केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ( EPFO ) के तहत वेतन सीमा को 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मंजूरी दे दी है। यह बदलाव 12 साल बाद हुआ है। श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि यह बढ़ी हुई वेतन सीमा गुरुवार से लागू होगी। गुरुवार को विश्वकर्मा दिवस भी है।
केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद अब 8 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों के लिए 25,000 रुपये की सीमा तक EPF में योगदान देना अनिवार्य हो जाएगा, इससे ऊपर की सैलरी पर योगदान स्वैच्छिक रहेगा। मासिक पेंशन योगदान की सीमा भी 1,250 रुपये से बढ़ाकर 2,080 रुपये कर दी गई है।
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किस वर्ग को इससे लाभ पहुंचेगा?
पहले अगर आपकी शुरुआती बेसिक सैलरी 15,000 रुपये प्रति माह से अधिक थी तो कंपनी के लिए आपका पीएफ (EPF) काटना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं था। इस वजह से कई कर्मचारी पीएफ, पेंशन (EPS) और बीमा (EDLI) के फायदों से चूक जाते थे।
अब क्या बदला है?
यह सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दी गई है। इसका मतलब है कि 15,000 से 25,000 रुपये के बीच कमाने वाले कर्मचारियों के लिए अब पीएफ कटना अनिवार्य हो जाएगा।
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कैसे काम करता है EPF?
कर्मचारी और नियोक्ता दोनों कर्मचारी की मूल सैलरी, महंगाई भत्ता और रिटेनिंग अलाउंस का 12-12 प्रतिशत EPF में जमा करते हैं। कर्मचारी का पूरा 12 प्रतिशत हिस्सा सीधे EPF खाते में जाता है, जबकि नियोक्ता के 12 प्रतिशत हिस्से में से 3.67 प्रतिशत EPF में और 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जमा होता है। सरकार भी कर्मचारी की पेंशन के लिए 1.16 प्रतिशत का योगदान देती है, जबकि पेंशन योजना में कर्मचारी का कोई सीधा योगदान नहीं होता।
51 लाख नए कर्मचारी को होगा फायदा
सरकार के अनुमान के मुताबिक इस बढ़ोतरी से करीब 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के दायरे में आ जाएंगे। इससे सरकार पर हर साल 1,089 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पेंशन के लिए सरकार का सालाना बजट समर्थन मौजूदा 10,250 करोड़ रुपये से बढ़कर 11,339 करोड़ रुपये हो जाएगा। सरकारी अनुमान के मुताबिक इस बदलाव से एक कर्मचारी के कुल मासिक EPF योगदान में औसतन करीब 600 रुपये की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
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12 साल बाद क्यों हुआ यह बदलाव?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2014 में EPFO की वेतन सीमा को 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था। सरकार ने कहा है कि इस बार की बढ़ोतरी बीते सालों में हुई लगातार वेतन वृद्धि, बढ़ती आय और संगठित क्षेत्र में रोजगार के विस्तार को दिखाती है। वेतन सीमा बढ़ने से भविष्य निधि बचत, EPS के तहत पेंशन सुरक्षा और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा।
इस फैसले का आप पर क्या असर होगा?
EPFO की व्यवस्था में एक अरसे से सुधार की उम्मीद हो रही थी। यह फैसला, कर्मचारियों के हित में है लेकिन विशेषज्ञों ने यह चिंता भी जताई है कि वेतन सीमा बढ़ने के बाद नियोक्ता इस बढ़े हुए खर्च को मौजूदा कॉस्ट-टू-कंपनी (CTC) में ही समेटने की कोशिश कर सकते हैं। इससे कर्मचारियों की इन हैंड सैलरी कम हो सकती है। कानूनी तौर पर नियोक्ता के हिस्से का PF योगदान कर्मचारी की सैलरी से नहीं काटा जा सकता। नई वेतन सीमा से जुड़े दिशा-निर्देशों में इनका पालन होना अनिवार्य है।
