उत्तर प्रदेश में आठ सूत्रीय मांगों पर लेखपालों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। यूपी लेखपाल संघ ने आज यानी गुरुवार से ऑनलाइन काम का बहिष्कार कर दिया है। इससे आय-जाति-निवास प्रमाणपत्र, वरासत, फार्मर रजिस्ट्रेशन और सत्यापन जैसे काम पर असर पड़ सकता है। वहीं 17 अक्टूबर से संपूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है। 

 

पिछले कुछ समय से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लेखपाल आंदोलनरत हैं। 22 सितंबर से लेखपालों ने अतिरिक्त हलकों का काम छोड़ दिया है। वहीं 3 अक्टूबर से समाधान दिवस का बहिष्कार भी किया है। 8 अक्टूबर यानी गुरुवार से ऑनलाइन काम जैसे आय और जाति प्रमाणपत्र को भी बंद कर दिया है। सभी तहसील परिसरों में 12 अक्टूबर को रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। 14 अक्टूबर को बाइक रैली निकाली जाएगी। 

 

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24 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना  

योजना के तहत 17 अक्टूबर से संपूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा। सभी लेखपाल 23 अक्टूबर तक तहसीलों पर प्रदर्शन करेंगे। 24 अक्टूबर को आंदोलन और तीव्र किया जाएगा और  सभी लेखपाल तहसील मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। आंदोलनरत लेखपालों ने 10 अक्टूबर को काली पट्टी बांधकर विरोध जताने की भी बात कही।

राजस्व परिषद के साथ वार्ता विफल

मंगलवार को लेखपाल संघ और राजस्व परिषद के बीच लखनऊ में वार्ता भी हुई। हालांकि लेखपालों ने साफ कर दिया कि केवल आश्वासन पर बात नहीं बनेगी। वर्षों से लेखपालों को केवल आश्वासन दिया जा रहा है। इस बीच उत्तर प्रदेश राजस्व निरीक्षक संघ ने भी लेखपालों के आंदोलन का समर्थन किया। लेखपालों का कहना है कि राजस्व परिषद ने 45 दिनों का समय मांगा था। यह समय बीत गया है। अभी तक मांगों पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। 

 

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लेखपालों की मांगें क्या हैं?

  • प्रारंभिक वेतनमान में 2800 ग्रेड पे की मांग व वेतन विसंगति दूर करना।
  • 8 वर्षों से लेखपालों का अंतर मंडलीय स्थानांतरण लागू हो।
  • लेखपालों की पदोन्नति सूची जारी की जाए।
  • लेखपालों के भत्तों में इजाफा हो।
  • प्रभारी राजस्व निरीक्षक के कार्यों से मुक्त किया जाए।
  • उच्च तकनीकी कायों के लिए लैपटॉप और मोबाइल मिले।
  • ग्राम सचिवालय में बिना आधारभूत सुविधा/ सुरक्षा व्यवस्था/ भत्ता बढ़ोतरी के लेखपालों का शोषण बंद हो।
  • एक साल से तहसील वार लेखपालों का परीक्षा परिणाम घोषित करने और स्थायीकरण की मांग।