हिमाचल प्रदेश के जंगल अब सिर्फ हरियाली और पर्यावरण बचाने तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि राज्य की कमाई बढ़ाने का जरिया भी बन सकते हैं। प्रदेश में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले 11 प्रमुख औषधीय पौधों से करीब 27 हजार करोड़ रुपये के कारोबार की संभावना सामने आई है। सरकार ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।

 

देश के शोध संस्थान इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) ने हिमाचल के औषधीय पौधों की उपलब्धता और उनसे होने वाले कारोबार की संभावनाओं को लेकर विस्तृत अध्ययन किया है। इस अध्ययन में सरकारी आंकड़ों, उपग्रह से मिली जानकारी और 500 से ज्यादा प्रशिक्षित वन रक्षकों की ओर से पौधों की जगह की जानकारी दर्ज करने और तस्वीरें लेने को आधार बनाया गया। अध्ययन में चुने गए 11 पौधों से बड़े स्तर पर कारोबार शुरू करने की संभावना सामने आई है।

 

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औषधीय पौधों से बढ़ेगा कारोबार

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने इस संभावित बाजार को विकसित करने के लिए आईएसबी के साथ समझौता भी किया है। अब वन विभाग और आयुष विभाग मिलकर औषधीय पौधों को बचाने, उनकी खेती और उत्पादन बढ़ाने, उन्हें तैयार करने और बाजार तक पहुंचाने की दिशा में काम करेंगे। योजना में हरड़, बेहड़ा और आंवला समेत आठ अन्य औषधीय पौधों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन पौधों को बचाने के साथ इनके सही तरीके से कारोबार और इस्तेमाल की संभावनाएं भी विकसित की जाएंगी।

 

सरकार का ध्यान सिर्फ औषधीय पौधों को बचाने तक नहीं है। इन पौधों की संख्या और उपलब्धता का सही आकलन करने, उन्हें बचाने, उत्पादन बढ़ाने, तैयार करने और बाजार से जोड़ने की पूरी व्यवस्था बनाने की तैयारी है। इससे स्थानीय लोगों, किसानों और जंगलों से जुड़े समुदायों के लिए रोजगार और कमाई के नए मौके भी बन सकते हैं।

 

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बड़ी परियोजनाओं से जुड़ेगी योजना

इस योजना को हिमाचल में पहले से चल रही बड़ी विकास परियोजनाओं के साथ जोड़ने की भी तैयारी है। इनमें 800 करोड़ रुपये की जायका परियोजना, 310 करोड़ रुपये की केएफडब्ल्यू परियोजना और 700 करोड़ रुपये की आईडीपी परियोजना शामिल हैं।

 

सरकार की कोशिश है कि हिमाचल के औषधीय पौधों को सिर्फ कच्चे माल के रूप में दूसरे राज्यों या बाजारों में भेजने के बजाय प्रदेश में ही उन्हें तैयार किया जाए और उनकी पहचान बनाई जाए। इससे औषधीय पौधों से जुड़ा कारोबार बढ़ाने के साथ हिमाचल की कमाई और स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।