उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हर की पौड़ी समेत कई प्रमुख घाटों पर गंगा का जलस्तर काफी कम हो गया है। हालात ऐसे हैं कि श्रद्धालुओं को डुबकी लगाने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। कई लोग लोटे और छोटे बर्तनों से जल लेकर स्नान कर रहे हैं। इससे श्रद्धालुओं में निराशा है। पुजारियों का कहना है कि उनको पूजा-पाठ करने के लिए पर्याप्त मात्रा में जल नहीं मिल रहा है। वहीं, व्यापारी वर्ग भी श्रद्धालुओं के कम होने की वजह से परेशान है। हालांकि घाटों पर पूजा-पाठ और छोटे धार्मिक अनुष्ठान अभी भी जारी है।

 

गंगा का जलस्तर कम होने की वजह ऊपरी गंगनहर को बंद करना बताया जा रहा है। मंगलवार देर रात नहर को मरम्मत और सफाई के लिए बंद किया गया। यह काम करीब 20 दिनों तक चलेगा। इस दौरान नहर की सफाई के साथ जरूरी मरम्मत भी की जाएगी। आने वाले कुंभ मेले को देखते हुए भी नहर और घाटों से जुड़े कुछ काम किए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 8 नवंबर की सुबह हर की पौड़ी समेत दूसरे घाटों पर गंगा का प्रवाह फिर से शुरू हो जाएगा।

 

लोटे से स्नान कर रहे श्रद्धालु

हरिद्वार के हर की पौड़ी घाट का हिंदू धर्म में खास महत्व है। मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु के चरण पड़े थे। यही वजह है कि देशभर से श्रद्धालु यहां गंगा स्नान और पूजा-पाठ के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक स्नान के दौरान गंगा में डुबकी लगाने की परंपरा है, लेकिन जलस्तर कम होने से श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है।

 

घाटों पर पानी कम होने के कारण कई श्रद्धालु लोटे और छोटे बर्तनों से जल लेकर स्नान कर रहे हैं। इससे उनकी धार्मिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। घाटों पर पूजा-पाठ तो जारी है, लेकिन गंगा में डुबकी नहीं लगा पाने से श्रद्धालु निराश हैं।

 

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20 दिन तक बंद रहेगी गंगनहर

ऊपरी गंगनहर को मरम्मत और सफाई के लिए करीब 20 दिनों तक बंद रखा गया है। इस दौरान हरिद्वार समेत 15 जिलों में नहर की सफाई, गाद निकालने और मरम्मत का काम किया जाएगा। इसके अलावा, नहर के उन हिस्सों की भी जांच की जाएगी, जिनमें पानी भरा रहने के कारण नुकसान का पता लगाना मुश्किल होता है।

 

हर की पौड़ी और दूसरे घाटों पर जल प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए समतलीकरण का काम भी किया जाना है। नहर बंद रहने के दौरान कुंभ मेले से जुड़े कुछ काम भी पूरे किए जाएंगे। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे इस अवधि में हरिद्वार में गंगा स्नान की योजना टाल दें।

 

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एग्जीक्यूटिव इंजीनियर क्या बोले?

उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर विकास त्यागी ने कहा कि,'बंदी हर साल होने वाला एक मेंटेनेंस कार्य है। यह नहर प्रणाली दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र को पीने का पानी भी उपलब्ध कराती है। साथ ही कई थर्मल पावर स्टेशनों (जैसे NTPC दादरी प्लांट) के साथ-साथ नदी पर बने कई हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट्स को भी मदद पहुंचाती है। साल भर नहरें चालू रहने के कारण, इनके कई हिस्से पानी में डूबे रहते हैं या इस्तेमाल में होते हैं, जिससे उनकी ठीक से जांच करना मुमकिन नहीं हो पाता। केवल इसी बंदी के दौरान ही अलग-अलग तरह के नुकसान सामने आते हैं, जिससे हम जरूरी मरम्मत की योजना बना सकते हैं और उसे पूरा कर सकते हैं।'

कारोबार और धार्मिक गतिविधियों पर असर

हरिद्वार के घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही से स्थानीय कारोबार चलता है। गंगा स्नान के लिए आने वाले लोग पूजा सामग्री, फूल-माला और दूसरी चीजें खरीदते हैं। इससे घाटों के आसपास के दुकानदारों और दूसरे कारोबारियों को फायदा होता है। नहर बंद होने और घाटों पर पानी कम होने से कारोबारियों के साथ पुजारियों की चिंता भी बढ़ी है। कुछ व्यापारी इस स्थिति से नाराज हैं, जबकि पुजारियों का कहना है कि इससे उनके धार्मिक अनुष्ठान प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, नहर की मरम्मत और सफाई पूरी होने के बाद गंगा का प्रवाह दोबारा शुरू होने की उम्मीद है।