बंगाल की खाड़ी में बना डीप डिप्रेशन अब उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा की ओर पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, यह सिस्टम पिछले 6 घंटे में करीब 7 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा है। अभी यह उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के ऊपर बना हुआ है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 24 सितंबर की शाम तक यह कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल सकता है। इसके बाद भी यह उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा और अगले 24 घंटे में धीरे-धीरे और कमजोर होने की संभावना है।

 

यह सिस्टम अभी पूरी तरह चक्रवात में तब्दील नहीं हुआ है, यह डीप डिप्रेशन है। इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा, स्थानीय प्रशासन ने कुछ इलाकों में स्थिति के अनुसार एहतियाती कदम उठाए हैं।

 

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क्या है चक्रवात अर्नब?

बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन को लेकर ‘चक्रवात अर्नब’ नाम चर्चा में आया। हालांकि, अभी केवल इसका नाम तय हुआ है। चक्रवाती तूफानों के नाम पहले से तय सूची में होते हैं। किसी मौसम सिस्टम को नाम तभी दिया जाता है, जब वह चक्रवाती तूफान की श्रेणी में पहुंचता है। मौजूदा सिस्टम अभी चक्रवात नहीं बना है। IMD के अनुसार यह डीप डिप्रेशन है, जो 23 से 24 सितंबर की रात आंध्र प्रदेश-ओडिशा तट के पास से गुजरा। आसान भाषा में कहें तो बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बना, जो धीरे-धीरे मजबूत होकर डिप्रेशन और फिर डीप डिप्रेशन में बदल गया। 

 

इसके असर से आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के ऊपर बना डीप डिप्रेशन पिछले 6 घंटे में 7 किमी/घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा है। 24 सितंबर की सुबह यह कलिंगपट्टनम से करीब 70 किमी दूर था। इसके आज शाम तक कमजोर होने की संभावना है और अगले 24 घंटों में यह और कमजोर होगा और उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा। 

कब, क्या हुआ समझें पूरी स्थिति

मौसम विभाग के अनुसार, पहले बंगाल की खाड़ी में सिस्टम बना, जो पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में मौसम का सिस्टम मजबूत होकर डिप्रेशन और फिर डीप डिप्रेशन में बदला। इसके बाद-  

  • 23 सितंबर को डीप डिप्रेशन पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए उत्तर आंध्र प्रदेश के तट के करीब पहुंचा। IMD के अनुसार दोपहर 12 बजे इसका केंद्र कलिंगपट्टनम से करीब 30 किमी दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम में था।
  • 23 सितंबर, शाम को सिस्टम आंध्र प्रदेश के तट के और करीब पहुंचा। IMD ने इसके विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच, कलिंगपट्टनम के पास तट पार करने का अनुमान जताया।
  • 23 सितंबर, रात को डीप डिप्रेशन ने उत्तर आंध्र प्रदेश और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के तट को पार करना शुरू किया।
  • 24 सितंबर को सुबह IMD के मुताबिक इसका केंद्र कलिंगपट्टनम से करीब 30 किमी पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में था। इसका मुख्य हिस्सा जमीन पर पहुंच चुका था और लैंडफॉल की प्रक्रिया जारी थी।

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 12 घंटे तक सिस्टम के डीप डिप्रेशन की ताकत बनाए रखने की संभावना जताई गई। इसके बाद उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए धीरे-धीरे कमजोर होने का अनुमान है। इसके साथ, सिस्टम के इस प्रभाव से पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में भारी से बहुत भारी बारिश और समुद्र में बहुत खराब से बेहद खराब स्थिति की चेतावनी दी गई।

कौन लोग इससे प्रभावित? 

इसका सबसे ज्यादा असर उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश और ओडिशा में रहने वाले लोगों पर है। यहां तेज बारिश और हवाओं से निचले इलाकों में रहने वालों, किसानों, सड़क और रेल यात्रियों तथा मछुआरों को परेशानी का खतरा बना है। इसके अलावा, भारी बारिश से जलभराव और स्थानीय बाढ़ की स्थिति बन सकती है, जिससे सड़क और रेल से यात्रा करना प्रभावित हो सकता है। साथ ही छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश का असर हो सकता है।  

कहां से उठा यह तूफानी सिस्टम? 

बता दें कि यह तूफानी सिस्टम बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य हिस्से में बने एक कम दबाव के क्षेत्र से विकसित हुआ। मौसम विभाग के मुताबिक, यह 21 सितंबर को यह सिस्टम बना और धीरे-धीरे मजबूत होकर पहले डिप्रेशन और फिर डीप डिप्रेशन में बदल गया। यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तट की ओर पहुंचा। इससे पहले 23 सितंबर की रात इसने आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम के पास तट को पार किया। 

 

हालांकि, अभी इसे IMD ने चक्रवात नहीं बल्कि डीप डिप्रेशन ही माना। इसके चलते आंध्र प्रदेश, ओडिशा और आसपास के राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। 

कैसे आगे बढ़ा यह तूफान?

बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र ने धीरे-धीरे मजबूत हुआ और यह डिप्रेशन, फिर डीप डिप्रेशन में बदल गया। बाद में यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तट के करीब पहुंचा। हालांकि अब धीरे-धीरे  इसके कमजोर होने का अनुमान है। इसके असर से कई इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाएं जारी रहीं।