सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर से हटा दिया है। उन्हें दिल्ली के ही सफदरजंग अस्पताल में पहुंचा दिया है। सोनम वांगचुक 21 दिनों से NEET -यूजी पेपर लीक मामले में धरने पर बैठे थे। जंतर मंतर पर बड़ी संख्या में पहुंचे पुलिसकर्मी वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों को हटा रहे है। 


सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने कहा है कि उनके पति को मुंह से, नाक से या इंजेक्शन के जरिए खाने-पीने की कोई चीज न दी जाए। वह अनशन पर हैं, उनका अनशन जबरन न तोड़ा जाए। उन्होंने कहा है कि कोई तरल पदार्थ न दिया जाए, जिनसे उनका अनशन टूटे। 

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गीतांजलि जे अंगमो, सोनम वांगचुक की पत्नी:-
'मैं दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हूं, जहां सोनम वांगचुक को भर्ती कराया गया है। उन्हें मुंह के जरिए या नसों के कोई भी दवा या तरल पदार्थ तब तक न दिया जाए, जब तक मुझसे, उनके परिवार से और पिछले 20 दिनों से उनकी सेहत पर नजर रख रहे डॉक्टरों से सहमति न ले ली जाए।'

क्या जबरन खाना खिलाना गैरकानूनी है? 

सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रुपाली पंवार बताती हैं, 'भारत में भूख हड़ताल करना गैरकानूनी नहीं है। यह संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत बोलने और शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने की आजादी का हिस्सा माना जाता है। अदालतें इसे तब तक लोकतांत्रिक अधिकार मानती हैं, जब तक कि यह शांतिपूर्ण हो।'

 

 

क्या खुदकुशी जैसा है भूख हड़ताल?

एडवोकेट शुभम गुप्ता ने कहा, 'मद्रास हाईकोर्ट ने 2021 में एक फैसले में साफ कहा था कि भूख हड़ताल करना आत्महत्या का प्रयास नहीं है। इसलिए इसमें आईपीसी की धारा 309 नहीं लगती।' अब भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता ने ले ली है। आत्महत्या की कोशिश, अब अपराध के दायरे से बाहर है।

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सोनम वांगचुक पर पुलिस क्यों हरकत में आई?

लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से दिल्ली के जंतर मंतर पर अनशन पर हैं। वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। NEET पेपर लीक मामले को लेकर वह आलोचना के केंद्र में है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने क्यों दखल दी?

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक की हर दिन सरकारी डॉक्टरों से स्वास्थ्य जांच कराई जाए। अगर जरूरत पड़ी तो तुरंत इलाज किया जाए। कोर्ट ने कहा था, 'हर नागरिक की जिंदगी कीमती है।'

 

 

एक याचिका में कोर्ट से अनुरोध किया गया था कि सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाकर जबरन फीडिंग की जाए। लेकिन कोर्ट ने फिलहाल ऐसा आदेश नहीं दिया था। सिर्फ रोजाना मेडिकल चेकअप और जरूरी इलाज का निर्देश दिया। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि सरकार इस पर अमल करेगी।

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कब सरकार जबरन अनशन तोड़ सकती है?

सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रुपाली पंवार ने कहा, 'अनशन अगर लंबा चले और स्वास्थ्य बिगड़ने लगे तो सरकार हस्तक्षेप कर सकती है क्योंकि संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन का अधिकार देता है। किसी मानसिक रूप से स्वस्थ वयस्क को जबरन खाना खिलाना नैतिक रूप से विवादास्पद है लेकिन जीवन बचाने के लिए यह करना गलत नहीं है।  

क्या किसी को पहले भी फीड किया गया है?

मणिपुर से भारत से सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) हटाने के लिए 16 साल तक भूख हड़ताल पर रही है। उन्हें इस दौरान जबरन फीडिंग दी गई थी।

दिल्ली में क्या हुआ?

दिल्ली में कोर्ट के आदेश के सोनम वांगचुक की सेहत की जांच की जा रही थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर डॉक्टर कहेंगे तो जरूरी मेडिकल मदद दी जा सकती है।

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सोनम वांगचुक की सेहत कैसी थी?

सोनम वांगचुक ने अपनी सेहत पर कहा था, 'मैं जिंदा हूं,शरीर का 20 फीसदी हिस्सा खत्म हो चुका है, पहले चर्बी खत्म हुई, फिर मांसपेशियां, उसके बाद अंगों पर असर आएगा। आखिर में दिमाग, अभी वह दिमाग काम कर रहा है।