देश के कृषि व्यापार के लिए मई का महीना काफी अच्छा रहा है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने मई महीने में कुल 3,73,907 टन ऑयलमील (खली या खल) दूसरे देशों को भेजा है। पिछले साल के मई महीने में यह माल 3,15,326 टन था। इस हिसाब से इस बार मई में ऑयलमील के निर्यात में 19 फीसदी की अच्छी बढ़त देखने को मिली है। वित्त वर्ष की शुरुआत यानी अप्रैल के महीने में व्यापार थोड़ा कम हो गया था लेकिन मई के आंकड़ों ने उस कमी को काफी हद तक पूरा कर दिया है।  

 

ऑयलमील असल में सरसों, सोयाबीन या तोरी जैसे बीजों से तेल निकालने के बाद जो सूखा हिस्सा बच जाता है उसे कहते हैं। इसे आम बोलचाल की भाषा में 'खली' भी कहा जाता है।  गांवों के किसान अपनी फसल को पास की मिलों में ले जाते हैं। वहां मशीनों से बीजों का तेल अलग कर लिया जाता है और जो सूखा गूदा या हिस्सा बचता है, वही 'ऑयलमील' या 'खली' होता है। यह पशुओं के खाने के बहुत काम आता है क्योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इसी वजह से डेयरी चलाने वाले और मुर्गी पालन वाले लोग इसे बहुत ज्यादा खरीदते हैं। गांवों और स्थानीय इलाकों में इस खल का व्यापार बहुत बड़े पैमाने पर होता है जिससे किसानों और व्यापारियों को उनकी फसल का अच्छा दाम मिलता है।  

 

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अप्रैल की गिरावट 

इस वित्त वर्ष की शुरुआत भारत के लिए थोड़ी मुश्किल रही थी। अप्रैल के महीने में ऑयलमील के निर्यात में 21.5 फीसदी की बड़ी गिरावट आ गई थी। इसकी मुख्य वजह यह थी कि लाल सागर के रास्ते जहाजों को आने-जाने में परेशानी हो रही थी और माल भेजने का खर्चा यानी फ्रेट भी बहुत बढ़ गया था। मई के महीने में हालात सुधरे और 19 फीसदी की तेज बढ़त दर्ज की गई। अगर हम इस वित्त वर्ष के पहले दो महीनों यानी अप्रैल और मई दोनों को मिलाकर देखें तो भारत ने कुल 7,39,467 टन ऑयलमील बाहर भेजा है। पिछले साल इसी समय में यह कुल आंकड़ा 7,81,189 टन था, जो कि इस बार से थोड़ा कम है।  

चीन बना भारत का सबसे बड़ा खरीदार

मई के महीने में चीन ने सबसे ज्यादा भारतीय ऑयलमील खरीदा है और वह सबसे बड़ा ग्राहक बनकर उभरा है। अप्रैल और मई दोनों महीनों को मिलाकर देखें तो चीन ने अकेले 2,76,147 टन ऑयलमील खरीदा है। पिछले साल इसी समय में चीन ने सिर्फ 1,17,388 टन ही खरीदा था यानी इस बार चीन को होने वाला निर्यात बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इसमें सबसे ज्यादा मांग सरसों और तोरी की खली (रेपसिड मिल) की रही है जिसकी कुल मात्रा 2,73,533 टन दर्ज की गई है।  

 

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दूसरे देशों ने कितना ऑयलमील खरीदा?

चीन के अलावा दुनिया के दूसरे देशों ने भी भारत से ऑयलमील मंगाया है। बांग्लादेश ने इस दौरान भारत से 1,02,100 टन ऑयलमील खरीदा है। इसके अलावा, वियतनाम ने तो अपनी खरीदारी को बिल्कुल दोगुना कर दिया है। वियतनाम ने इस बार 80,231 टन ऑयलमील मंगाया है जबकि पिछले साल उसने सिर्फ 40,040 टन ही मंगाया था। हालांकि, कुछ ऐसे देश भी हैं जहां भारत से माल कम बिका है। दक्षिण कोरिया और थाईलैंड में भारत के ऑयलमील की मांग घट गई है जहां साउथ कोरिया में लगभग 30 फीसदी और थाईलैंड में करीब 44 फीसदी की कमी आई है।