मध्य प्रदेश के चर्चित त्विषा शर्मा केस अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सोमवार को स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह त्विषा शर्मा मौत मामले की जांच और उसे निपटाने के तरीके से परेशान है। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया से इस मामले से जुड़े घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग करते समय संयम बरतने को कहा।
त्विषा शर्मा भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में 12 मई को फंदे से लटकी मिली थीं। उनकी उम्र 33 साल थी। उनके परिवार ने उनके ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है।
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त्विषा की ससुराल ने क्या आरोप लगाए हैं?
त्विषा के ससुराल वालों ने दावा किया कि उन्हें नशे की लत थी। पुलिस ने त्विषा के पति और पेशे से वकील समर्थ सिंह और उनकी सास और पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की है।
सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को क्या सलाह दी?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि अदालत तय करेगी कि मामले की जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और पूर्वाग्रह रहित हो। बेंच ने कहा है, 'कुछ कार्रवाइयों से हम व्यथित हैं। हम अपने मीडिया मित्रों से अनुरोध करेंगे कि वे पीड़िता के परिवार या दूसरे पक्ष के परिवार के बयान लेने से बचें। चीजों को कानून और प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ने दिया जाए।'
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'दर्द को साउंड बाइट की तरह न पेश करें'
बेंच ने कहा, 'हम मीडिया से अनुरोध करते हैं कि वह पीड़िता के परिवार के बयान रिकॉर्ड न करें और उनके दर्द को महज साउंड बाइट बनाकर पेश न करें। इस मामले में कोई विमर्श गढ़ने से बचना चाहिए।'
तुषार मेहता ने मीडिया के लिए क्या दलील दी?
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मीडिया के हस्तक्षेप की वजह से मामले की जांच आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यह मामला सभी माता-पिता के लिए एक संदेश है कि इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सामना करने से बेहतर है कि बेटी का तलाक हो जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल की इस दलील पर गौर किया। कोर्ट ने कहा है कि CBI केस को अपने हाथ में ले, अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाया जाएगा।
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'मीडिया नहीं, एजेंसी से बताएं तथ्य,'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हम पीड़िता के परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आरोपियों के परिवार के सदस्यों से भी कहना चाहेंगे कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया मंचों पर बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के समक्ष अपनी बात दर्ज कराएं ताकि जारी जांच पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े या कोई पूर्वाग्रह नहीं हो।'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हम मीडिया से भी अनुरोध करते हैं कि वह ऐसे लोगों के बयान रिकॉर्ड करने से बचे जो संभावित गवाह हैं, क्योंकि इससे उन मुद्दों के निष्कर्षों पर अनावश्यक प्रभाव पड़ सकता है जिनकी जांच की जानी है।'
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सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंचा केस?
सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस केस पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा है, 'हम लोगों से भी अनुरोध करते हैं कि वे अटकलों से बचे और देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में से एक पर भरोसा रखे। हमें विश्वास है कि समय आने पर एजेंसी जांच को निष्कर्ष तक पहुंचाएगी।'
