दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में छात्रों का आंदोलन जारी है। इस आंदोलन की शुरुआत 27 सितंबर को हुई थी, जब जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष और छात्रों ने भूख हड़ताल का ऐलान किया था। आंदोलन की शुरुआत में सिर्फ 4 छात्र ही भूख हड़ताल पर बैठे थे, जो अब बढ़कर 17 हो गए हैं। इस आंदोलन के जरिए छात्रों ने कई मुद्दे उठाए हैं। इन छात्रों की मांग है कि हॉस्टलों की मरम्मत कराई जाए, साथ ही ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए अलग हॉस्टल बनाया जाए। इसके अलावा लाइब्रेरी की सालों पुरानी बिल्डिंग, पीएचडी एडमिशन, जेएनयू छात्रसंघ का निलंबन, कैंपस में छात्रों की सुरक्षा जैसे कई मुद्दों को लेकर छात्र भूख हड़ताल कर रहे हैं, ताकि इन सभी समस्याओं में सुधार किया जा सके।

 

यह भूख हड़ताल कैंपस के साबरमती टी-पॉइंट पर की जा रही है। यहां जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) की प्रेसिडेंट अदिति, वाइस प्रेसिडेंट गोपिका और जनरल सेक्रेटरी सुनील ने भूख हड़ताल शुरू की थी। उसके बाद AISA, SFI, दिशा और PSA जैसे छात्र संगठन भी इस आंदोलन में शामिल हो गए।

 

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क्या हैं छात्रों की मांगें?

इस आंदोलन के जरिए छात्रों ने कई मांगें रखी हैं। साथ ही, छात्रों ने दावा किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगी।

 

1. छात्रों ने दावा किया कि कई हॉस्टल लगभग 50 साल पुराने हैं। पेरियार, कावेरी और गोदावरी जैसे हॉस्टलों की इमारतें बेहद पुरानी हैं। इन हॉस्टलों की लिफ्ट भी नहीं चलती हैं। इसके साथ ही हेल्थ सेंटर की हालत भी खराब है। ऐसे में छात्रों की मांग है कि इन हॉस्टलों की मरम्मत कराई जाए। इसके साथ ही छात्रों का कहना है कि नए बराक हॉस्टल में खाने और इंटरनेट की सुविधा ठीक नहीं है। वे चाहते हैं कि इन सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए।

 

2.छात्रों ने मांग की है कि ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए अलग हॉस्टल बनाया जाए।

 

3. आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की स्कॉलरशिप बढ़ाई जाए। पीएचडी छात्रों की फेलोशिप का भुगतान हर सेंटर में समय पर किया जाए। इसके अलावा छात्रों का कहना है कि जब तक कोई छात्र पीएचडी पूरी नहीं कर लेता, तब तक उसे हॉस्टल में रहने की सुविधा दी जाए।

 

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4. छात्रों का कहना है कि जेएनयू छात्रसंघ के फंड पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में उनकी मांग है कि छात्रसंघ का फंड दोबारा शुरू किया जाए।

 

5.भूख हड़ताल कर रहे छात्रों का कहना है कि स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में पढ़ाने के लिए सिद्धांत नॉलेज फाउंडेशन नाम की एक निजी कंपनी वीडियो के जरिए पढ़ाई कराती है। छात्रों की मांग है कि इस व्यवस्था को हटाया जाए।

क्या बोलीं छात्रसंघ की प्रेसिडेंट?

छात्रसंघ की प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा ने इस भूख हड़ताल को लेकर कहा कि हम कैंपस के लिए कुछ बुनियादी चीजों की मांग कर रहे हैं, जो जेएनयू में हमेशा से रही हैं। प्रशासन हमें जितना परेशान करेगा, छात्रों की एकता उतनी ही बढ़ेगी।

 

इसके साथ ही छात्रों ने दावा किया है कि पीएचडी एडमिशन में बार-बार देरी हुई है, जिससे एकेडमिक कैलेंडर बिगड़ जाता है और छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ता है। इसलिए छात्र चाहते हैं कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के जरिए एडमिशन के बजाय जेएनयू एंट्रेंस एग्जाम दोबारा शुरू किया जाए।