बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी नाम के एक शख्स के एनकाउंटर को लेकर सम्राट चौधरी की सरकार घिरती नजर आ रही है। 17 जून को सरेंडर के वक्त पुलिस ने उसकी पैर पर गोली चलाई, जिसके बाद वह गंभीर रूप से जख्मी हुआ, इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। भोजपुर के पुलिस अधीक्षक ने दावा किया कि पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जो भरत भूषण के पांव में लग गई। लोगों को भरत भूषण तिवारी से हमदर्दी है और पुलिस के खिलाफ गुस्सा भड़का है।
लोगों का कहना है कि भरत भूषण तिवारी, चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह की तरह क्रांतिकारी थे जो तंत्र से दुखी थे। उन्होंने सिर्फ सरकार और पुलिस को चेतावनी दी लेकिन सिस्टम ने उन्हें मरवा दिया। लोगों का कहना है कि पुलिसकर्मियों ने एनकाउंटर नहीं हत्या की है। जब उन्होंने हथियार छोड़ दिया था, वह पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए राजी हो गए थे, तब उनकी हत्या क्यों की गई। भरत भूषण की तारीफ में लोग कसीदे पढ़ रहे हैं।
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पुलिस एनकाउंटर पर सवाल क्यों उठे हैं?
भरत भूषण तिवारी लगातार पुलिस से उलझ रहे थे। एनकाउंटर के दिन भी उन्होंने फेसबुक लाइव किया था। फेसबुक लाइव में ही वह पुलिसकर्मियों से बातचीत करते दिखे हैं। उन्होंने अपना हथियार भी जमीन पर पुलिस की तरफ फेंक दिया था। हथियार छोड़ने के बाद भी पुलिस ने भरत तिवारी का एनकाउंट कर दिया। लोग यही दावा कर रहे हैं। वायरल वीडियो में भरत की मां भी नजर आ रहीं हैं, जो उन्हें समझा रहीं हैं कि
क्यों भरत भूषण को क्रांतिकारी बता रहे हैं लोग?
भरत भूषण भोजपुर के बिलौटी गांव में रहते थे। वह अपने गांव में सड़क, पानी और विकास के मुद्दे पर सवाल उठाते थे, अधिकारियों और नेताओं को घेरते थे। उन्होंने सरकारी कामकाज पर सवाल उठाए थे और सोशल मीडिया पर गुस्सा जाहिर किया था। उनका पोस्ट वायरल हो गया तो पुलिस उन्हें समझाने घर पहुंची। पुलिस के समझाते-समझाते उन्होंने पिस्तौल तान दी। पुलिसकर्मियों को गाली दी। पुलिस बैकफुट पर आई और चली गई। भरत भूषण इसे लाइव स्ट्रीम कर रहे थे। यह वीडियो भी उनका वायरल हो गया। बिहार पुलिस को लोग कमजोर बताने लगे और लिखा कि सम्राट चौधरी की पुलिस टीम, हथियारों लदी होने के बाद भी सिर्फ एक पिस्तौल वाले युवक से डर रही है। बिहार पुलिस की खूब किरकिरी हुई।
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किरकिरी हुई तो बिहार पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस अधीक्षक कार्यालय भोजपुर की ओर से 16 जून को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी हुई। शाहपुर थाना की सफाई में कहा गया कि जिस व्यक्ति के घर पुलिस पहुंची थी, वह मानसिक रूप से विक्षिप्त था। उसने तभी पुलिस से गालीगलौज की। पुलिस ने दावा किया कि युवक की सुरक्षा और सामाजिक शांति बरतने के लिए आरोग्यशाला भेजने की व्यवस्था की जा रही है। भेजपुर पुलिस और मेडिकल टीम उसे संभालने की कोशिश में जुटी है। व्यक्ति के पास हथिया है, उसे बरामद करने की कोशिश की जा रही है। लोगों से अपील है न अफवाह फैलाएं, न फैलने दें।
अगर मानसिक बीमार तो एनकाउंटर क्यों?
लोगों का कहना है कि अगर युवक मानसिक तौर पर बीमार था तो उसे क्यों एनकाउंटर में पुलिस ने मारा। आरोग्यधाम में भर्ती कराने की बात कहकर उसे गंभीर क्षति पहुंचाई गई, जिससे उसकी मौत हो गई। बिहार पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस, हत्या कैसे कर सकती है।
क्या चाहते थे भरत भूषण तिवारी?
भरत भूषण तिवारी स्थानीय मुद्दों को लेकर बेहद नाराज थे। उनके फेसबुक पर कई वीडियोज ऐसे हैं, जिनमें उनकी नाराजगी झलक रही है। वह बेहतर सड़क मांग रहे हैं, स्कूल मांग रहे हैं। वह जोर दे रहे थे कि अगर मेनिफेस्टो में राजनीतिक दल, अधिकारी और नेता जो वादा करते हैं उसे पूरा भी करें। सरकार उनकी मांगों को अनसुना कर ही थी, इसलिए ही वह नाराज थे। वह सामाजिक कार्यकर्ता थे और उन्हें ये सारी बातें बेचैन कर रहीं थीं। वह पुलिसकर्मियों को लगातार लताड़ भी रहे थे।
कैसा समाज चाहते थे भरत भूषण जो लोगों ने उन्हें क्रांतिकारी कह दिया?
17 जून की बात है। सुबह 9 बजे से पहले पुलिस की कुछ गाड़ियां, बिलौटी गांव में दाखिल होती हैं। भरत भूषण इसे लेकर नाराज होते हैं। अपने फेसबुक लाइव में कहते हैं कि उन्हें मारने के लिए पुलिस आई है, मुद्दों को सुलझाने के लिए नहीं आई है।
भरत भूषण तिवारी:-
पुलिस ने कहा है कि आपकी सारी मांगें पूरी की जाएंगी। शस्त्र नीचे डालने में मुझे कोई समस्या नहीं है। अगर कोई चालाकी की गई तो बहुत भारी पड़ेगी।
डीएसपी ने सरेंडर पर जोर दिया। डीएसपी से भरत कहते हैं, 'सरेंडर के लिए मांगें सुन लीजिए, समाज में और पूरे देश में आज के बाद, कोई भी नेता मंत्री, विधायक समाज के साथ झूठा वादा नहीं करेगा, अगर नहीं करेगा तो मेरे जैसे लोगों को हथियार उठाना पडे़गा। अगर सामाजिक विकास के लिए, बिना किसी लापरवाही और भ्रष्टाचार के किया जाए, तभी भारत आगे बढ़ेगा। सरेंडर तभी होगा, तब शस्त्र डाल दिया गया। अगर पुलिस ने गलत किया तो समाज और देश के लोग देखिएगा कि इनके साथ क्या किया जाएगा।'
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भरत भूषण तिवारी:-
अगर मैं इसके बाद भी जिंदा रहा, मेरे साथ छल किया गया तो मैं भी छल करूंगा और बताऊंगा कि इनके साथ क्या करना चाहिए। फिर युद्ध नहीं होगा, छल नहीं होगा। मांगे पूरी होने की संभावना दिख रही है, समाज देश के आगे बढ़ने की संभावना दिख रही है, हथियार रख दिया है।
जिस दिन एनकाउंटर किया, उस दिन पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस ने 17 जून को सुबह 9 बजे प्रेस विज्ञप्ति में कहा, 'भरत भूषण हवा में पिस्टल लहराते हुए फायरिंग की थी। पुलिस आत्मसमर्पण का दबाव बना रही थी। पुलिस पर रुक-रुककर फायरिंग हुई तो आम जनमानस और पुलिस पर खतरा मंडराने लगा। STF जवानों ने नियंत्रण में लेने के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट पहनकर पास गए, फायरिंग की जिसमें गोली शख्स के पैर में लगी। इलाज के दौरान उसने PMCH, पटना में दम तोड़ दिया।'
गोलियां मारने के लिए ही मारी गईं थीं?
सदर अस्पताल की रिपोर्ट कुछ इसी ओर इशारा कर रही है। भरत के कमर के निचले हिस्से में 4 गोलियां दागी गईं थीं, एक गोली में भी संभाला जा सकता था। गोली निकालने के बाद भी मरीज की हालत नहीं सुधरी, उसे पटना भेजा गया। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
पीड़ित परिवार ने क्या कहा है?
भरत भूषण के पिता कासीनाथ तिवारी ने कहा, 'थाने में बिठाकर रखा था, गांव में बेटे को गोली मार दी। भरत अपराधी नहीं था, उसकी मानसिक सेहत ठीक नहीं थी। इतनी बड़ी संख्या में पुलिस आई थी और एक निहत्थे को नहीं पकड़ पा रही थी। पुलिस वालों ने मेरे बेटे को मार डाला।'
लोग क्या कह रहे हैं?
एनकाउंट की गवाह, भरत की मां आशा देवी रही हैं। वह बार-बार लोगों से कह रहीं हैं कि यह गांव, बाढ़ से जूझ रहा था। यहां मिट्टी का क्षरण हुआ था, जिसे भरा ही नहीं गया। बेटा सामाजिक मुद्दा उठा रहा था, उसने सरेंडर कर दिया था फिर भी पुलिस ने गोली मार दी। भरत और पुलिस के बीच तकरार 16 जून से ही चल रहा था। फेसबुक पर कई वीडियोज उन्होंने बनाकर डाले हैं। वह अपनी बात रख रहे थे और जो समाज और सरकार से चाहते थे, उस पर बेबाकी से बोल रहे थे।
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भरत भूषण तिवारी:-
समाज और देश के लोगों से मैं कहना चाहता हूं की अब इस देश में एक नई सोच और नई क्रांति स्थापित करने के लिए शस्त्र उठा लिया गया है। बिहार के CM और बिहार के पूरे सिस्टम को मेरा संदेश है की 2 दिनों में तुम सभी मुझे बता दो की सभी घोषणाओं और सभी विकास के कार्यों को किया जाएगा या नहीं। अगर 2 दिनों में मुझे यह पता नहीं चलता है कि सभी विकास के कार्यों कराया जाएगा या नहीं तो क्रांतिकारी युद्ध का एलान होगा। समय भी बताएंगे। सबसे पहले जगदीशपुर के SDM का एनकाउंटर होगा।
लोग तो यह भी लिख रहे हैं कि देशभक्त होना, कब से मानसिक विक्षिप्त होना हो गया है।
हीरो के तौर पर क्यों देख रहे हैं लोग?
ज्यादातर सोशल मीडिया हैंडल पर लोग लिख रहे हैं कि भरत भूषण तिवारी की मौत, खराब सिस्टम से लड़ते-लड़ते हुई है। लोगों का कहना है कि भरत सरकारों से लड़ रहे थे, सवाल उठा रहे थे, उन्होंने क्रांतिकारी तरीका अपनाया। जब अंग्रेज सत्ता में थे तो भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद ने भी यही रास्ता चुना था तो वह गलत कैसे हैं। उन्होंने तब तक सहा, जब तक सह सकते थे। उनके समर्थन में हर वर्ग के लोगों ने आवाज उठाई है। विपक्षी दलों ने भी कहा है कि उनका तरीका गलत हो सकता है लेकिन मांगें जायज थीं, पुलिस ने न्याय देने के नाम पर हत्या की है।
कौन थे भरत भूषण?
भरत भूषण तिवारी बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के रहने वाले थे। उनकी उम्र सिर्फ 28 साल थी। वह सिस्टम से नाराज थे। जून से ही वह उग्र होकर सरकार के खिलाफ लिख-बोल रहे थे। वह क्षेत्र में बाढ़, कटाव और अन्य सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता थे। पुलिस उन्हें मानसिक तौर पर बीमार बता रही है। वह सोशल मीडिया पर अवैध हथियार लहराते हुए भड़काऊ वीडियो पोस्ट कर रहे थे। पुलिस के साथ चले दो दिन के तनावपूर्ण झड़प के बाद, जब उन्होंने हथियार छोड़ने का फैसला किया, पुलिस एनकाउंटर में उन्हें गोलिया लगीं। पुलिसिया कार्रवाई सवालों के घेरे में है। लोग एनकाउंट को फर्जी बता रहे हैं, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


