एक्यूप्रेशर थेरेपी का ट्रेंड पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ा है। इस थेरेपी में एक्यूप्रेशर प्वॉइंट को ऐक्टिव किया जाता है और न्यूरॉन को रिलेक्स होते हैं। मार्केट में एक्यूप्रेशर मैट्स और एक्यूप्रेशर फुट मैट खूब बिक रहे हैं। इन मैट्स का इस्तेमाल ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है ताकि शरीर को आराम मिल सके।   

 

बाजार में आपको अलग अलग कंपनियों के मैट्स मिल जाएंगे। एक्यूप्रेशर मैट की कीमत 1700 से 1800 के बीच है। वहीं, एक्यूप्रेशर फुट मैट सस्ते हैं। इनकी कीमत 800 से 900 रुपये के बीच में है। इन मैट्स को लेकर दावा किया जाता है कि इसके इस्तेमाल से पीठ दर्द की समस्या कम होती है। साथ ही बेहतर नींद मिलती है। क्या यह मैट्स सच में इतने प्रभावी होते हैं? इसके बारे में हमने कल्याण के फोर्टिस अस्पताल के कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक डॉ. स्वप्निल केनी से बात की।

 

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क्या एक्यूप्रेशर मैट बैक पेन कम करने में मदद करता है?

एक्यूप्रेशर मैट सामान्य मांसपेशियों से जुड़े पीठ दर्द में कुछ समय के लिए राहत दे सकता है। इससे शरीर को आराम मिल सकता है और मांसपेशियों में तनाव कम हो सकता है। हालांकि, इसके प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित हैं। इसे रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं, जैसे डिस्क की समस्या, नसों पर दबाव या रीढ़ की बनावट से जुड़ी किसी समस्या का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अगर दर्द लगातार बना रहे या बहुत ज्यादा हो तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

सही मैट की पहचान कैसे करें?

ऐसा मैट चुनें जिसमें दबाव देने वाले पॉइंट्स एक समान दूरी पर हों और उनकी नोक बहुत तेज न हो। मैट का बेस मजबूत लेकिन आरामदायक होना चाहिए। अगर आप पहली बार इस्तेमाल कर रहे हैं, तो बहुत ज्यादा तेज नोक वाले मैट की जगह मध्यम दबाव वाले मैट से शुरुआत करें। मैट का मटरियल त्वचा के लिए सुरक्षित, टिकाऊ और आसानी से साफ होने वाली होनी चाहिए।

 

अपनी त्वचा की सेंसिटिविटी को ध्यान में रखें और शुरुआत में थोड़े समय के लिए ही मैट का इस्तेमाल करें। अगर आराम महसूस हो, तो धीरे-धीरे इस्तेमाल का समय बढ़ाया जा सकता है। जिन लोगों को पहले से कमर या रीढ़ की समस्या है, वे इस्तेमाल करने से पहले फिजियोथेरेपिस्ट या ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं।

 

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सस्ते मैट इस्तेमाल करने का नुकसान

खराब क्वॉलिटी वाले मैट में दबाव देने वाले पॉइंट्स असमान या बहुत ज्यादा नुकीले हो सकते हैं। इससे त्वचा में जलन, नीले निशान, खरोंच या किसी खास हिस्से में दर्द हो सकता है। इसके अलावा एलर्जी की समस्या हो सकती है और समय के साथ मैट की क्वॉलिटी और ज्यादा खराब हो सकती है।

 

बहुत ज्यादा दबाव देने से पहले से मौजूद मांसपेशियों या शरीर के मुलायम ऊतकों की समस्या भी बढ़ सकती है। खुले घाव, संक्रमित त्वचा या ऐसे हिस्सों पर मैट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जहां संवेदनशीलता कम हो।

 

अगर इस्तेमाल के दौरान तेज दर्द, सुन्नपन या त्वचा में कोई असामान्य बदलाव दिखाई दे तो तुरंत इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।