एक पूर्व अफसर किसी महीने की एक तारीख को सोशल मीडिया पर पोस्ट करके एलान करता है कि अब वह X पर सक्रिय हो गया है। इस पोस्ट में वापसी की जो तारीख बताई जाती है उसके ठीक 5 महीने बाद उसी तारीख को उसे पार्क से उठा लिया जाता है। मॉर्निंग वॉक करने गए इंडियन पोस्ट एंड टेलीकम्युनिकेशन अकाउंट्स एंड फाइनेंस सर्विस (IP&TAFS) अधिकारी आशीष जोशी को पार्क से उठाकर पूछताछ करने का मामला अदालत तक पहुंचा तब जाकर FIR की कॉपी उपलब्ध कराई गई। आरोप है कि चुनाव आयोग के बारे में एक X पोस्ट किया गया था। माना जा रहा है कि बात सिर्फ इतनी ही नहीं है। यह वही अधिकारी है जो कभी सर्विस में होते हुए सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री तक से उलझा। जहां भी काम किया, वहां बहुत सहजता नहीं रही और आखिर में रिटायरमेंट के बाद तो खुलकर बैटिंग करने लगे। अब इस बैटिंग का निशाना भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार है।
हालिया घटना 2 सितंबर 2026 की है। आशीष जोशी ने इसी तारीख से ठीक 6 महीने पहले 2 अप्रैल 2026 से X पर अपनी सक्रियता बढ़ाई थी। उन्होंने अपने X प्रोफाइल पर यह X पोस्ट पिन करके भी रखा है। अब उनकी X पोस्ट ही उनकी मुसीबतों और चर्चा में रहने की वजह बनती जा रही हैं। रोचक बात है कि इस बार जब पुलिस ने उन्हें उठाया और पूछताछ की तो आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं ने भी इस पर पोस्ट करने लगे। अब दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और आशीष जोशी लगातार पोस्ट लिखते जा रहे हैं।
FIR क्यों हुई है?
आशीष जोशी ने ही अपने उस पोस्ट को फिर से शेयर किया है जिसके चलते उनके खिलाफ FIR हुई है। 26 अगस्त को की गई इस पोस्ट में उन्होंने लिखा था, 'पश्चिम बंगाल में चुनाव फिर से होने चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो यह लोकतंत्र के प्रति अन्याय होगा। CJI को फिर से चुनाव कराने का आदेश देना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ Nuremberg स्टाइल में ट्रायल होना है। वह इससे बच नहीं सकते गहैं। मजाकर बनाकर रख दिया है, हिंदुस्तान की डेमोक्रेसी को। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी आप लड़िए। आप एक कंप्रोमाइज्ड चुनाव हारे हैं।'
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इस मामले में पहले तो आशीष जोशी को FIR की कॉपी नहीं दी गई लेकिन जब उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया तो सुनवाई से पहले उन्हें FIR की कॉपी दे दी गई। इस FIR में जो वजह बताई गई उसके बारे में आशीष जोशी ने 'द वायर' से बात की थी। इसमें उन्होंने कहा कि भले ही FIR में किसी और का जिक्र हो लेकिन पूछताछ के दौरान उनसे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और गृह सचिव अमित शाह के बारे की गई एक पोस्ट के बारे में बार-बार पूछा गया।
हालांकि, इस पोस्ट को अब वह डिलीट कर चुके हैं। इसलिए हम इसका जिक्र नहीं करेंगे कि उस पोस्ट में क्या लिखा गया था।
2 सितंबर के बाद क्या-क्या हुआ?
आशीष जोशी को पुलिस ले गई है, इसकी जानकारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संदीप दीक्षित ने अपने एक X पोस्ट में दी थी। इसमें उन्होंने लिखा, 'आज सुबह मेरे अच्छे दोस्त और सिविल सोसायटी से संपर्क में मेरी मदद कर रहे आशीष जोशी (रिटायर्ड अडिशनल सेक्रेटरी) को दो पुलिस कांस्टेबल नेहरू पार्क से उठा ले गए। इसकी जानकारी मुझे तब मिली जब उनकी पत्नी ने सुबह मुझसे बात की। हम सुबह 10 बजे से ही उन्हें ट्रेस करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन कुछ भी पता नहीं है। हम बहुत चिंतित हैं। दिल्ली पुलिस और कमिश्नर को हमें यह जल्द से जल्द बताना चाहिए कि उन्हें (आशीष को) कहां ले जाया गया है।'
फिर शाम को 6 बजकर 55 मिनट पर संदीप दीक्षित ने दूसरा ट्वीट किया कि आशीष जोशी को छोड़ दिया गया है। संदीप दीक्षित के इस ट्वीट के बाद आशीष जोशी ने अपने हैंडल से एक पोस्ट में लिखा, 'अभी-अभी घर आया। दिल्ली स्पेशल सेल ने मुझे घर छोड़ दिया। बाकी जानकारी बाद में दूंगा।'
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फिर रात में 1:31 बजे आशीष जोशी ने एक पोस्ट किया। इसमें वह लिखते हैं, 'मिस्टर अनुराग कुमार, कमिश्नर दिल्ली पुलिस। किसी भी व्यक्ति से होने वाली पूछताछ या उसे हिरासत में लिए जाने के बारे में उस व्यक्ति के परिवार को बताना कानूनी रूप से अनिवार्य है, यह कोई वैकल्पिक कर्टसी नहीं है। कल जब मैं सुबह की सैर के लिए गया था तो मुझसे कहा गया कि कुछ देर की पूछताछ होनी है और इसी भरोसे पर मुझे ले जाया गया। हालांकि, समय बीतता गया और मैं बार-बार अपनी पत्नी के बारे में बताने को कहता रहा लेकिन संबधित अधिकारी सिर्फ यही कहते रहे कि वे 'निर्देशों का पालन' कर रहे हैं। मुझे शाम को 6 बजकर 38 मिनट पर पहला फोन करने दिया और मेरे परिवार के लोग और दोस्त दिनभर परेशान रहे। मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि आप अपनी सभी यूनिट्स को निर्देश दें कि वे जब भी किसी शख्स से पूछताछ करें तो कानूनी कर्तव्य निभाते हुए उसके परिवार को इसकी सूचना दें ताकि किसी भी शख्स के परिवार को वैसी तकलीफ ना झेलनी पड़े जैसी कि मेरे परिवार को झेलनी पड़ी।'
AAP नेताओं की एंट्री
इस मामले अरविंद केजरीवाल के मीडिया सलाहकार रहे नागेंदर शर्मा के एक ट्वीट ने रोचक मोड़ ला दिया। आशीष जोशी को इस तरह उठाए जाने की निंदा करते हुए नागेंदर शर्मा ने लिखा, 'इस तरह किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने की निंदा होनी चाहिए लेकिन ऐसे व्यक्ति को क्या अब एहसास होगा कि उन्होंने जून 2015 में बीजेपी के हाथ में खेलते हुए क्या किया था और खुद से मेरिट और ग्रेड में काफी अनुभवी अधिकारी का करियर तबाह करने की की कोशिश की थी। आप दोतरफा खेल नहीं खेल सकते...'
अगले ही दिन नागेंदर शर्मा ने इस पर एक लंबी पोस्ट लिखी। इसी पोस्ट को शेयर करते हुए AAP दिल्ली के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने लिखा, 'राजेंद्र कुमार IAS बहुत नैतिक व्यक्ति हैं। मुझे याद है कि सस्पेंड होने के बाद वह VRS लेना चाहते थे लेकिन उन्हें 11 साल से ज्यादा का समय सस्पेंडेड IAS अफसर के रूप में बिताना पड़ा। आप स्कूल जाने वाली उन दो बेटियों के मेंटल ट्रामा के बारे में सोचिए कि उन्हें कितने ताने सहने पड़ते होंगे कि उनके पिता तथाकथित भ्रष्टाचार केस में सस्पेंड हुए हैं। आशीष जोशी, आपको अपने किए का अंजाम भुगतना होगा।' हालांकि, सौरभ भारद्वाज ने ही अपने अगले पोस्ट में लिखा कि आशीष जोशी को भी अपने हिस्से की स्टोरी बताने का मौका दिया जाना चाहिए।
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नागेंदर शर्मा ने क्या लिखा था?
अपने पहले X पोस्ट के अगले दिन नागेंदर शर्मा ने लिखा, 'मैं आशीष जोशी के बारे में सारी जानकारी सार्वजनिक मंच पर रख रहा हूं। उस वक्त के LG नजीब जंग के इशारे पर यही आशीष जोशी साल 2015 में बीजेपी की कठपुतली बन गए थे। इन्होंने 1989 बैच के IAS अधिकारी राजेंदर कुमार के खिलाफ ऐंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत थी कि राजेंदर कुमार ने शीक्षा दीक्षित के शासनकाल में जो भ्रष्टाचार किए उनके बारे में उन्हें पता था। खासकर 2002 से 2012 के बीच जब राजेंदर कुमार अहम पदों पर रहे। आखिर उन्हें यह जानकारी इतने साल बाद कहां से मिली?'
नागेंदर शर्मा ने आगे लिखा, 'साल 2015 में राजेंदर कुमार तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रमुख सचिव थे। तब नजीब जंग, आशीष जोशी और ACB चीफ एमके मीणा ने मिलकर राजेंदर कुमार के खिलाफ एक साजिश रची। आशीष जोशी पहले से राजेंदर कुमार से चिढ़ते थे और नजीब जंग केजरीवाल सरकार को अस्थिर करना चाहते थे। इसके बदले में नजीब जंग ने यह सुनिश्चित किया कि आशीष जोशी केंद्र सरकार में लौट सके। आशीष जोशी की शिकायत पर ही राजेंदर कुमार को जुलाई 2016 में गिरफ्तार किया गया था। वह लगभग एक महीने तक तिहाड़ जेल में रहे। रोचक बात है कि इस मामले में ना तो शीला दीक्षित सरकार के किसी मंत्री से पूछताछ हुई और ना ही किसी अधिकारी से पूछताछ हुई। अब तक शायद आशीष जोशी को पता चल गया होगा कि बीजेपी और नजीब जंग आज भी दोस्त हैं?'
आशीष जोशी का जवाब
आशीष जोशी ने सौरभ भारद्वाज को धन्यवाद देते हुए अपना जवाब दिया। इसमें उन्होंने एक ईमेल का स्क्रीनशाट लगाया जो 17 अप्रैल 2015 को उन्होंने दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी को भेजा था। उन्होंने अपने इस पोस्ट में लिखा कि उन्हें किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी। इस पोस्ट में वह लिखते हैं, 'DDC और DUSIB में अपना बेस्ट देने के बावजूद मुझे निशाना बनाया गया, अपमानित किया गया और नियमों का पालन करने की वजह से ही मुझे वापस भेज दिया गया।'
उन्होंने आगे लिखा है, 'मेरी शिकायत तो इसी गलत व्यवहार के खिलाफ एक प्रतिक्रिया थी। सिविल सर्विस में हम देखते हैं कि कई सीनियर IAS अधिकारी तमाम गंभीर आरोपों के बावजूद बच जाते हैं। मैंने भी उम्मीद नहीं की थी कि ऐक्शन लिया जाएगा। ईमानदारी से कहूं तो मैं भी इस कार्रवाई से खुश नहीं था लेकिन तमाम दस्तावेजी सबूत ऐसे थे जिन्हें खारिज नहीं किया जा सकता था। जिम्मेदारी सेलेक्टिव नहीं हो सकती और ईमानदारी का वादा करने वाले प्रशासन को तो ऐसे अधिकारियों को दंडित करना चाहिए था।'
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आशीष जोशी ने जो ईमेल अपने इस पोस्ट में लगाया है उसमें उन्होंने चीफ सेक्रेटरी से हैरानी जताई है कि उन्हें अचानक हटा दिया गया जबकि उन्हें दिल्ली सरकार ने 3 साल के डेप्युटेशन पर लिया था। इसमें उन्होंने लिखा है कि 9 महीने में ही उन्हें हटा दिया गया। आशीष जोशी ने लिखा कि उनसे मुख्यमंत्री के सेक्रेटरी राजेंदर कुमार ने कहा कि वह DDC का काम ना देखें।
आशीष जोशी के इसी पोस्ट के बाद सौरभ भारद्वाज ने आगे पूछा, 'मिस्टर आशीष जोशी, राजेंदर कुमार को फंसाने के लिए आधिकारिक दस्तावेज किसने दिए? मैं इसकी इज्जत करता हूं कि आपने यह स्वीकार किया कि आपको वापस भेजने के फैसले की वजह से आपने यह शिकायत की थी। AAP सरकार फरवरी 2015 में बनी थी। मोदी सरकार और LG नजीब जंग अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री कार्यालय के खिलाफ कुछ खोजने की कोशिश में लगे थे। अजय माकन नजीब जंग के साथ सक्रिय तौर पर काम कर रहे थे और आप संदीप दीक्षित के भी करीब थे। आपने राजेंदर कुमार के खिलाफ जून 2015 में शिकायत की वह भी उस कथित घोटाले के आरोप में जो शीला दीक्षित की कांग्रेस सरकार के समय हुआ था। यह केस अभी भी चार्ज स्टेज पर है और सीबीआई ने कहा है कि कोई मनी ट्रेल नहीं मिला।'
इसके बाद नागेंदर शर्मा ने फिर एक X पोस्ट किया और आशीष जोशी से कई सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि आशीष जोशी ने जब राजेंदर कुमार की शिकायत की तब शीला दीक्षित या उनकी सरकार के किसी मंत्री का नाम क्यों नहीं लिया? नागेंदर शर्मा ने यह भी पूछा कि जनवरी-फरवरी 2015 में आशीष जोशी किस राजनीतिक पार्टी के वार रूम का चक्कर लगा रहे थे और राजेंद्र कुमार का करियर बर्बाद करने से पहले किस केंद्रीय मंत्री से नजीब जंग ने उनको मिलवाया था? उन्होंने यह भी लिखा है कि आशीष जोशी को ये सारी बातें बंद करके सिर्फ बेसिक सवालों के जवाब देने चाहिए।
आशीष जोशी ने सौरभ भारद्वाज और नागेंदर शर्मा को जवाब देते हुए कहा 6 सितंबर को एक और पोस्ट लिखा, 'मैंने अभी तक संयम रखा लेकिन नागेंदर शर्मा ने मेरे खिलाफ कैंपेन शुरू कर दिया और आपने (सौरभ भारद्वाज ने) भी इसका समर्थन किया तो मेरे पास कोई विकल्प नहीं बचा। अब AAP के सेनानियों को एक्सपोज करने का वक्त आ गया है कि कैसे एक वरिष्ठ IAS अधिकारी के साथ खराब व्यवहार किया गया और सत्ता में आने के बाद कैसे दिल्ली के नागरिकों को गुमराह किया गया। मेरे बैचमेट अरविंद केजरीवाल का तानाशाही रवैया। झूठ और धोखाधड़ी। यह लिस्ट लंबी है। तुम लोगों ने ही मांगा, अब रोना मत।'
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कपिल मिश्रा वाला मामला क्या है?
यह मामला साल 2019 का है। दिल्ली सरकार में अब मंत्री बन चुके कपिल मिश्रा ने एक पोस्ट लिखी थी। इस भड़काऊ कविता की शिकायत आशीष जोशी ने तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक से लिखित तौर पर की थी। इस मामले में कपिल मिश्रा के खिलाफ तो कोई कार्रवाई नहीं हुई लेकिन आशीष जोशी को सस्पेंड कर दिया गया था। आशीष जोशी ने कहा था कि कपिल मिश्रा ने जो वीडियो शेयर किया है वह देश के कुछ नागरिकों को कुछ लोगों पर हमला करने के लिए उसका रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि यह कानून के खिलाफ है।
आशीष जोशी ने यह शिकायत उस वक्त की थी जिब दिल्ली में CAA के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा था और कई महिलाएं दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे धरने पर बैठ गई थीं। इसी के चलते रास्ता बंद हो गया था। इस पर कपिल मिश्रा ने पोस्ट करते हुए लिखा था, 'जाफराबाद के जवाब में सड़क पर उतरना जरूरी हो गया है।' बता दें कि ऐसे ही एक बयान के चक्कर में कपिल मिश्रा के खिलाफ शिकायत भी की गई थी और इसका मुकदमा भी चल रहा है।
कपिल मिश्रा वाले मामले पर आशीष जोशी ने अपने एक पोस्ट में लिखा है, 'मैं संविधान को मानने वाला और स्वतंत्र आदमी हूं। साल 2019 में कपिल मिश्रा के भड़काऊ वीडियो के खिलाफ दिल्ली के कमिश्नर से शिकायत की थी। इसी वजह से मौजूदा सरकार ने मुझे 2 साल और 8 महीन के लिए सस्पेंड कर दिया था। मैंने आईपीसी की धारा 176 (अब BNS की धारा 211) के तहत कमिश्नर को चिट्ठी लिखी थी।
कब-कब हुआ टकराव?
रोचक बात है कि साल 2015 में जब आशीष जोशी की नियुक्ति हुई थी तब उन्हें AAP नेताओं ने ही चुना था। उन्हें AAP के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट दिल्ली डायलॉग कमीशन में नियुक्त किया गया। इसी का उपाध्यक्ष आशीष खेतान को बनाया गया था जो बाद में राजनीति और AAP का साथ छोड़कर विदेश चले गए। बता दें कि 2024 में इस DDC को ही दिल्ली के उपराज्यपाल ने भंग कर दिया।
फरवरी में बने DDC में नियुक्ति के चंद महीने बाद ही अरविंद केजरीवाल ने आशीष जोशी को इससे अलग कर दिया था। तब आशीष जोशी ने NDTV से बातचीत में कहा था, 'मुझे आशीष खेतान और संजय सिंह ने धमकी दी थी। वे AAP कार्यकर्ताओं के साथ मेरे दफ्तर में घुस आए थे और मुझे धमकी दी थी।' इसके बाद दिल्ली सरकार ने आशीष जोशी के पैरेंट काडर को लिखी चिट्ठी में कहा था, 'आशीष जोशी को अपने दफ्तर में तंबाकू खाते और सिगार पीते हुए पाया गया।' इतना ही नहीं, उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने बिना अपने वरिष्ठ अधिकारियों से पूछे अपना स्टाफ रख लिया और मीडिया से भी बातचीत करते रहे।
इन आरोपों पर उस वक्त आशीष जोशी ने कहा था कि यह उनकी निजी जिंदगी है लेकिन उन्होंने कभी भी दफ्तर में ना तो सिगार पिया और ना ही तंबाकू खाया। अपने खिलाफ हुई इसी कार्रवाई के बाद जुलाई 2015 में आशीष जोशी ने राजेंदर कुमार के खिलाफ शिकायत की थी। उन्हीं की शिकायत पर राजेंदर कुमार को गिरफ्तार किया गया था और वह सस्पेंड कर दिए गए थे।
कैसा रहा आशीष जोशी का करियर?
आशीष जोशी के लिंक्ड इन प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया। फिर सर्विस के दौरान ही उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स किया और पंजाब यूनिवर्सिटी से इसी विषय में MPhil भी किया। उन्होंने IIM बेंगलुरु से पब्लिक पॉलिसी में एक एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम भी किया।
अगर उनके प्रोफेशनल करियर की बात करें तो मनमोहन सिंह की सरकार में वह साल 2006 से 2011 के बीच अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय कार्यक्रम और सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए नोडल अफसर रहे। इसके बाद वह एक साल से ज्यादा समय तक CAG में रहे। फिर IT एंड कम्युनिकेशन मंत्रालय में डिप्टी डायरेक्टर बने। जून 2014 में यानी केंद्र में बीजेपी की सरकार बनते ही उन्हें दिल्ली सरकार में भेजा गया था। सबसे पहले उन्हें DUSIB में मेंबर (फाइनेंस) बनाया गया फिर लंबे समय इंतजार करना पड़ा।
दिल्ली से हटाए जाने के बाद उन्हें उत्तराखंड में टेलीकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट में तैनात कर दिया। फिर 2021 में वह केंद्र में लौटे और कम्युनिकेशन्स मिनिस्ट्री में अलग-अलग पदों पर काम करते रहे। आखिर में 31 मार्च 2026 को वह डिटायर हो गए। जब वह रिटायर हुए तब अडिशनल सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे।
फिलहाल, आशीष जोशी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं और रचनात्मक कांग्रेस का काम देख रहे संदीप दीक्षित की मदद कर रहे हैं। इस बीच वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं और हर दिन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं।
