लोकसभा में शुक्रवार 31 जुलाई 2026 को जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पास कर दिया गया। इसका मकसद जन्म और मृत्यु के विलंबित (देरी से होने वाले) रजिस्ट्रेशन के नियमों को और सख्त बनाना है। यानी इसके तहत अगर किसी बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति की मौत का रजिस्ट्रेशन समय पर नहीं कराया जाता, तो बाद में उसे दर्ज कराना पहले से ज्यादा मुश्किल जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड समय पर और सही तरीके से दर्ज हो सकेगा। 

 

आंकड़ों के मुताबिक, देश में 99.1 फीसदी जन्म का पंजीकरण हो रहा है। इसके अलावा 99.4 फीसदी मृत्यु का पंजीकरण हो रहा है। कई राज्यों में जन्म और मृत्यु पंजीकरण का 100 फीसदी तक हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब देशभर में 99 फीसदी से ज्यादा जन्म और मृत्यु का पंजीकरण हो रहा है, तो सरकार को देरी से होने वाले रजिस्ट्रेशन पर नियम और सख्त करने का नया बिल क्यों लाना पड़ा? 

 

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सरकार को क्यों लाना पड़ा यह संशोधन बिल? 

सरकार का कहना है कि कई मामलों में लोग घटना के कई साल बाद जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने पहुंचते हैं। इतने लंबे समय बाद रिकॉर्ड की जांच करना मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति में फर्जी दस्तावेज बनवाने और गलत जानकारी दर्ज कराने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सरकार ने देर से होने वाले रजिस्ट्रेशन के नियम और सख्त करने का फैसला किया है। मौजूदा समय में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र आज सिर्फ एक दस्तावेज नहीं रह गए हैं। स्कूल में एडमिशन से लेकर पासपोर्ट बनाने, सरकारी योजनाओं, संपत्ति विवाद और कानूनी प्रक्रियाओं तक में इनकी जरूरत पड़ती है। ऐसे में गलत या फर्जी प्रमाणपत्र बड़ी समस्या बन सकते हैं। नए नियम से फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र पर रोक लगेगी। 

 

नए नियम के तहत बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति की मौत के 2 साल बाद रजिस्ट्रेशन कराया जाता है, तो वह सिर्फ प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class - JMFC) की अनुमति के बाद ही हो सकेगा। इसके लिए पहले यह जांच होगी कि जन्म या मृत्यु की जानकारी सही है या नहीं और तय शुल्क भी देना होगा। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मकसद लोगों को समय पर जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्रोत्साहित करना और फर्जी रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाना है।  

क्या है सरकार की प्लानिंग?

सरकार चाहती है कि जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन तय समय में हो। कई साल बाद होने वाले पंजीकरण पर सख्त जांच हो। फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनने की संभावना कम हो। सरकारी रिकॉर्ड अधिक भरोसेमंद बने। इसके अलावा, सरकार चाहती है कि आधार, पासपोर्ट, वोटर लिस्ट, संपत्ति और सरकारी योजनाओं में गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल पर रोक लगे।  

 

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आम लोगों पर इसका असर 

बता दें कि अगर बच्चे का जन्म या किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद समय पर रजिस्ट्रेशन करा दिया जाता है, तो आम लोगों पर नए कानून का कोई खास असर नहीं पड़ेगा। अगर कोई 2 साल या उससे ज्यादा देरी से जन्म या फिर मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए रजिस्ट्रेशन कराने जाएगा, तो उसे पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त और कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। ऐसे में अगर किसी बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति की मौत का रजिस्ट्रेशन समय पर नहीं कराया गया, तो बाद में उसे दर्ज कराना पहले से ज्यादा मुश्किल हो जाएगा।