भारत सरकार ने 7 अगस्त 2026 को अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास स्थित 27 जगहों और भौगोलिक स्थानों के आधिकारिक नाम जारी किए। ये नाम सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे पर दर्ज किए गए हैं। यह कदम चीन के हाल के वर्षों में अरुणाचल की दर्जनों जगहों के नाम बदलने के प्रयासों का जवाब माना जा रहा है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, इसका मकसद भारत की संप्रभुता और कानूनी अधिकार को मजबूत करना और जनता में इन जगहों की सही पहचान बनाना है। इन 27 जगहों में 21 भूमि क्षेत्र, 4 दर्रे, एक झील और एक स्मारक शामिल हैं।
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किन जगहों के नाम बदले गए हैं?
जमीनी इलाकों में लॉन्गजू, माजा, बीसा, बड़ा कुंदुन, छोटा कुंदुन, धन बारी, प्रीतनगर, बुद्धमंदिर, जयरामपुर, तेरितनगर, रामनगर, जसवंत गढ़, सागर, पद्मा, ज्योतिनगर, बैसाखी, छोटा रोपुक, बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा और कम्लांग नगर हैं।
जो ला, रीजा ला, पुकुर ला और थाग ला दर्रों का नाम बदला गया है। सांभो सरोवर झील और एक स्मारक का नाम शेर-ए-थापा मेमोरियल रखा गया है। लॉन्गजू गांव भी इसमें शामिल है, जो 1959 से चीन के कब्जे में है, लेकिन भारत के दावे के अंदर आता है।
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चीन अरुणाचल पर दावा क्यों ठोकता है?
अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है, लेकिन चीन इसे दक्षिण तिब्बत बता देता है और पूरे राज्य पर अपना दावा जताता है। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने बार-बार अरुणाचल की नदियों, पहाड़ों, गांवों और अन्य जगहों के 'मानकीकृत नाम' जारी किए हैं। साल 2017, 2021, 2023, 2024 और हाल ही में अप्रैल 2026 में चीन ने दर्जनों जगहों के नए नाम घोषित किए। अप्रैल 2026 में ही चीन ने 23 जगहों के नाम बदले थे।
भारत का रुख क्या है?
भारत ने तुरंत विरोध दर्ज कराया और कहा कि ये काल्पनिक नाम भारत की जमीन पर किसी भी दावे को नहीं बदल सकते। भारत का यह नया कदम चीन के इन प्रयासों का सीधा जवाब माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इसका मकसद भारत की संप्रभुता को मजबूत करना और नक्शों में स्पष्टता लाना है।
यह कदम क्यों जरूरी है?
चीन अक्सर अस्पष्टता का फायदा उठाकर काल्पनिक नाम देता है। भारत ने इन जगहों को आधिकारिक नक्शे पर डालकर अपना दावा मजबूत कर दिया है। नक्शे पर नाम होने से भूमि रिकॉर्ड, जनगणना, राजस्व, सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे की योजना बनाने में आसानी होती है। अब सरकार का तर्क है कि आम लोगों को इन जगहों की सही पहचान पता चलेगी। भारत साफ कह रहा है कि अरुणाचल भारत का हिस्सा है और रहेगा। चीन के प्रयासों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
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चीन क्या कर रहा है?
चीन नियमित रूप से अरुणाचल की जगहों के नाम बदलता रहता है। चीन, अरुणाचल के लोगों को कभी-कभी स्टेपल्ड वीजा जारी करता है। नवंबर 2025 में एक अरुणाचली महिला को शंघाई एयरपोर्ट पर यह कहकर रोका गया कि उनका भारतीय पासपोर्ट वैध नहीं है। भारत ने इसका कड़ा विरोध किया था। भारत का रुख हमेशा साफ रहा है कि ये जगहें पहले भी भारत की थीं, अभी भी हैं और हमेशा रहेंगी।
क्या जंग का अखाड़ा बनेगा अरुणाचल प्रदेश?
साल 2020 में गलवान घाटी की झड़प के बाद भारत और चीन के संबंध खराब दौर में पहुंचे हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 4 साल से ज्यादा तनाव चला। अब दोनों देश संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं और सीमा विवाद सुलझाने के लिए बातचीत चल रही है। चीन जब-जब ऐसे दावे करता है, भारत असहज हो जाता है। भारत ने बार-बार कहा है कि चीन को ऐसे कदमों से बचना चाहिए।
