बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव की कुर्सी खाली है। दीपक कुमार को 30 सितंबर को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया था। वह इससे पहले सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव पद पर थे। अब यह पद बिहार के सत्ता और नौकरशाही में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया है।

 

मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की जिम्मेदारी अब किस अधिकारी को मिलेगी, यह सवाल सबसे अधिक पूछा जा रहा है। देखना होगा कि सम्राट चौधरी इस पद पर किसी सेवारत अधिकारी को नियुक्त करते हैं या किसी अनुभवी पूर्व IAS अफसर को बड़ी भूमिका सौंपते हैं। हालांकि, नई नियुक्ति को लेकर अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। 

 

दीपक कुमार करीब 8 साल इस पद पर रहे थे। वह नीतीश कुमार के कार्यकाल में सबसे पावरफुल अफसर माने जाते थे। सूत्रों के अनुसार प्रधान सचिव की रेस में कई बड़े नाम चल रहे हैं। पहला नाम 1990 बैच के IAS संजय कुमार हैं। वर्तमान में वह जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव हैं। रेस में दूसरा नाम चंद्रशेखर मिश्रा (सीके मिश्रा) का चल रहा है। वह 1983 बैच के रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं। 

संजय कुमार या सीके मिश्रा?

प्रधान सचिव के पद पर जो नाम सबसे आगे है, वह संजय कुमार का है। वे बिहार के अनुभवी अधिकारियों में से हैं और कई महत्वपूर्ण विभागों में काम कर चुके हैं। उनकी छवि तेज-तर्रार और फैसले लेने वाले अफसर की है। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक ऐसा अधिकारी चाहिए जो प्रशासन पर पकड़ रखता हो और योजनाओं को जमीन पर उतार सके। संजय कुमार इस कसौटी पर फिट बैठते हैं।

 

दूसरा बड़ा नाम है सीके मिश्रा का। चंद्रशेखर कुमार मिश्रा 1983 बैच के रिटायर्ड IAS हैं। वे केंद्र में स्वास्थ्य सचिव और पर्यावरण सचिव जैसे बड़े पदों पर रह चुके हैं। वे बिहार के ही रहने वाले हैं और दिल्ली में भी उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। चर्चा है कि सम्राट चौधरी किसी अनुभवी रिटायर्ड अफसर को यह जिम्मेदारी देकर दिल्ली से बेहतर समन्वय बनाना चाहते हैं। यदि सीके मिश्रा आते हैं तो यह नीतीश मॉडल से अलग एक नया मॉडल होगा।

 

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प्रत्यय अमृत का नाम भी चर्चा में

संजय कुमार और सीके मिश्रा के अलावा दो और नामों पर चर्चा है। एक नाम है प्रत्यय अमृत का। प्रत्यय अमृत 1991 बैच के IAS हैं। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव हैं। उनकी छवि ईमानदार और काम करने वाले अफसर की है। कोरोना काल में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में काफी अच्छा काम किया था। दूसरा नाम है ब्रजेश मेहरोत्रा का। ब्रजेश मेहरोत्रा 1989 बैच के IAS हैं और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में हैं।  

 

वहीं, कुछ लोग कह रहे हैं कि सम्राट चौधरी इस परंपरा को तोड़ सकते हैं। क्या नीतीश कुमार की तरह वे भी किसी भरोसेमंद और लंबे समय तक साथ रहने वाले अफसर को चुनेंगे या फिर नए युग का नया प्रधान सचिव लाएंगे? नीतीश कुमार ने दीपक कुमार को 99 महीने तक इस पद पर रखा था। सम्राट चौधरी क्या करेंगे, इस पर सबकी नजर है।

 

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रिटायर्ड या सेवारत, किसे चुनेंगे मुख्यमंत्री

बिहार में प्रधान सचिव मुख्यमंत्री का सबसे करीबी अफसर होता है। वही सारी फाइलें देखता है, वही मुख्यमंत्री और पूरी नौकरशाही के बीच पुल का काम करता है। इस पद पर बैठने वाला अधिकारी ही तय करता है कि सरकार किस दिशा में जाएगी। इसलिए इस कुर्सी का महत्व मुख्यमंत्री के बाद सबसे ज्यादा माना जाता है।

 

सचिवालय के गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री इस फैसले में जल्दबाजी नहीं करना चाहते। वे एक-एक नाम पर फीडबैक ले रहे हैं। बीजेपी और जेडीयू दोनों के वरिष्ठ नेताओं से भी इस पर बात हो रही है। कहा जा रहा है कि विधान परिषद चुनाव के बाद इस नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है।

 

फिलहाल, प्रधान सचिव का प्रभार किसके पास है, इस पर भी सस्पेंस है। दीपक कुमार के हटने के बाद से यह पद खाली चल रहा है और कई फाइलें मुख्यमंत्री खुद देख रहे हैं। ऐसे में नई ताजपोशी का इंतजार और भी बढ़ गया है।