पंजाब में बिजली संकट लगातार बढ़ता जा रहा है और इसको लेकर अब जनता के बीच गुस्सा भी देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में लंबे बिजली कट लग रहे हैं और लोग परेशान हो रहे हैं। इसके साथ ही कई उद्योगों में 14-14 घंटे बिजली सप्लाई बंद हो जाने के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है। सरकार के मंत्री दावा कर रहे हैं कि बिजली संकट हल हो गया है लेकिन जनता और उद्योगों को अभी तक राहत नहीं मिली है।  14 सितंबर को कांग्रेस ने पटियाला में पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इसी दौरान किसान संगठनों और अन्य व्यावसायिक संगठनों ने भी राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बिजली आपूर्ति को लेकर प्रदर्शन किए।

 

पंजाब में लगातार बिजली की सप्लाई मांग से कम हो रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को बिजली की मांग 17,405 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इससे पहले 18 जुलाई को 17,452  सर्वाधिक मांग दर्ज की गई थी। एक तरफ मांग बढ़ रही है तो वहीं, दूसरी तरफ प्रोडक्शन कम हो रहा है। करीब 1,478 मेगावाट उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। पंजाब के  रोपड़, लहरा मोहब्बत और तलवंडी साबो थर्मल की कुछ इकाइयां कम क्षमता पर चलीं, जबकि पानी की कमी से हाइडल की पांच इकाइयां बंद रहीं। कई प्राइवेट और सरकारी इकाइयों में पहले ही उत्पादन लगातार कम हो रहा था। 

 

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मांग बढ़ रही प्रोडक्शन नहीं

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब की बिजली की मांग पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है, लेकिन उत्पादन क्षमता उसी रफ्तार से नहीं बढ़ी है। 2016 में राज्य की कुल थर्मल उत्पादन क्षमता करीब 6,580 मेगावाट थी, जो अब घटकर करीब 5,680 मेगावाट रह गई है। दूसरी तरफ बिजली की पीक डिमांड 2016 के करीब 11,000 मेगावाट से बढ़कर जुलाई 2026 में रिकॉर्ड 17,452 मेगावाट तक पहुंच गई। यानी डिमांड और प्रोडक्शन के बीच लगातार अंतर बढ़ता जा रहा है। इस संकट को कोयले की कमी ने और बढ़ाया। पंजाब के बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड ने सितंबर की शुरुआत में कहा था कि देशभर में कोयले की कमी के कारण पंजाब में बिजली उत्पादन करीब 1,500 मेगावाट घटा है और राजपुरा तथा तलवंडी साबो जैसे बड़े थर्मल प्लांट प्रभावित हुए हैं।

क्या सिर्फ कोयले की कमी है वजह?

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, 'बिजली की समस्या हल हो गई है। पूरे देश में यह समस्या आई थी। झारखंड में कोयले की खानों में बाढ़ का पानी आ गया था, जिसकी वजह से कोयले की कमी हो गई थी। अब हमने बातचीत कर ली है।' भगवंत मान ने यह भी कहा कि दो प्राइवेट थर्मल प्लांट को भी कोयला देने की बात कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर कोल इंडिया से दोनों प्लांट को कोयला देने की अनुमति देने के लिए कहा था।

 

हालांकि, समस्या सिर्फ कोयले की नहीं है क्योंकि कुछ थर्मल यूनिट तकनीकी कारणों से बंद रहीं। 12 सितंबर तक नाभा और तलवंडी साबो की प्रमुख यूनिटों के बंद रहने से संकट और गहरा गया है। उस समय पंजाब की पीक डिमांड करीब 16,519 मेगावाट थी, जबकि PSPCL की अपनी बिजली उत्पादन क्षमता करीब 4,300 मेगावाट के आसपास थी। बाकी जरूरत बिजली खरीदकर पूरी करनी पड़ रही थी।

कहां-कहां असर पड़ा?

सबसे ज्यादा असर उद्योगों पर पड़ा। लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, खन्ना, मोहाली और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे औद्योगिक इलाकों में कई घंटे के कट लगाए गए। लुधियाना में औद्योगिक उपभोक्ताओं को 12 सितंबर को करीब 14 घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा। घरेलू उपभोक्ताओं ने भी चार से पांच घंटे तक अनियमित कट की शिकायत की। एक फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारी ने कहा, 'यहां रात 8 बजे से पावर कट शुरू होता है, जो सुबह 6 बजे तक रहता है। इससे हमारी रात की प्रोडक्टिविटी खत्म हो जाती है।'

 

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सरकार का क्या कहना है?

पंजाब सरकार अब कह रही है कि संकट दूर हो चुका है। बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड ने 14 सितंबर को दावा किया कि दो निजी बिजली संयंत्रों के दोबारा चालू होने के बाद राज्य में बिजली आपूर्ति सामान्य हो गई है। उनके मुताबिक इन संयंत्रों में टर्बाइन की तकनीकी खराबी से करीब 2,300 मेगावाट की कमी हुई थी। उन्होंने कहा कि दोनों प्लांट रविवार को बहाल हो गए और उसके बाद राज्य में कट नहीं हो रहे। सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए बिजली आपूर्ति 8 से बढ़ाकर 10 घंटे करने की बात भी कही।

 

AAP नेता कुलदीप सिंह धालीवाल ने भी दावा किया कि पंजाब संकट से बाहर आ गया है। उन्होंने कहा कि राज्य की अपनी बिजली उत्पादन क्षमता करीब 5,300-5,400 मेगावाट पहुंच गई है और करीब 15,700 मेगावाट की मांग पूरी की जा रही है। उन्होंने केंद्र पर पंजाब को केंद्रीय पूल से मिलने वाली 1,051 मेगावाट बिजली रोकने का आरोप भी लगाया।