खराब खान-पान और सेडेंटरी लाइफस्टाइल की वजह से बीमारियों का जोखिम बढ़ गया है। इसका मुख्य कारण है कि जरूरी पोषक तत्वों को नहीं लेना। हम विटामिन सी, विटामिन डी, आयरन, प्रोटीन, हेल्दी फैट्स के बारे में खूब बात करते हैं। अपनी डाइट में इन चीजों को शामिल भी करते हैं लेकिन विटामिन बी12 के बारे में जागरूक नहीं है। यह एक जरूरी विटामिन है। इस विटामिन की मुख्य रूप से कमी उन लोगों में पाई जाती है जो शाकाहारी है। महिलाओं में भी इस विटामिन की कमी पाना सामान्य बात है।
American Journal Of Clinical Nutrition की रिपोर्ट के मुताबिक 55% महिलाओं में विटामिन बी12 की कमी पाई जाती हैं। जबकि पुरुषों में यह आकंड़ा 43% है। महिलाओं को रोजाना 2.4 माइक्रोग्राम विटामिन लेना चाहिए। वहीं, प्रेग्नेंट या ब्रेस्ट फीडिंग करवाने वाली महिलाओं को रोजाना 2.6 से 2.8 माइक्रो ग्राम तक विटामिन चाहिए। पुरुषों को भी रोजाना 2.4 माइक्रोग्राम विटामिन बी12 चाहिए। सबसे जरूरी बात विटामिन बी12 सबसे ज्यादा बीफ, चिकन, टूना, अंडा, सैल्मन, ट्राउट, अंडे, दूध, योगर्ट में मिलता है। इस विटामिन की कमी की वजह से कई प्रकार की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। हमने इस बारे में डाइटिशियन और न्यूट्रीप्लस की डायरेक्टर डॉक्टर अंजलि फाटक से बात की।
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क्यों जरूरी है विटामिन B12?
विटामिन B12 हमारे शरीर का वह 'साइलेंट वर्कर' है, जो लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) के निर्माण, DNA के संश्लेषण और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को सुचारू रूप से चलाने के लिए बेहद जरूरी है। अक्सर लोग थकान, चक्कर आना या हाथ-पैरों में झुनझुनी को सामान्य कमजोरी समझकर टाल देते हैं, B12 की लंबे समय तक कमी शरीर को ऐसे नुकसान पहुंचा सकती है, जिन्हें बाद में ठीक करना असंभव हो जाता है।- न्यूट्रीप्लस की डायरेक्टर डॉक्टर अंजलि फाटक
विटामिन 12 की कमी को इग्नोर करना खतरनाक क्यों है?
नर्वस सिस्टम का स्थायी नुकसान- विटामिन B12 हमारी नसों के ऊपर 'माइलिन शीथ' नाम की एक सुरक्षात्मक परत बनाता है। B12 की कमी से यह परत घटने लगती है, जिससे हाथ-पैरों में लगातार झुनझुनी या सूनापन (Numbness) रहना, चलने-फिरने में संतुलन बिगड़ना। नसों का नुकसान कई बार 'इरिवर्सिबल' हो जाता है।
गंभीर एनीमिया- B12 के बिना शरीर पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता। इससे रेड ब्लड सेल्स का आकार असामान्य रूप से बड़ा हो जाता है और वे ठीक से काम नहीं कर पातीं। इसके कारण शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन पहुँचने में रुकावट आती है, जिससे लगातार सांस फूलना, अत्यधिक थकान और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
मानसिक स्वास्थ्य और दिमाग पर असर- B12 की कमी सीधे आपके मस्तिष्क के कामकाज को प्रभावित करती है जिसकी वजह से याददाश्त कमजोर, चीजें भूलना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, एंग्जायटी और मूड स्विंग्स, बुजुर्गों में डिमेंशिया जैसे लक्षण समय से पहले दिखने लगते हैं।
दिल की बीमारियों का खतरा- B12 की कमी से रक्त में 'होमोसिस्टीन' नामक अमीनो एसिड का स्तर बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ होमोसिस्टीन धमनियों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे ब्लड क्लॉटिंग, स्ट्रोक और हार्ट अटैक का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
मुंह के छाले और पाचन संबंधी समस्याएं- जीभ में सूजन, जीभ का एकदम लाल और चिकना हो जाना, बार-बार मुंह में छाले होना और भूख न लगना भी इसके मुख्य लक्षण हैं।
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किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें?
- बिना वजह हमेशा थकान और कमजोरी महसूस होना।
- हाथ या पैर में सुइयां चुभने जैसी अनुभूति होना।
- सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना या दिल की धड़कन तेज होना।
- ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना।
न्यूट्रिशनिस्ट सलाह: बचाव और सही पोषण
चूंकि विटामिन B12 प्राकृतिक रूप से मुख्य रूप से एनिमल बेस्ड फूड्स में पाया जाता है इसलिए शाकाहारी आबादी में इसकी कमी बहुत आम है।
शाकाहारी विकल्प: दूध, दही, पनीर, छाछ, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ और न्यूट्रिशनल यीस्ट को अपनी दैनिक डाइट में शामिल करें।
जांच करवाएं: अगर आपको ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह से अपना सीरम विटामिन बी12 टेस्ट करवाएं। अगर B12 का स्तर बहुत कम आता है, तो केवल डाइट से इसकी भरपाई होना मुश्किल होता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह से सही खुराक में B12 सप्लीमेंट्स या इंजेक्शन लेना बेहद जरूरी है।
