अमेरिका की खुफिया सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) ने 70 से अधिक गोपनीय खुफिया रिपोर्ट सार्वजनिक की हैं, जो आतंकी संगठन अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा से जुड़ी हैं। इन रिपोर्ट्स में यह जानकारी सामने आई है कि ओसामा बिन लादेन ने अमेरिका में 11 सितंबर 2001 के हमलों से कई साल पहले भारत को भी निशाना बनाने की योजना बनाई थी। उसके निशाने पर कई दूसरे देशों को भी नाम था। 
  
9/11 हमलों की 25वीं बरसी पर CIA के दस्तावेजों में यह खुलासा हुआ है। CIA ने 11 सितंबर को 9/11 से जुड़े ये खुफिया दस्तावेज सार्वजनिक किए। इसे 9/11 से जुड़े रिकॉर्ड का अब तक का सबसे बड़ा रिलीज बताया जा रहा है।  

 

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रिपोर्ट्स में क्या आया सामने 

CIA रिपोर्ट में सामने आया  है  बिन लादेन कई देशों में आतंकी हमले करने की योजना बना रहा था। इन देशों में मिस्र, अरब प्रायद्वीप के देश खासकर कुवैत, सऊदी अरब और यमन, भारत, पाकिस्तान, युगांडा और संभवता नाइजीरिया शामिल थे। अमेरिकी अधिकारियों ने अल्बानिया के तिराना में बिन लादेन के कुछ साथियों को गिरफ्तार करने में मदद की थी। ये लोग कथित तौर पर हमले की तैयारी कर रहे थे। अजरबैजान के बाकू में भी इसी तरह की गतिविधियों की आशंका जताई गई थी।

 

 हालांकि, CIA की 1998 की रिपोर्ट में भारत के खिलाफ किसी खास हमले की जगह या तारीख का जिक्र नहीं है। इसमें सिर्फ इतना बताया गया था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को आकलन था कि बिन लादेन का नेटवर्क भारत और पाकिस्तान को संभावित आतंकी हमलों के निशाने के तौर पर देख रहा था। 

अमेरिका को पता थी हमले की प्लानिंग

ऐसे में यह तो साफ है कि 9/11 से तीन साल से ज्यादा पहले अमेरिका को अंदाजा था कि अल-कायदा भारत समेत कई देशों में हमला करने की योजना बना रहा है। 7 अगस्त 1998 को केन्या के नैरोबी और तंजानिया में अमेरिकी दूतावासों पर हुए बम धमाकों के कुछ हफ्तों बाद तैयार की गई थी। इन हमलों में 224 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद बिन लादेन और अल-कायदा अमेरिकी आतंकवाद विरोधी एजेंसियों के निशाने पर आ गए थे।

 

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3 साल बाद भारत में हुआ बड़ा आतंकी हमला

CIA की इस चेतावनी के करीब तीन साल बाद 13 दिसंबर 2001 को दिल्ली में संसद भवन परिसर पर आतंकी हमला हुआ था। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों ने संसद परिसर में हमला किया था। इस हमले में सुरक्षा कर्मियों और एक माली समेत 9 लोगों की मौत हुई थी। पांचों हमलावर भी मारे गए थे। यह हमला अमेरिका में 11 सितंबर के हमलों के करीब तीन महीने बाद हुआ था।