बिहार में किसानों को आसानी से और सही कीमत पर खाद उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी और सख्त कर दी है। कृषि मंत्री ने सभी खाद कंपनियों को तय नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए खाद को दुकानों तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। नियमों में लापरवाही या गड़बड़ी मिलने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मंत्री के अनुसार, अब तक 7.50 लाख से ज्यादा किसान QR कोड के जरिए खाद खरीद चुके हैं।

 

कृषि विभाग ने FSAS ऐप के जरिए QR कोड से उर्वरक बेचने की व्यवस्था शुरू की है। इसका उद्देश्य खाद की बिक्री और वितरण में पारदर्शिता लाना है। फिलहाल यह व्यवस्था राज्य के 26 जिलों में लागू है। बाकी जिलों में इसे 2 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाएगा। विभाग के मुताबिक, डिजिटल तरीके से खाद की बिक्री होने पर स्टॉक आने से लेकर किसान को खाद मिलने तक पूरी प्रक्रिया पर नजर रखना आसान होगा। इससे यह भी पता चल सकेगा कि किस जगह कितनी खाद पहुंची और कितनी बिक्री हुई।

 

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खाद की खपत में 35% तक कमी का दावा

कृषि विभाग का कहना है कि डिजिटल तरीके से खाद की बिक्री शुरू होने के बाद उर्वरक की बिक्री में पारदर्शिता बढ़ी है। FSAS ऐप पर हर बिक्री दर्ज होने से खाद की वास्तविक खपत और वितरण पर नजर रखना आसान हुआ है। विभाग के अनुसार, इसके बाद राज्य में उर्वरक की खपत में करीब 35% तक की कमी दर्ज की गई है।

 

विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था से जरूरत से ज्यादा खाद की बिक्री पर रोक लगाने में मदद मिल रही है। साथ ही खाद की कालाबाजारी और बिना नियम के बिक्री पर भी नजर रखी जा रही है। इससे उपलब्ध खाद का बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने और सरकारी संसाधनों की बचत में मदद मिलने का दावा किया गया है।

 

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पूर्वी चंपारण में 1,000 बोरा अवैध खाद की सूचना

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को खाद की उपलब्धता को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है। कृषि विभाग राज्य में खाद की उपलब्धता और वितरण पर लगातार नजर रख रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्वी चंपारण में करीब 1,000 बोरा अवैध उर्वरक मिलने की सूचना को विभाग ने गंभीरता से लिया है। मामले की जांच के लिए तत्काल एक विशेष टीम भेजी गई है। जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले लोगों के साथ इसमें शामिल पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।