अयोध्या का राम मंदिर, इन दिनों गबन और चोरी की वजह से चर्चा में है। राम मंदिर की दान राशि में करोड़ों रुपये के गबन का मामला लगातार गहराता जा रहा है। जांच में अब तक पांच मुख्य किरदार सामने आए हैं, जिनकी भूमिका दान राशि की गिनती और प्रबंधन से जुड़ी बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार मामले में 8 करोड़ रुपये से अधिक के हेरफेर के संकेत मिले हैं, जबकि अब तक 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी भी की जा चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रमाशंकर को मामले में मुख्य संदिग्ध माना जा रहा है। जांच में इन सभी की भूमिका सामने आई है और बरामद की गई रकम भी इन्हीं की निशानदेही पर मिली है। पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिससे गबन का दायरा और बड़ा होने की आशंका जताई जा रही है।
2.98 करोड़ की रिकवरी, 8 करोड़ से ज्यादा के खेल का अंदेशा
जांच में अब तक 2.98 करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं। हालांकि सूत्रों का दावा है कि दान राशि में हेरफेर का आंकड़ा 8 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। जांच पूरी होने के बाद वास्तविक रकम का खुलासा होगा। संदिग्धों के बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है।
यह भी पढ़ें: यूपी: संगठन कमजोर, दावा 403 सीटों पर, कांग्रेस का सियासी गणित क्या है?
क्या किसी बड़े शख्स के इशारे पर हुआ गबन?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम लंबे समय तक कैसे गायब होती रही और किसी को भनक तक नहीं लगी। जांच से जुड़े सूत्रों का मानना है कि इस पूरे प्रकरण के पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका हो सकती है। हालांकि अभी तक किसी बड़े नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
टिन्नू नाम की सबसे ज्यादा चर्चा
जांच के दौरान 'टिन्नू' नाम की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट से जुड़े एक पदाधिकारी का वह करीबी माना जाता है। संदिग्धों में शामिल रमाशंकर का उससे पारिवारिक संबंध भी बताया जा रहा है। इसी वजह से उसकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अभी तक उसके खिलाफ कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं हुई है।
यह भी पढ़ें: ASP से टिकट चाहिए? 20 मिनट का वक्त, 25 सवाल, चंद्रशेखर आजाद लेंगे इंटरव्यू
पुलिस और ट्रस्ट की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
इतने बड़े मामले के बावजूद ट्रस्ट और पुलिस प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। वहीं सूत्र बताते हैं कि जांच और रिकवरी की प्रक्रिया में पुलिस की एक टीम अनौपचारिक रूप से सहयोग कर रही है।
संदिग्धों के घरों और खातों की हो रही जांच
जांच एजेंसियां संदिग्धों के बैंक खातों, संपत्तियों और ठिकानों की पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार अवनीश के खाते से पांच लाख रुपये मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा जेवरात भी बरामद किए गए हैं। रुदौली क्षेत्र में लवकुश के घर पर छापेमारी के दौरान 10 से 12 लाख रुपये नकद मिलने की भी बात सामने आई है।
3 सदस्यीय एसआईटी करेगी पूरे मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है। एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ जोन की पुलिस महानिरीक्षक किरन एस और विशेष वित्त सचिव नीलरतन को शामिल किया गया है। टीम सात दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिन के भीतर अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। अब सभी की नजर एसआईटी की जांच पर टिकी हुई है। जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि गबन की वास्तविक रकम कितनी है, इसके पीछे कौन लोग शामिल थे और क्या इस पूरे मामले में किसी बड़े व्यक्ति की भूमिका रही है।
