसने 18 फीसदी कमीशन के लिए यह स्टॉक खरीदा। इसके बाद यह दवा करीब 11 मेडिकल स्टोर तक पहुंचाई गई।
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कई शहरों में सप्लाई का शक
पुलिस की जांच में पता चला है कि नकली दवा की सप्लाई अहमदाबाद के अलावा सूरत, भावनगर, नडियाद और भुज तक भी हुई हो सकती है। अब जांच सिर्फ अहमदाबाद तक सीमित नहीं है। क्राइम ब्रांच की टीमें दूसरे राज्यों में भी इस मामले की जानकारी जुटा रही हैं।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नकली दवा कहां तैयार हुई, उसकी पैकिंग कैसे की गई और असली कंपनी के नाम वाले पैकेट और लेबल किसने तैयार किए। इस मामले में दर्शिल संघवी, देवेंद्र यादव और उमंग रस्तोगी को गिरफ्तार किया गया है। तीनों को कोर्ट ने 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस अब पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल दूसरे लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
