झारखंड में सरकारी नौकरी के परीक्षा घोटाले को लेकर छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। 25 जुलाई से सैकड़ों युवा रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुटकर झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। यह आंदोलन NEET घोटाले के विरोध के बाद शुरू हुआ और अब बड़े स्तर पर फैल गया है।
 

29 जुलाई को हजारों छात्रों ने संविधान और तिरंगे लेकर शांतिपूर्ण मार्च निकाला। छात्रों का कहना है कि झारखंड बनने के 26 साल बाद भी भर्ती में घोटाले रुक नहीं रहे हैं। पुलिस ने JPSC पेपर लीक मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। JPSC चेयरमैन लाल बियाकत लुंगा खूंटे को इस्तीफा देना पड़ा। फिर भी छात्र संतुष्ट नहीं हैं। 

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क्या चाहते हैं प्रदर्शनकारी छात्र?

छात्र पूरे भर्ती सिस्टम में बड़े सुधार की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन प्रदर्शनकारी इसे पर्याप्त नहीं मान रहे। प्रदर्शन स्थल पर ABVP, AISA, आदिवासी छात्र संघ समेत कई छात्र संगठनों के कार्यकर्ता मौजूद हैं। 

 

 

राजनीतिक पार्टियों से दूरी बना रहे हैं छात्र

राजनीतिक पार्टियों ने नैतिक समर्थन दिया है, लेकिन छात्र इसे पूरी तरह निष्पक्ष और छात्र-आंदोलन बनाए रखना चाहते हैं। स्थानीय लोग भी छात्रों का साथ दे रहे हैं। वे खाना, पानी, रेनकोट और पैसे दान कर रहे हैं। 

6 अगस्त को विधानसभा घेरने की तैयारी 

बारिश में भी छात्र स्टेज पर रात बिताते हैं। 6 अगस्त को वे विधानसभा की ओर मार्च निकालने वाले हैं। छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि नौकरियों में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य का सवाल है।

 

 



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खल रही है विपक्ष की चुप्पी

जंतर मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को  लेकर कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन चला। कांग्रेस ने भी अलग से आंदोलन चलाया और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी जैसे दलों ने भी केंद्र की आलोनचा की है। अभी तक किसी ने मुखर होकर हेमंत सोरेन की आलोचना नहीं की है।