दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा में हुई धांधली और शिक्षा में सुधार की मांग को लेकर सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके इस आंदोलन को अब बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता शेखर सुमन का बड़ा समर्थन मिल गया है। शेखर सुमन ने अपने शो के दौरान इस पूरे मुद्दे पर अपनी बात रखी और सरकार के साथ-साथ सिस्टम की खामोशी पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग कुछ भी बोलने से डर रहे हैं तब सोनम वांगचुक ही एक ऐसे इंसान हैं जो जिंदा होकर इस लड़ाई को लड़ रहे हैं।

 

शेखर सुमन ने व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें बहुत हैरानी है कि इस बड़े मुद्दे पर भी लोग इतने चुप क्यों हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि एक व्यक्ति देश के छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा चुका है लेकिन सिस्टम को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। शेखर सुमन ने व्यवस्था को गूंगा और बहरा बताया है। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक का शरीर भूख की वजह से भले ही कमजोर पड़ गया हो लेकिन उनकी लड़ाई में देश के लाखों युवाओं की ताकत और आवाज शामिल है।

 

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अस्पताल ले जाए गए सोनम वांगचुक

लगातार 20 दिनों से जारी इस अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की वजह से सोनम वांगचुक की तबीयत काफी बिगड़ गई थी। उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई है। ' कॉकरोच जनता पार्टी ' के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया कि जब वो सुबह सात बजे के करीब वहां पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें बताया कि सोनम सर को यहां से ले जाया गया है। उनके मुताबिक, पुलिस 60 साल के सोनम वांगचुक को जबरदस्ती वहां से उठा कर ले गई और किसी को पता नहीं था कि उन्हें कहां ले जाया गया है।

 

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इस मामले पर दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने बताया कि पुलिस ने किसी के साथ कोई जबरदस्ती नहीं की है और न ही वहां कोई लाठीचार्ज जैसी घटना हुई है। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही थी। डॉक्टरों की सलाह और माननीय हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। यह पूरी प्रक्रिया उनकी सुरक्षा और सेहत को ध्यान में रखकर ही की गई है।