हरियाणा के अलग-अलग जिलों में पिछले कई दिनों से सफाईकर्मियों का प्रदर्शन चल रहा है। कई मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों ने कई जगहों पर कूड़ा उठाने से भी इनकार कर दिया है। ऐसा ही कुछ झज्जर में हो रहा था तो कूड़ा हटवाने के लिए पुलिस बुला ली गई। मंगलवार रात को जेसीबी लेकर आई पुलिस का सामना प्रदर्शनकारी सफाईकर्मियों से हुआ। ये सफाईकर्मी जेसीबी पर चढ़ गए और जमकर नारेबाजी की। बाद में जब पुलिस ने लोगों को हिरासत में लेना शुरू किया तो महिला सफाईकर्मियों ने पुलिस पर ही कूड़ा फेंक दिया। बड़ी मशक्कत के बाद पुलिस इन प्रदर्शनकारियों को हटाने में कामयाब हो पाई।   

 

ये प्रदर्शन सिर्फ झज्जर तक ही सीमित नहीं हैं और इनका असर अब हरियाणा के कई शहरों में दिखने लगा है। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने उनसे किया वादा नहीं निभाया है और प्रदर्शन के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। अलग-अलग नगर पालिका, निगम और परिषदों के सफाई कर्मचारी अपने-अपने तरीके से विरोध जता रहे हैं और अब ऐसा करते हुए 20 दिन हो चुके हैं।

पुलिस पर क्यों फेंका कूड़ा?

दरअसल, कई शहरों में कूड़ा ना उठा रहे सफाई कर्मचारी दिन में प्रदर्शन करते आ रहे थे। प्रशासन ने कई जगहों पर रात में कूड़ा हटवाया तो अब सफाईकर्मियों ने रात में भी प्रदर्शन शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, डंपिंग साइट्स पर भी निगरानी शुरू कर दी गई। ऐसा ही कुछ झज्जर नगर परिषद में मंगलवार को हुआ। कूड़ा हटवाने के लिए जब स्थानीय निकाय की जेसीबी आई तो सफाई कर्मचारियों ने विरोध किया और जेसीबी पर चढ़ गए।

 

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बाद में पुलिस आई और लोगों को वहां से हटाने लगी। इसे देखते ही महिला कर्मचारियों ने बचने की कोशिश की। इसी कोशिश में वे पुलिस के ऊपर ही कूड़ा फेंकती नजर आईं। हालांकि, बाद में पुलिस ने सभी कर्मचारियों को हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया और कूड़ा साफ करवा दिया।

क्यों हो रहा है प्रदर्शन?

हरियाणा के कुल 87 नगरीय निकायों के सफाई और कई अन्य कर्मचारी 6 अगस्त से ही हड़ताल कर रहे हैं। इनका कहना है कि 13 मई को सरकार से समझौता हुआ था लेकिन सरकार उस समझौते की शर्तों को ही लागू नहीं कर रही है। इसी के चलते हरियाणा के शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल का जमकर विरोध हो रहा है। कई शहरों के सफाईकर्मियों ने उनके पुतले भी फूंके हैं।

 

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सफाई कर्मचारियों ने अपनी मांग पूरी ना होने तक कूड़ा उठाने से इनकार कर दिया है जिसके चलते कई शहरों में जगह-जगह कूड़ा जमा हो गया है। बदबू से स्थानीय लोग भी परेशान हैं। कई जगहों पर तो ये कर्मचारी निकायों के दफ्तर पर ताला लगाकर बाहर ही धरने पर बैठ जा रहे हैं जिससे कामकाज में भी बाधा आ रही है। इन कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें पक्का किया जाए, ठेका प्रथा बंद हो और सफाई-सीवर कर्मचारियों की पक्की भर्ती की जाए।