उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम में चोरी के मामले में नई जानकारी सामने आई है। पुलिस की ओर से कोर्ट में दाखिल चार्जशीट के अनुसार, मार्च 2025 से 4 जून 2026 के बीच करीब 2.54 करोड़ रुपये के चढ़ावे की चोरी किए जाने की आशंका है। पुलिस ने चोरी हुई रकम को लेकर अभी अंतिम तौर पर कोई दावा नहीं किया है। करीब डेढ़ साल तक चली इस कथित चोरी में शुरुआत महज ढाई हजार रुपये से हुई थी लेकिन समय के साथ रकम लगातार बढ़ती गई और अंतिम दिन यानी 4 जून को 2.25 लाख रुपये पार किए गए।

 

पुलिस जांच में चढ़ावे की रकम निकालने, उसे अलग-अलग स्थानों पर बांटने और आरोपियों के बैंक खातों से जुड़े लेनदेन की भी पड़ताल की गई। जांच में मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और बैंक की भूमिका सामने नहीं आने पर दोनों को क्लीनचिट दी गई है। आरोप पत्र के अनुसार, चढ़ावा चोरी का मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्र था। पूछताछ में सामने आया कि चोरी मार्च 2025 में शुरू हुई और चार जून 2026 तक जारी रही।

 

आरोप है कि नोटों के बंडल अविनाश शुक्ल पार करता था, जबकि अन्य आरोपी उसे सीसीटीवी कैमरों की नजर से बचाने में सहयोग करते थे।शुरुआत में करीब ढाई हजार रुपये की चोरी की गई। इसके बाद चोरी की रकम लगातार बढ़ती गई। पुलिस के मुताबिक, कुंभ मेले के दौरान चढ़ावा चोरी की घटनाएं सबसे अधिक हुईं।

 

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कहां होता था रकम का बंटवारा?

आरोप पत्र में बताया गया है कि चोरी की रकम का बंटवारा जनौरा, टेढ़ी बाजार और सहादतगंज समेत अलग-अलग स्थानों पर किया जाता था। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों, चढ़ावे के ब्योरे और सीसीटीवी फुटेज का अध्ययन किया।इसी जांच के आधार पर पुलिस ने बुधवार को आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।

 

चार्जशीट में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाषचंद्र श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं।पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों की जानकारी जुटाई। इसके अलावा चढ़ावे के अभिलेख और सीसीटीवी फुटेज का अध्ययन किया गया। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर चोरी की रकम का आकलन किया गया है।

ट्रस्ट पदाधिकारियों और बैंक को क्लीनचिट

पुलिस की चार्जशीट में मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और बैंक की भूमिका सामने नहीं आने पर दोनों को क्लीनचिट दी गई है। जांच में एसआईटी के ऑडिटरों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। पुलिस ने बैंक खातों, चढ़ावे के अभिलेख और सीसीटीवी फुटेज का मिलान कर कथित चोरी की रकम का आकलन किया। मामले में छह आरोपियों की जमानत अर्जियां पहले ही खारिज हो चुकी हैं। मामला 7 जून को सामने आया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की और 25 जून को रामजन्मभूमि थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई।

 

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जमानत पर फिर टली सुनवाई

पूर्व बैंककर्मी सुभाषचंद्र श्रीवास्तव और ट्रस्टकर्मी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की जमानत अर्जी पर गुरुवार को सुनवाई फिर टल गई। अधिवक्ता कुलशेखर सिंह ने आरोप पत्र से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए समय मांगा। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ने अगली सुनवाई के लिए 25 सितंबर की तारीख तय की है।


आरोप पत्र में टिन्नू और सुभाष के खिलाफ कुछ धाराएं हटाई गई हैं। अब मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही के बाद ही आरोपों पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।