सुप्रीम कोर्ट की सीनियर अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह के एक बयान पर हंगामा बरपा है। उन्होंने कहा है कि न्यायपालिका में यौन उत्पीड़न ऐसा डर्टी सीक्रेट है, जिसके बारे में लोग बात नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया है कि कई महिला जजों ने शिकायत की है कि पुरुष जजों ने उनके साथ यौन दुरव्यवहार किया है। इंदिया जयसिंह डीएस बोर्कर मेमोरयाल लेक्चर में हस्सा लेते हुए यह बाते कहीं हैं। 

उन्होंने कहा, 'हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जज, जिला अदालतों के जजों से यही उम्मीद करते हैं, जिससे सबसे ज्यादा नुकसान महिला जजों को ही होता है। मुझसे एक महिला जज ने बताया कि उसे एक जज ने अपनी शादी की 25वीं सालगिरह पर बुलाया था। जज ने कहा था कि वह आइटम सॉन्ग पर डांस करे। जज ने विरोध किया तो उसकी नौकरी चली गई।'

यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर बेल देने को कहा था, ठग सुकेश चंद्रशेखर दोषी करार

'ज्यूडीशियरी में सेक्सुअल हरेसमेंट डर्टी सीक्रेट...'

इंदिरा जयसिंह:-
'मेरे अबतक के अनुभव के दौरान मुझे महिला जजों से निपटना पड़ा है। मैंने कई महिला जजों का प्रतिनिधित्व किया है। इन महिला जजों ने पुरुष जजों की ओर से यौन प्रताड़ना की बातें कहीं हैं। मैंने इसलिए ही यौन उत्पीड़न पर अपनी किताब लिखी है। मैंने अपनी किताब में इसलिए लिखा है कि ज्यूडीशियरी में सेक्सुअल हरेसमेंट डर्टी सीक्रेट हैं, कोई इस पर बात नहीं करना चाहता है।'

'महिला जजों से मेहमानों पर फूल फिंकवाते हैं'

इंदिया जयसिंह ने हाई कोर्ट की पद व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'मुझसे एक महिला जज ने कहा कि जब हाई कोर्ट के सीनियर जज रिटायर होते हैं तो पार्टी दी जाती है। इस पार्टी में जिला अदालतों में काम कर रही महिला जजों को उन मेहमानों पर फूल फेंकने के लिए बुलाया जाता है जो डाइनिंग हॉल की ओर जाते हैं। यह सब हायर ज्यूडीशियरी में हो रहा है।' इंदिरा जयसिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि 2047 तक ऐसी शर्मनाक घटनाएं बंद हो जाएंगी। 

यह भी पढ़ें: 'सारा पैसा भगवान के फंड में जमा करें', बांके बिहारी मंदिर केस में सुप्रीम कोर्ट

एस मुरलीधर ने क्या कहा?

सीनियर वकील एस मुरलीधर ने भी कुछ ऐसी ही बातें कीं। उन्होंने कहा कि महिला जजों को सीनियर पुरुष सहयोगियों से यौन उत्पीड़न झेलना पड़ रहा है। उन्हें भद्दे बयानों को सुनना और सहना पड़ता है। इंदिरा जयसिंह ने कहा कि अदालतों में आम लोगों के लिए जो थोड़ा-बहुत समय बचता है, वह भी ज्यादातर अमीरों और कंपनियों के मामलों में खर्च हो जाता है।