लोहा और स्टील बनाने वाली भट्ठियों से निकलने वाला स्लैग (कचरा) अब रिसाइकिल किया जाएगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने इसको लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। भट्ठियों से निकलने वाला ये स्लैग अब खुले में नहीं फेंका जा सकेगा। हर साल कई टन में निकलने वाला स्लैग पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहा है। अब इस स्लैग को इस्तेमाल में लाया जाएगा। रेलवे ट्रैक पर पत्थरों की गिट्टी की जगह अब स्लैग का इस्तेमाल होगा। इसके अलावा इस स्लैग से सीमेंट व कंक्रीट भी बनाया जाएगा, जिसका इस्तेमाल सड़क निर्माण में किया जाएगा।

 

बता दें कि सूरत में इस स्लैग के इस्तेमाल से पहली सड़क बनाई जा चुकी है। सीपीसीबी की गाइडलाइन के अनुसार, प्लांटों को भूजल की जांच एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब से करवानी होगी। जिसकी रिपोर्ट राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपनी होगी। सीपीसीबी की इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास की गति भी बढ़ेगी।

 

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डंपिंग साइट्स करनी होगी बंद

प्लांटों से निकलने वाला स्लैग या डंप किया जा रहा है या खुले में गिराया जा रहा है। सीपीसीबी की तरफ से गाइडलाइन जारी कर दो साल का समय दिया गया है। प्लांटों से निकलने वाला स्लैग न तो खुले में गिराया जाएगा और डंपिंग साइट्स भी बंद होंगी, बल्कि जमीन के ऊपर स्लैग यार्ड बनाने होंगे। जिस पर 1.5 एमएम मोटी जियो-मेम्ब्रेन शीट व 600 एमएम मोटी मिट्टी की परत लगाई जाएगी, ताकि जहरीले तत्व रिसकर जमीन में न जा सकें। सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार हर साल 2.4 करोड़ टन स्लैग निकलता है। अगले 5 साल में ये संख्या दोगुनी हो जाएगी।

 

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ठेकेदार करेंगे संपर्क

बता दें कि इस स्लैग का इस्तेमाल रेलवे ट्रैक पर गिट्टी की जगह व सड़क निर्माण में होगा। सड़क निर्माण करने वाले व रेलवे लाइन पर गिट्टी गिराने का ठेका लेने वाले ठेकेदार प्लांटों में संपर्क कर इस स्लैग को खरीदेंगे। इससे आय भी बढ़ेगी और पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होगा।