कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने अपने मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी न देने का निर्णय लिया है। मध्य प्रदेश कैबिनेट 25 अगस्त को यह फैसला लिया था। बाद में उसे राज्यपाल मंगूभाई पटेल को भेजा गया। राज्यपाल से भी इसकी मंजूरी मिल गई है। अब मध्य प्रदेश सरकार अपनी दलीलों को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखेगी।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश सरकार ने अपने बचाव के समर्थन में पांच बिंदुओं को अहम माना है। इन्हीं के आधार पर कैबिनेट का मानना है कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने का पर्याप्त आधार नहीं है।
यह भी पढ़ें: एयर इंडिया: पायलट पर एक्शन की सिफारिश, हाइड्रोलिक सिस्टम में आई थी खराबी
सरकार का तर्क है कि विवादित बयान पर सियासी हंगामे के बावजूद कोई भी शख्स शिकायत दर्ज कराने सामने नहीं आया। मंत्री ने अपने बयान में कर्नल कुरैशी का नाम नहीं लिया। शाह ने तीन बार माफी मांगी। लिखित में भी अपने बयान पर खेद जताया। मंत्री का इरादा कर्नल सोफिया कुरैशी या किसी अन्य का अपमान करने का नहीं था। बचाव के समर्थन में सरकार का यह भी तर्क है कि उनके बयान से सांप्रदायिक सद्भाव को कोई बाधा नहीं पहुंची है। मुकदमा चलाने के फैसले के दौरान मंत्री की बार-बार मांगी गई माफी को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
मंत्री विजय का कितना बड़ा सियासी रसूख
विजय शाह मध्य प्रदेश बीजेपी का बड़ा आदिवासी चेहरा है। उनका संबंध गोंड जनजाति से है। मध्य प्रदेश में इस समुदाय की अच्छी खासी आबादी है। मकराई राजपरिवार से आने वाले विजय शाह की न केवल अपने समुदाय, बल्कि अनुसूचित जनजाति समूह में मजबूत पकड़ है। मध्य प्रदेश की करीब 22 फीसद जनसंख्या जनजातियों से संबंधित है। 1990 से लगातर आठ बार के विधायक विजय शाह की सियासी कामयाबी उनके अपने समाज में पकड़ को दिखाती है।
यह भी पढ़ें: 'पहली बॉल पे लप्पा नहीं मारूंगा', बर्थडे पर युवराज ने दिलाई कसम, कराई उठक-बैठक
प्रदेश में 47 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों के अलावा अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी यह समुदाय खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखता है। यही कारण है कि मध्य प्रदेश सरकार मंत्री विजय शाह कोई भी कदम उठाने से बच रही है। उन्हें हर हाल में बचाया जा रहा है। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि मंत्री के खिलाफ कभी एक्शन नहीं लिया गया। उन्होंने 2013 में महिलाओं पर विवादित बयान दिया था। इसके बाद उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। लेकिन यह उनका सियासी रसूख था कि चार महीने बाद दोबारा मंत्री बना दिया गया।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिया था विवादित बयान
पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के वक्त मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। चौतरफा घिरने और सियासी हंगामे के बाद मंत्री ने अपने बयान पर सफाई दी। माफी भी मांगी। बाद में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया। मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है।
