तेलंगाना की सरकार की ओर से कराए गए एक जातिगत सर्वे में सामने आया है कि प्रदेश की सैकड़ों जातियां बेहद पिछड़ी हुई हैं। तेलंगाना की 242 में से 135 जातियां ऐसी हैं जो एवरेज कंप्रेहेंसिव बैकवर्डनेस इंडेक्स (CBI) से भी ज्यादा पिछ़ड़ी हुई हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) जातियां सामान्य वर्ग की तुलना में 2.7 गुना पिछड़ी हैं। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजातियां (ST) सामान्य वर्ग से तीन गुना ज्यादा पिछड़ी हैं। इसी सर्वे के मुताबिक, राज्य की 135 बेहद पिछड़ी जातियों की कुल आबादी प्रदेश की जनसंख्या के 67 प्रतिशत यानी लगभग दो तिहाई के बराबर है।

 

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी की अध्यक्षता वाले इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप (IEWG) ने यह भी कहा कि अनुसूचित जातियां (SC) और अनुसूचित जनजातियां (ST) सामान्य वर्ग की तुलना में तीन गुना ज्यादा पिछड़ी हैं। यह सर्वेक्षण साल 2024-25 में कराया गया था, लेकिन राज्य सरकार ने ‘तेलंगाना सामाजिक-आर्थिक, शैक्षिक, रोजगार, राजनीतिक और जाति सर्वेक्षण-2024’ को बुधवार देर रात सार्वजनिक किया। मार्च 2025 में राज्य सरकार ने इस सर्वेक्षण का व्यापक विश्लेषण करने के लिए नौ सदस्यीय IEWG का गठन किया था। 

 

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हैरान कर देगी सर्वे की रिपोर्ट

इस समूह को सर्वे के निष्कर्षों का सत्यापन, विश्लेषण, व्याख्या और प्रस्तुतीकरण करने की जिम्मेदारी दी गई थी। अब इस टीमने अपनी प्रमुख टिप्पणियों में कहा कि पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सामान्य वर्ग की तुलना में 2.7 गुना ज्यादा पिछड़ा है। IEWG ने कहा है कि पूरे राज्य का औसत समग्र पिछड़ापन सूचकांक (CBI) 81 है। उसने कहा, ‘ध्यान रहे, सीबीआई स्कोर जितना ज्यादा होगा, जाति उतनी ही अधिक पिछड़ी मानी जाएगी। 242 में से 135 जातियों का सीबीआई स्कोर 81 से ज्यादा है और ये 135 जातियां राज्य की कुल आबादी का 67 प्रतिशत हिस्सा हैं।’

 

इन 135 जातियों में 69 पिछड़ा वर्ग, 41 अनुसूचित जाति और 25 अनुसूचित जनजाति की जातियां शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि अपेक्षित रूप से ‘सामान्य वर्ग’ की 18 जातियां, जो कुल आबादी का 12 प्रतिशत हिस्सा हैं, राज्य के औसत सीबीआई से काफी नीचे हैं।रि पोर्ट का मुख्य निष्कर्ष यह है कि हर पिछड़ी जाति समान रूप से पिछड़ी नहीं होती। अगर 135 जातियां औसत से अधिक पिछड़ी हैं तो इसका मतलब है कि 107 जातियां ऐसी हैं, जो राज्य के औसत से कम पिछड़ी मानी गई हैं।

 

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इन 107 अपेक्षाकृत कम पिछड़ी जातियों में सामान्य वर्ग की सभी 18 जातियां, पिछड़ा वर्ग की 64 जातियां, अनुसूचित जाति की 18 और अनुसूचित जनजाति की सात जातियां शामिल हैं। ये 107 जातियां राज्य की कुल आबादी का 29 प्रतिशत हिस्सा हैं।