उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार का दिन काफी बवाल भरा रहा। सिविल कोर्ट परिसर के बाहर प्रशासन ने ध्वस्तीकरण अभियान चलाया, जिसमें वकीलों के चेंबर को नेस्तनाबुत कर दिया गया। अपनी ठिकाना उजड़ता देख बड़ी संख्या में वकीलों ने बुलडोजर अभियान का विरोध किया। मामला बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।
इस कार्रवाई के बाद वकीलों का गुस्सा फुट पड़ा है। राजधानी लखनऊ का वकील समुदाय यूपी की बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नाराज हो गया है। वकीलों के चैंबर को बुलडोजर से गिराए जाने पर वकीलों ने लखनऊ डीएम ऑफिस के बाहर धरना दिया।
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'बीजेपी को कभी वोट नहीं देंगे'
डीएम ऑफिस के बाहर धरना दे रहे सीनियर वकील एसपी सिंह ने अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा, 'मैं ठाकुर हूं, योगी के खानदान से हूं। मैंने पूरी जिंदगी बीजेपी को वोट दिया है। आज से हम राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) के साथ रहेंगे और बीजेपी को कभी वोट नहीं देंगे।' एसपी सिंह ने कहा कि इस कार्रवाई से पहले हम लोगों को प्रशासन ने कोई नोटिस नहीं दिया।
पुलिस ने लगाया पत्थरबाजी का आरोप
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद लखनऊ पुलिस का आरोप है कि वकीलों ने पत्थरबाजी की। इसके बाद बल प्रयोग करना पड़ा। वहीं वकीलों ने पुलिस पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया। लखनऊ नगर निगम की टीम रविवार को भारी पुलिस बल के साथ कैसरबाग में सिविल कोर्ट परिसर के बाहर मौजूद चैंबरों को हटाने पहुंची थी।
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चैंबरों को तोड़ने का विरोध
हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के बाद यह ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जा रहा था। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल की तैनात की गई थी। वकीलों ने अवैध चैंबरों को तोड़ने का विरोध किया। पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस और वकीलों के बीच बहस होने लगी है। इस बीच पुलिस ने हंगामा करने वाले वकीलों पर लाठियां बरसानी शुरू कर दी।
