उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सहयोगी पार्टी अपना दल (एस) ने अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने मंगलवार को लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में संगठन पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और जनसंपर्क अभियान को तेज करने का आह्वान किया।
इस बैठक में अनुप्रिया पटेल ने कहा कि पार्टी का अस्तित्व और सम्मान संगठन की मजबूती पर निर्भर करता है। आगामी चुनाव में समय कम है, इसलिए संगठन विस्तार और जनता के बीच पहुंच बढ़ाने के अभियान में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने 'हर घर झंडा अभियान' को और तेज करने के निर्देश भी दिए।
75 जिलों में संगठन मजबूत करने की कवायद
अपना दल (एस) ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में संगठन को सक्रिय करने की मुहिम शुरू कर दी है। पार्टी पदाधिकारियों को विधानसभा से लेकर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं का नेटवर्क मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वरिष्ठ नेताओं को जिलेवार जिम्मेदारी देकर संगठन की स्थिति, स्थानीय समीकरण और संभावित उम्मीदवारों पर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह भी पढ़ें: बसपा के वोटबैंक पर चंद्रशेखर की निगाह, चुनाव से पहले उठाया बड़ा कदम
कुर्मी राजनीति से आगे बढ़ने की कोशिश
लंबे समय तक कुर्मी समाज की पार्टी के रूप में पहचान रखने वाला अपना दल अब अपने सामाजिक आधार का विस्तार करना चाहता है। पार्टी पिछड़े वर्ग, दलित और अति पिछड़े समुदायों के बीच प्रभाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। संगठन में विभिन्न वर्गों के लोगों को जिम्मेदारी देकर पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसका दायरा केवल एक जाति तक सीमित नहीं है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठन विस्तार के पीछे एक बड़ा उद्देश्य बीजेपी के साथ सीट बंटवारे में अपनी स्थिति मजबूत करना भी है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में अपना दल (एस) ने 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी और बीजेपी के सहयोगी दलों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली पार्टी बनी थी।
पार्टी नेतृत्व का दावा है कि 2027 के चुनाव में उसका जनाधार और बढ़ेगा तथा वह पहले से अधिक सीटों पर प्रभावी दावेदारी पेश करेगी। यही वजह है कि संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ नए सामाजिक समीकरण साधने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
यह भी पढ़ें: दिल्ली हाई कोर्ट ने राजा भैया को दिया झटका, घरेलू हिंसा केस में बढ़ेगी मुश्किल?
गठबंधन में बढ़ सकती है सौदेबाजी की ताकत
प्रदेश की राजनीति में गैर-यादव पिछड़े वर्गों के बीच प्रभाव रखने वाली अपना दल आने वाले चुनाव में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाकर गठबंधन में अधिक हिस्सेदारी चाहती है। ऐसे में संगठन विस्तार का यह अभियान केवल चुनावी तैयारी ही नहीं, बल्कि सीट बंटवारे से पहले अपनी ताकत का प्रदर्शन भी माना जा रहा है।
