बिहार के दरभंगा जिले के जाले विधानसभा से विधायक जीवेश मिश्रा नकली दवा में मामले में बरी हो गए हैं। जीवेश मिश्रा ने पक्ष में फैसला आने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। उन्होंने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि, बीते विधानसभा चुनाव के दौरान उनके खिलाफ विपक्षी नेताओं ने बिना तथ्यों की जांच किए गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने विपक्षी नेताओं से पूछा है कि क्या वह अपने बयानों के लिए माफी मांगेंगे।
जीवेश मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस ने उनको नकली दवा का सरगना बताया था। पप्पू यादव, तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर ने भी उनके खिलाफ बयानबाजी की थी। जीवेश ने कहा कि उनको बदनाम करने की कोशिश की गई लेकिन न्यायालय के फैसले से सत्य की जीत हुई है।
रोहिणी आचार्य पर क्या बोले जीवेश मिश्रा?
जीवेश ने कांग्रेस के बाद राष्ट्रीय जनता दल को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सिंगापुर से उनके खिलाफ ट्वीट किया था। विपक्ष ने उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया। चुनाव के दौरान उन्हें घेरने की कोशिश की गई।
जीवेश मिश्रा ने अपने सफाई में कहा कि वह उन्होंने वर्ष 2015 के चुनावी हलफनामे में उन्होंने इस मामले का जिक्र किया था। उन्होंने कुछ भी छिपाया नहीं था, सब कुछ हलफनामे में दर्ज था। हालांकि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद उनके खिलाफ लगातार बयान दिए गए। लेकिन जनता ने सच का साथ दिया। जनता ने विपक्ष के झूठ को नकार दिया और उन्हें तीसरी बार जीत दिलाई।
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'न्यायालय से बड़ा कोई नहीं'
कांग्रेस, राजद के बाद जीवेश मिश्रा ने बिना नाम लिए एक पूर्व आईपीएस अधिकारी के बयान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा क्या अब न्यायालय से बरी होने के बाद क्या वे अपने आरोपों के लिए माफी मांगेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीवेश मिश्रा ने पूछा कि क्या विपक्षी नेताओं को न्यायालय पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता किसी मामले की पूरी तहकीकात किए बिना बयान देने लगते हैं। बिना तथ्यों की जांच किए आरोप लगा देते हैं। यह ठीक नहीं है। न्यायालय से बड़ा कोई नहीं है।
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जीवेश मिश्रा पर क्या आरोप थे?
जीवेश मिश्रा राजनीति में आने से पहले दवा कारोबारी थे। वह आल्टो हेल्थलेयर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हुआ थे। साल 2010 में उन्होंने राजस्थान की कंपनी कंसारा ड्रग्स डिस्ट्रीब्यूटर से कुछ दवाओं के सैंपल लिया गया था। जांच करने पर इसमें मिलावट पाई गई थी। राजस्थान की एक कोर्ट ने 4 जून 2025 को फैसला सुनाते हुए जीवेश मिश्रा सहित 9 लोगों को इस मामले में दोषी करार दिया था। हालांकि बाद में जीवेश मिश्रा केवल जुर्माना देकर रिहा हो गए थे।
