संजय सिंह, पटना। बिहार के भागलपुर में पिछले कई महीनों से विक्रमशिला सेतु की तकनीकी खामियों के कारण परेशानी झेल रहे कोसी और सीमांचल के लाखों लोगों के लिए रविवार राहत भरी सुबह लेकर आया। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा रिकॉर्ड समय में तैयार किए गए चार बेली ब्रिज अब पूरी तरह तैयार हैं और सफल तकनीकी परीक्षण के बाद आज से इन पर वाहनों का परिचालन शुरू कर दिया गया है।
विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बहाल होने के साथ ही भागलपुर, नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल और अररिया सहित पूरे पूर्वी बिहार की यातायात व्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सफल ट्रायल के बाद मिली हरी झंडी
शुक्रवार को बेली ब्रिज का लोड ट्रायल और तकनीकी परीक्षण किया गया। ट्रायल के दौरान भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने स्वयं मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उनके साथ प्रशासन, पुल निर्माण निगम और पथ निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने बताया कि सभी सुरक्षा और तकनीकी मानकों पर पुल खरा उतरा है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद यातायात संचालन की अनुमति दे दी गई है।
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10 टन तक के मालवाहक वाहन चल सकेंगे
नई व्यवस्था के तहत बेली ब्रिज पर अधिकतम 10 टन भार क्षमता वाले मालवाहक वाहनों का परिचालन किया जाएगा। पुल पर यातायात का दबाव नियंत्रित रखने के लिए वन-वे सिस्टम लागू किया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे जाम और दुर्घटना की आशंका कम होगी तथा वाहनों की आवाजाही सुचारू बनी रहेगी। विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा 3 मई को अचानक ढह गया था।
हर गतिविधि पर रहेगी कैमरों की नजर
यातायात संचालन के साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। पुल के दोनों ओर पुलिस पिकेट तैनात किए गए हैं। वहीं महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके जरिए 24 घंटे निगरानी की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तत्काल कार्रवाई की तैयारी की गई है।
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कोसी-सीमांचल के लिए राहत की बड़ी खबर
विक्रमशिला सेतु में तकनीकी समस्या आने के बाद लोगों को लंबी दूरी तय कर वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना पड़ रहा था। इससे समय, ईंधन और परिवहन लागत में भारी बढ़ोतरी हो रही थी। अब बेली ब्रिज शुरू होने से यात्रियों, व्यापारियों, किसानों और मालवाहक वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलेगी।
स्थायी समाधान तक बनेगा सहारा
प्रशासन का कहना है कि बेली ब्रिज अस्थायी व्यवस्था जरूर है, लेकिन यह क्षेत्र की जीवनरेखा साबित होगी। जब तक विक्रमशिला सेतु का स्थायी और पूर्ण तकनीकी समाधान नहीं हो जाता, तब तक यह व्यवस्था लाखों लोगों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
