ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की ब्रह्मोस मिसाइल दुनियाभर में चर्चा में है। पाकिस्तान पर सटीक हमलों से न केवल ब्रह्मोस की प्रतिष्ठा बढ़ी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय हथियारों पर भरोसा भी बढ़ा है। खासकर दक्षिण चीन सागर से सटे देशों की ब्रह्मोस से जुड़ी दिलचस्पी चीन को टेंशन में डाल रही है।
फिलीपींस ब्रह्मोस का पहला विदेशी ग्राहक है। जुलाई में पीएम मोदी की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा के दौरान इंडोनेशिया ने भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल डील की। फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने वाला दक्षिण-पूर्व एशिया का तीसरा देश है।
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यही कारण है कि दक्षिण चीन सागर के आसपास का पूरा इलाका 'ब्रह्मोस बेल्ट' के रूप में उभर रहा है। भविष्य में चीन के साथ किसी भी संघर्ष में भारत की यह मिसाइल रणनीतिक जलमार्गों और समुद्री यातायात की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
तीन तरफ से घिरा चीन
अगर नक्शे पर नजर डालें तो दक्षिण चीन सागर के पश्चिमी छोर पर स्थित वियतनाम ने भारत के साथ ब्रह्मोस की डील की है। पूर्व में फिलीपींस के पास पहले से ही यह मिसाइल मौजूद है। दक्षिण में विशाल भूभाग में फैले इंडोनेशिया के पास भी कुछ ही समय में यह बेहद घातक मिसाइल होगी। मतलब साफ है कि दक्षिण चीन सागर के तीन छोर पर ब्रह्मोस आने वाले वर्षों में तैनात होगी। उभरते ब्रह्मोस बेल्ट से चीन बेहद चिंतित है, क्योंकि ये देश दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की दादागीरी को चुनौती देने की रणनीति पर जुटे हैं।
बीजिंग की सबसे बड़ी चिंता क्या?
भारत की ब्रह्मोस मिसाइल अपनी श्रेणी की सबसे तेज और घातक मिसाइल है। पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम चीन निर्मित है। पिछले साल चीनी सिस्टम एक भी ब्रह्मोस को रोकने में कामयाब नहीं रहा। ब्रह्मोस को हवा, पानी और जमीन से लॉन्च किया जा सकता है। चीन के खिलाफ यही बड़ा एडवांटेज है। अभी चीन सीधे तौर पर ब्रह्मोस की जद में नहीं, लेकिन अगर ताइवान इसे खरीदता है तो चीन की मुख्य भूमि इसकी रेंच में होगी। यही चीन की सबसे बड़ी चिंता है।
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ब्रह्मोस मिसाइल कई अलग-अलग तरह से हमला करने की क्षमता रखती है। मौजूदा समय में चीन के पास ऐसा कोई एयर डिफेंस सिस्टम नहीं है, जो ब्रह्मोस मिसाइल को रोकने की ताकत रखता हो। इस रणनीतिक खामी का अंदाजा चीन के आसपास बसे देशों को भी है। यही वजह है कि इन देशों ने ब्रह्मोस मिसाइल पर अधिक भरोसा जताना शुरू कर दिया है, क्योंकि पिछले साल चीनी एयर डिफेंस के खिलाफ ब्रह्मोस के घातक को हमलों को दुनिया ने लाइव देखा है।
ब्रह्मोस पर दुनिया की बढ़ी दिलचस्पी
फिलीपींस ने साल 2022 में 375 मिलियन डॉलर में ब्रह्मोस की तीन बैटरी खरीदी थी। इसी साल वियतनाम ने 629 मिलियन डॉलर और इंडोनेशिया ने 630 मिलियन डॉलर की डील की। थाईलैंड ने भी अपनी दिलचस्पी दिखाई है। अगर मध्य पूर्व की बात करें तो सऊदी अरब, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात की निगाह ब्रह्मोस पर टिकी है। ब्राजील के साथ भी बातचीत चल रही है। अगर ब्राजील मिसाइल को खरीदता तो दक्षिण अमेरिका का पहला बड़ा रक्षा समझौता होगा। दक्षिण अफ्रीका ने भी ब्रह्मोस पर दिलचस्पी दिखाई है। इन सभी सौदों के परवान चढ़ते ही ब्रह्मोस की एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका महाद्वीप में मौजूदगी हो जाएगी।
चीन को काबू में रखने वाला हथियार
पिछले साल पाकिस्तान में ब्रह्मोस के कहर को चीन ने बेहद करीब से देखा है। उसने यह भी देखा कि उसका एयर डिफेंस सिस्टम नकारा है। अभी ब्रह्मोस भले ही दक्षिण चीन सागर के रास्ते चीन तक नहीं पहुंच सकती है, लेकिन यहां मौजूद उसके रणनीतिक द्वीप बिल्कुल उसकी रेंज में है। चीन लगातार दक्षिण चीन सागर में अपनी आक्रामकता बढ़ा रहा है। ऐसे में फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम के पास ब्रह्मोस के तौर पर बीजिंग को काबू में रखने का नया हथियार मिल गया है।
भारत और ब्रह्मोस पर ही भरोसा क्यों?
भारत की तरह इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस की चीन से नहीं बनती है। चीन ने लगभग अपने सभी पड़ोसियों को परेशान किया है। भारत और ब्रह्मोस पर भरोसे की एक वजह यह भी है। इसके अलावा अमेरिका समेत अन्य पश्चिमी देशों की तुलना में यह मिसाइल सस्ती और बेहद घातक है। अमेरिका से हथियार हासिल करना बेहद मु्श्किल काम है। कई बार अपने हितों तक को गिरवी रखना पड़ता है, लेकिन भारत की ऐसे मामलों में अधिक स्वतंत्रता प्रदान करता है। ब्रह्मोस पर बढ़ती दिलचस्पी की एक यह भी वजह है।
एक रात ने पलट दिया ब्रह्मोस का पूरा गेम
2025 की 9 और 10 मई की रात ब्रह्मोस की लोकप्रियता का सबसे बड़ा दिन था। भारत को जब पता चला कि पाकिस्तान बड़ा हमला प्लान कर रहा है तो उससे पहले ही भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर पहली बार ब्रह्मोस की बौछार की। सबसे रणनीतिक नूरखान बेस, सरगोधा, भुलारी और मुरीदके समेत 11 एयरफील्ड को तबाह कर दिया। पाकिस्तान की एयरफोर्स के पास उड़ान भरने तक की ताकत नहीं बची थी।
सभी मिसाइलों ने सटीक हमले के साथ भारी तबाही मचाई। आज भी दुनियाभर की सेनाओं में इन हमलों का विश्वेषण किया जा रहा है। ब्रह्मोस खरीदने वाले देश और इससे परेशान होने वाले देश भी अपने-अपने निहितार्थ निकालने में जुटे हैं। सबसे अधिक चीन चिंतित है।
चौतरफा चीन को घेर रहा भारत
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया। उसे घातक हथियारों की आपूर्ति की, भले ही वह खरे नहीं उतरे। इसके जवाब में भारत फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत कर रहा है। जापान और भारत के साथ भी सैन्य साझेदारी बढ़ रही है। पाकिस्तान के चक्कर में चीन खुद ही चौतरफा घिरता जा रहा है।
