कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के जरिए कई बड़ी कंपनियां सामाजिक जिम्मेदारी निभाती हैं। नियमों के मुताबिक, कंपनियों को अपने औसत लाभ का 2 प्रतिशत सामाजिक विकास के कामों पर खर्च करना होता है। इसी के तहत हजारों करोड़ रुपये कंपिनयों की ओर से खर्च किए जाते हैं। पिछले कुछ साल का डेटा बताता है कि कंपनियों की ओर से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) में दिए जाने वाले CSR फंड में लगभग चार गुना की कमी आ गई है। यह तब है जब 2024-25 में 40 हजार से ज्यादा CSR फंड खर्च किया गया है लेकिन प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) में जहां 4 साल पहले 1698 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। अब यही राशि घटकर 468 करोड़ पर आ गई है।

 

नियमों के मुताबिक, कंपनियों को अपनी एक CSR कमेटी बनानी होती है और उसी की सलाह पर CSR गतिविधियां संचालित होती हैं। सभी कंपनियों को इस खर्च का ब्योरा मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स को भी देनी होती है। आमतौर पर ये कंपनियां शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, सफाई, महिला कल्याण और अन्य सामाजिक कार्यों पर पैसे खर्च करती हैं। 

 

संसद के मौजूदा सत्र में राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा, राजिंदर गुप्ता, आदित्य प्रसाद, उज्ज्वल निकम समेत लगभग एक दर्जन सांसदों ने पिछले पांच साल में हुए CSR फंड के खर्च का डेटा मांगा था। साथ ही, यह भी पूछा था कि ये पैसे किन कामों पर खर्च किए गए। इसी का जवाब मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने 21 जुलाई को राज्यसभा में दिए हैं।

 

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क्या कहते हैं आंकड़े?

पिछले 5 साल में CSR फंड के जरिए किए गए विकास कार्यों पर कुल 161,246.66 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। बता दें कि कंपनियों को अपने लाभ में से 2 प्रतिशत खर्च इन गतिविधियों पर करना होता है। सबसे ज्यादा पैसे स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में खर्च किए गए हैं। 31 मार्च 2026 तक के डेटा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 में शिक्षा पर 13,877.34 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य पर 8530.60 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 2024-25 में खर्च हुए कुल 40,745 करोड़ का आधे से ज्यादा हिस्सा इन दो मदों पर ही खर्च किया गया है।

 

 

बीते कुछ साल में पर्यावरण पर खर्च में जबरदस्त इजाफा हुआ है। 2020-21 में इस पर सिर्फ 1030.16 करोड़ रुपये खर्च हुए थे लेकिन 2024-25 में कुल 3396.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा, गरीबी हटाने, आजीविका संवर्धन, ग्रामीण विकास, खेल के विकास के लिए ट्रेनिंग और वोकेशनल ट्रेनिंग पर भी हर साल लगभग एक हजार करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च की जा रही है। 

 

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PM राहत कोष में घटता जा खर्च

प्रधानमंत्री राहत कोष पूरी तरह के क्राउड फंडिंग पर आधारित है। आम जनता के अलावा कंपनियां भी इसमें पैसे दे सकती हैं। इसमें दिए गए पैसों पर आयकर की धारा 80 (G) के तहत छूट भी मिलती है। इन पैसों का इस्तेमाल प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कार्य, दंगा पीड़ितों और बड़ी दुर्घटनाओं के तहत लोगों को मदद पहुंचाने में किया जा सकता है।

 

कंपनियों के CSR के आंकड़े बताते हैं कि साल 2020-21 में कुल 1698.38 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष के तहत खर्च किए गए। अगले साल इसमें कमी आई और सिर्फ 1229.35 करोड़ रुपये खर्च किए गए। 2022-23 में 857.06 करोड़, 2023-24 में 644.10 करोड़ और 2024-25 में सिर्फ 468.50 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में खर्च किए गए।