उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के डीएम ऑफिस में शनिवार सुबह बुलडोजर चल गया। कोर्ट के फैसले के बाद इस मस्जिद को अवैध ठहरा दिया गया था और अब इसे ढहा दिया गया है। सहारनपुर के सिटी मैजिस्ट्रेट ने ही इस मस्जिद को गिराने का आदेश दिया था। इसका विरोध करने के लिए अपने घर से निकलने की कोशिश कर रहीं समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को हाउस अरेस्ट कर दिया और घर से निकलने नहीं दिया गया। स्थानीय सांसद इमरान मसूद ने इस पर कहा है कि देश के संविधान का उल्लंघन हुआ है। 

 

यह मामला बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत के बाद शुरू हुआ था। उनकी शिकायत में कहा गया था कि जिलाधिकारी कार्यालय में अवैध रूप से मस्जिद बनाई गई है। शिकायत में यह भी कहा गया था कि इस मस्जिद में सिर्फ इबादत नहीं होती बल्कि इसका व्यावसायिक इस्तेमाल भी हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि इसके कमरे किराए पर भी दिए गए हैं।

 

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क्या बोले पुलिस के अधिकारी?

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर DIG अभिषेक सिंह ने बताया है, 'जनपद सहारनपुर के कलेक्ट्रेट में एक मस्जिद थी जिसे सिटी मैजिस्ट्रेट की कोर्ट ने अवैध पाया। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने फर्स्ट अपील की थी और इसे खारिज कर दिया गया था। सिटी मैजिस्ट्रेट के आदेश को पुष्ट किया गया है और इसी के तहत अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो रही है। हमें पांच कंपनी PAC/RAF मिली है जिसे स्ट्रैटटिक प्वाइंट पर तैनात किया गया है। कानून व्यवस्था के मद्देनजर हमें जितने भी कदम उठाने थे, हमने उठाए हैं। लगातार चेकिंग की जा रही है और हम सोशल मीडिया पर भी नजर रख रहे हैं।'

इमरान मसूद ने जताया विरोध

इस मामले में स्थानीय सांसद इमरान मसूद ने कहा, 'पूरी रात हमारे लोग जागते रहे। हम लोग अधिकारियों से संपर्क करते रहे। यह मस्जिद नहीं शहीद की गई है, संविधान की धज्जियां उड़ाई गई हैं। मस्जिद 1911 से पहले की है। मस्जिद की मिल्कियत आज भी वहीद खां और याकूब खां के नाम है। हालात ये हैं कि सारी चीजें देने के बावजूद सिटी मैजिस्ट्रेट ने आदेश किया और ऐसा आदेश किया कि 30 दिन के अंदर करना है। सारी चीजों को नजरअंदाज कर दिया गया।'

 

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उन्होंने आगे कहा, 'इसमें वक्फ बोर्ड को पार्टी नहीं बनाया। इसमें लिमिटेशन ऐक्ट का ख्याल नहीं रखा गया। वक्फ के नए कानून का ध्यान नहीं रखा। वक्फ बाय यूजर का ख्याल नहीं रखा। आप अपना टाइटल साबित नहीं कर सके कि आपका कैसे हो गया। खसरा तो सिर्फ मौजूदा स्थिति बताता है। चारों तरफ से घेरा हुआ है। हमारे लोग घूम रहे थे लेकिन लोगों को घरों में बंद करके मस्जिद गिरा दी। यह देश के संविधान पर हथौड़ा चल रहा है। हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट जहां तक लड़ना होगा, लड़ेंगे। यह काम आप आज हमारे लिए करेंगे, कल दूसरों के लिए करेंग। इससे कोई हिंदू खुश नहीं होगा कि किसी दूसरे का धर्मस्थल गिर गया। सहारनपुर के लोगों को इसका विरोध खामोशी के साथ करना चाहिए।'

क्या है मस्जिद का पूरा विवाद?

शिकायतों के बाद प्रशासन ने 24 मार्च 2025 को सिटी मैजिस्ट्रेट की कोर्ट में पीपी ऐक्ट के तहत याचिका दायर की थी। 16 जुलाई 2026 को मस्जिद को अवैध करार देते हुए 64.16 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इसी फैसले को जिला कोर्ट में चुनौती दी गई तो उसे खारिज कर दिया गया और सिटी मैजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले को ही बरकरार रखा गया। 

 

मस्जिद पक्ष ने साल 1911 का बिजली बिल पेश किया गया। इस पर प्रशासन ने तर्क दिया था कि सहारनपुर में बिजली ही 1922 में पहुंची और लोगों तक उसकी सप्लाई 1928 में शुरू हुई तो बिल कहां से आ गया? इतना ही नहीं, खसरे के मुताबिक,सरकार केसरी हिंद में कचहरी और कलेक्ट्रेट दर्ज होने के आधार पर माना गया कि वहां कोई मस्जिद नहीं थी।